यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण किया गया है. आज के शो की पहली बड़ी खबर बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा अपने भतीजे आकाश आनंद को एक बार फिर अपरिपक्व बताते हुए उत्तर प्रदेश के चुनाव और बड़े राजनीतिक फैसलों से दूर करने से जुड़ी है. दूसरी खबर उस रैपिडो कांड और विवादित ट्वीट की है जिसमें आकाश आनंद ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेकर निशाना साधा था जो मायावती के गुस्से और कार्रवाई की मुख्य वजह बनाय वहीं तीसरी बड़ी खबर इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में बनने वाले 2027 के नए सियासी समीकरणों की है जहां बसपा के इस अंदरूनी घमासान का सीधा फायदा कांग्रेस, राहुल गांधी और सपा गठबंधन को मिलता दिख रहा है.
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आकाश आनंद को मायावती ने फिर किया किनारे
बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने एक बार फिर बड़ा फैसला लेते हुए अपने भतीजे और पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद को उत्तर प्रदेश के आगामी चुनावों और प्रमुख फैसलों से अलग कर दिया है. सोशल मीडिया पर जारी संदेश में मायावती ने आकाश आनंद को इमैच्योर (अपरिपक्व) करार दिया है.
यह कोई पहला मौका नहीं है जब आकाश आनंद पर ऐसी गाज गिरी हो. इससे पहले भी उन्हें पार्टी का बड़ा चेहरा बनाकर जिम्मेदारियां सौंपी गईं, रैलियां कराई गईं और उम्मीदवारों की घोषणा का अधिकार दिया गया. लेकिन अचानक उन्हें पद से पीछे धकेल दिया गया. इस फैसले के बाद आकाश आनंद ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट का बायो बदलकर खुद को सिर्फ 'बसपा का कार्यकर्ता' लिख लिया है.बार-बार अपने नंबर-2 नेता पर इस तरह की कार्रवाई से बसपा काडर और जिला समन्वयकों के बीच अविश्वास का माहौल बन रहा है.
मायावती की नाराजगी की वजह
मायावती के इस कड़े रुख के पीछे हाल ही में हुआ 'रैपिडो कांड' और उससे जुड़ा आकाश आनंद का एक ट्वीट माना जा रहा है. दरअसल बीटेक मैकेनिकल इंजीनियर अंकित कुमार मजबूरी में रैपिडो कैब चला रहे थे. कैब में बैठे चार रेलवे कर्मचारियों द्वारा एक दलित अधिकारी पर जातिसूचक टिप्पणी करने पर जब अंकित ने विरोध किया तो कंपनी ने उनकी आईडी 99 साल के लिए सस्पेंड कर दी थी.
खबर मीडिया में आने के बाद जब विवाद बढ़ा तो आकाश आनंद ने अंकित का समर्थन करते हुए एक पोस्ट लिखी. हालांकि इस पोस्ट में उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का नाम लेते हुए लिखा कि 'आरक्षण खत्म करने पर अपनी राय रखने वाले संघ प्रमुख को अंकित जैसे करोड़ों दलितों के सवाल का जवाब देना चाहिए.' संघ प्रमुख पर सीधा निशाना साधना मायावती को नागवार गुजरा. यद्यपि यह ट्वीट बाद में डिलीट करा दिया गया. लेकिन इसने मायावती को इतना नाराज कर दिया कि उन्होंने आकाश को बड़ी जिम्मेदारियों से बेदखल कर दिया.
2027 का सियासी समीकरण
मायावती के इस कदम से बीएसपी के भीतर गहरा असंतोष है जिसका सीधा असर 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव पर पड़ना तय माना जा रहा है. 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा का वोट शेयर लगभग 13 फीसदी था जो 2024 के लोकसभा चुनाव में घटकर करीब 9 फीसदी रह गया.
ऐसे में अगर दलित युवा और बसपा का पारंपरिक वोटर नाराज होता है तो उसका सीधा रुझान कांग्रेस और राहुल गांधी की तरफ हो सकता है. राहुल गांधी इन दिनों दलितों के मुद्दों, संविधान और आरक्षण पर लगातार आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं. मल्लिकाअर्जुन खड़गे के साथ हुई घटना हो या नीशू आजाद का मुद्दा, कांग्रेस का पूरा इकोसिस्टम दलित वोट बैंक को जोड़ने में लगा है. इसके अलावा चंद्रशेखर आजाद भी दलित युवाओं के बीच पैठ बना रहे हैं.अगर बसपा का कोर वोट बैंक खिसकता है तो 2027 में सपा-कांग्रेस गठबंधन को इसका बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है.
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