कौन हैं भाजपा को बड़ा झटका देने वाले हीरा ठाकुर? साफ-साफ वजह बताकर कांग्रेस में हो गए शामिल

यूपी तक

• 05:35 PM • 07 Sep 2026

हीरा ठाकुर के कांग्रेस में जाने से यूपी की सियासत में पिछड़े वर्ग की राजनीति फिर चर्चा में आ गई है. करीब 12 साल विधान परिषद में रहे ठाकुर ने भाजपा छोड़ने की वजह जातीय जनगणना के मुद्दे पर पिछड़े वर्गों के साथ कथित विश्वासघात को बताया.

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में सोमवार को भाजपा को उस समय झटका लगा, जब पार्टी के पूर्व नेता हीरा ठाकुर कांग्रेस में शामिल हो गए. ठाकुर उत्तर प्रदेश में मंत्री पद का दर्जा पा चुके हैं और करीब 12 साल तक विधान परिषद के सदस्य भी रहे हैं. अब उन्होंने भाजपा छोड़ने के पीछे जातीय जनगणना के मुद्दे पर पिछड़े वर्गों के साथ 'विश्वासघात' को वजह बताया है.

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हीरा ठाकुर ने कांग्रेस के उत्तर प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम, कांग्रेस के ओबीसी विभाग के प्रमुख अनिल जय हिंद और सांसद राकेश राठौर की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ली. कांग्रेस में शामिल होते ही उन्होंने जातीय जनगणना और पिछड़े वर्ग के अधिकारों का मुद्दा जोर-शोर से उठाया.

कौन हैं हीरा ठाकुर?

हीरा ठाकुर उत्तर प्रदेश की राजनीति में पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग के अधिकारों की आवाज उठाने वाले नेताओं में गिने जाते हैं. वे करीब 12 साल तक उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रहे हैं. इसके अलावा ठाकुर ने उत्तर प्रदेश राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाली है. इस पद पर उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा हासिल था.  

ठाकुर का राजनीतिक अनुभव केवल संगठन या चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पिछड़े वर्ग से जुड़े संवैधानिक और सामाजिक मुद्दों से भी उनका सीधा जुड़ाव रहा है. ठाकुर अति पिछड़े समुदाय के अधिकारों की पैरवी करते हैं. वह 'राष्ट्रीय कर्पूरी ठाकुर विचार मंच' नाम का संगठन भी चलाते हैं.

जातीय जनगणना को लेकर क्यों छोड़ी भाजपा?

कांग्रेस में शामिल होने के बाद हीरा ठाकुर ने भाजपा छोड़ने की वजह साफ तौर पर बताई. उन्होंने कहा कि जातीय जनगणना के मुद्दे पर पिछड़े वर्गों के साथ 'विश्वासघात' किए जाने से  आहत थे.

ठाकुर ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की जातीय जनगणना को लेकर उठाई गई मांग का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ने जातीय जनगणना के मुद्दे पर मजबूती से लड़ाई लड़ी, लेकिन जब जनगणना का एजेंडा सामने आया तो पिछड़ी जातियों के साथ धोखा हुआ.

कर्पूरी ठाकुर का भी किया जिक्र

कांग्रेस में शामिल होने के बाद हीरा ठाकुर ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और 'जननायक' कर्पूरी ठाकुर की विरासत का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि कर्पूरी ठाकुर देश के उन शुरुआती नेताओं में थे, जिन्होंने बिहार में पिछड़े वर्गों को आरक्षण देने का काम किया. 

हालांकि, उनके मुताबिक आज भी पिछड़े वर्ग की बड़ी आबादी अपने अधिकारों से वंचित है. हीरा ठाकुर की राजनीति में कर्पूरी ठाकुर की विचारधारा का प्रभाव उनके संगठन राष्ट्रीय कर्पूरी ठाकुर विचार मंच के नाम से भी दिखाई देता है.

कांग्रेस को क्या फायदा?

हीरा ठाकुर का कांग्रेस में जाना ऐसे समय हुआ है, जब उत्तर प्रदेश में पिछड़े वर्ग और जातीय जनगणना का मुद्दा लगातार राजनीतिक बहस के केंद्र में है. ऐसे में करीब 12 साल तक विधान परिषद में रहे और पिछड़ा वर्ग आयोग में मंत्री पद की रैंक वाली जिम्मेदारी संभाल चुके नेता का कांग्रेस के साथ आना पार्टी के लिए अहम माना जा रहा है.

दूसरी ओर, ठाकुर का अति पिछड़े वर्ग के अधिकारों के लिए काम करने का दावा भी उन्हें कांग्रेस के लिए खास बनाता है. अब देखना होगा कि कांग्रेस उनके राजनीतिक अनुभव और पिछड़े वर्ग के बीच उनकी सक्रियता का कितना फायदा उठा पाती है.

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