मेरी बेटी को छोड़ना... दामाद शायान के सपा में शामिल होने पर इमरान मसूद ने इमोशनल होकर ये कहा

कुमार अभिषेक

03 Sep 2026 (अपडेटेड: 03 Sep 2026, 07:26 PM)

सहारनपुर सांसद इमरान मसूद दामाद शायान के सपा में जाने के सवाल पर भावुक हो गए. उन्होंने कहा कि सपा में जाना गुनाह नहीं बल्कि बेटी का घर टूटना उनका असली दर्द है. मसूद ने 2022 के फैसलों और मजबूरियों का भी जिक्र किया.

Imran Masood

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सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद अपने दामाद के समाजवादी पार्टी (सपा) में शामिल होने के सवाल पर बुरी तरह भावुक हो गए. हाल ही में अखिलेश यादव के सहारनपुर दौरे के दौरान इमरान मसूद के दामाद शायान उनके साथ नजर आए थे जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में मसूद के परिवार में फूट की चर्चाएं तेज हो गईं. इस पर अपना रुख साफ करते हुए इमरान मसूद का दर्द छलक पड़ा. उन्होंने कहा कि उन्हें दामाद के सपा में जाने का दुख नहीं है बल्कि असली दर्द उनकी बेटी का घर टूटने और उसकी जिंदगी बर्बाद होने का है.

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सपा में जाना गुनाह नहीं...मेरी बच्ची को छोड़ देना गुनाह- इमरान मसूद

'पंचायत आजतक मथुरा' इवेंट के दौरान जब इमरान मसूद से दामाद शायान के सपा में शामिल होने पर सवाल किया गया तो वह थोड़े इमोशनल हो गए. उन्होंने कहा 'उस बाप की स्थिति का अंदाजा आप क्या लगा सकते हैं जिसकी बेटी अपने घर बैठी हो और जिसका घर बर्बाद हो गया हो? मेरी बेटी का एक छोटा सा बच्चा है. मैं आहत क्यों नहीं होउूंगा? जिस बाप के सामने उसकी बच्ची का दर्द हो, उसकी तकलीफ को कोई और नहीं समझ सकता. सपा में जाना गुनाह नहीं है, असली गुनाह मेरी मासूम बच्ची को छोड़ देना है.'

2022 में कांग्रेस छोड़ने और ब्लैकमेलिंग का किया जिक्र

इमरान मसूद ने आगे कहा कि '2022 के विधानसभा चुनाव के दौरान लिए गए अपने फैसलों की परतें भी खोलीं. उन्होंने कहा कि 2022 में उन्होंने दिल पर पत्थर रखकर कांग्रेस छोड़ी थी. मसूद ने खुलासा करते हुए कहा 'मैं अपनी पार्टी और अपना घर छोड़ना नहीं चाहता था. किन मजबूरियों और किस ब्लैकमेलिंग के तहत मैंने वह कदम उठाया था, उसका अंदाजा अब सबको हो गया होगा. मैंने अपने बच्चों के घर और भविष्य को बचाने के लिए वे तमाम फैसले लिए थे. जो कुछ मेरे साथ हुआ वह राजनीति का हिस्सा नहीं होना चाहिए.'

मुश्किलें इंसान को मजबूत बनाती हैं-इमरान मसूद

जब उनसे पूछा गया कि क्या इस पूरी घटना और पारिवारिक बिखराव ने उन्हें कमजोर कर दिया है तो उन्होंने कहा कि इंसान मुश्किलों से मजबूत बनता है. इमरान मसूद ने कहा कि 'मुझ पर राजनीतिक रूप से इन चीजों से कोई फर्क नहीं पड़ता. फर्क सिर्फ एक बात का है कि मुझे मेरी बेटी की तकलीफ का दर्द है. मैं किसी व्यक्ति या नेता को दोषी नहीं ठहराता, मैं तो सिर्फ अपने वक्त को दोषी ठहरा रहा हूं.'