उत्तर प्रदेश की भावी राजनीतिक दिशा, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों और प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों को लेकर गुरुवार को मथुरा में आयोजित 'पंचायत आजतक' में यूपी के कई बड़े सियासी चेहरे शामिल हो रहे हैं. इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की और कई महत्वपूर्ण राजनीतिक सवालों के खुलकर जवाब दिए. उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, प्रदेश की कानून-व्यवस्था, बीजेपी की अंदरूनी कार्यशैली और अपनी पुरानी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के ऐलान सहित कई अहम मुद्दों पर बात रखी.
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2027 का राजनीतिक रोडमैप और पिंडरा सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान
कार्यक्रम के दौरान जब अजय राय से उनके आगामी चुनावी मैदान में उतरने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि वे 2027 का विधानसभा चुनाव बनारस की अपनी पारंपरिक सीट पिंडरा से लड़ेंगे.
उन्होंने कहा, "बनारस हमारा घर है, हम काशी को कैसे भूल सकते हैं? पिंडरा हमारा घर है और हम डंके की चोट पर वहां से चुनाव लड़ेंगे." उन्होंने याद दिलाया कि इसी पिंडरा सीट से उन्होंने नौ बार के विधायक उदल को हराया था और बसपा शासन के दौरान निर्दलीय चुनाव जीतकर अपनी ताकत दिखाई थी.
2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर अजय राय ने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों और 403 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन का सृजन कर रही है और बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को खड़ा किया जा रहा है. गठबंधन के सवाल पर उन्होंने स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी के साथ सीटों का तालमेल और भविष्य के गठबंधन का फैसला पार्टी का केंद्रीय और राष्ट्रीय नेतृत्व ही करेगा.
2024 लोकसभा चुनाव और चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप
वाराणसी लोकसभा सीट से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ चुके अजय राय ने 2024 के चुनाव परिणामों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग और बीजेपी पर मिलीभगत का आरोप लगाया.
उन्होंने दावा किया कि वाराणसी चुनाव में दोपहर 12:30 बजे के बाद चुनाव आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर डेटा अपडेट करना बंद कर दिया गया था. राय के अनुसार, बनारस में 'जनता के आशीर्वाद' से वे सात राउंड तक आगे चल रहे थे, लेकिन वेबसाइट का अपडेट बंद करके शाम को नतीजे घोषित किए गए. उन्होंने आरोप लगाया कि वहां के तत्कालीन जिलाधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों ने बीजेपी के पक्ष में काम किया, जिसके एवज में उन्हें बाद में पदोन्नति और अहम जिम्मेदारियां दी गईं.
बीजेपी छोड़ने की वजह: "अटल जी के बाद कॉर्पोरेट बनी पार्टी"
पूर्व में तीन बार बीजेपी के टिकट पर विधायक रह चुके अजय राय से जब उनके वैचारिक सफर और बीजेपी से अलग होने के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने पार्टी की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार किया.
अजय राय ने कहा कि उन्होंने 1996 में पहली बार उस सीट पर बीजेपी को जीत दिलाई थी, जहां जनसंघ या बीजेपी कभी नहीं जीती थी. उन्होंने कहा कि जब तक पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का दौर था, तब तक बीजेपी में कार्यकर्ताओं की कद्र थी. लेकिन उनके बाद पार्टी में "गुजरात की कंपनी" का दबदबा हो गया और बीजेपी एक कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चलाई जाने लगी. कार्यकर्ताओं का सम्मान खत्म हो गया और उन्हें केवल दरी बिछाने तक सीमित कर दिया गया, जिसके बाद उन्होंने पार्टी छोड़ दी.
कानून-व्यवस्था और मानहानि के मुकदमे पर तीखा हमला
उत्तर प्रदेश की मौजूदा कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए अजय राय ने आरोप लगाया कि प्रदेश में जीरो टॉलरेंस की बात केवल एक दावा है. उन्होंने हाल ही में शामली में गायक अंकित बालियान की हत्या, गोरखपुर में शिवकुमार तिवारी की हत्या और महोबा, जौनपुर व गाजियाबाद में मासूम बच्चियों के साथ हुई घटनाओं का हवाला दिया.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ हुए विवाद पर उन्होंने बताया कि जब वे अयोध्या में निषाद समाज के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, तो उन पर मछली खाने का झूठा आरोप लगाया गया था. इस बयान के खिलाफ उन्होंने लखनऊ की एसीजीएम कोर्ट (थर्ड) में मुख्यमंत्री के खिलाफ मानहानि का केस दाखिल किया है. राय ने कहा कि उन्होंने किसी मुआवजे की मांग नहीं की है, बल्कि कोर्ट में आकर बिना शर्त माफी मांगने की मांग की है.
कॉरिडोर, जनमुद्दे और क्षेत्रीय चुनौतियां
प्रदेश की विकास नीतियों पर सवाल उठाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि विकास के नाम पर विनाश किया जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर के निर्माण के दौरान प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक अक्षय वट वृक्ष को नुकसान पहुंचाया गया. उन्होंने अंदेशा जताया कि अब वृंदावन और मथुरा में भी कॉरिडोर के नाम पर ऐतिहासिक स्वरूप को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है.
इसके अलावा, अजय राय ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों के गन्ने के बकाया भुगतान, पेपर लीक की समस्याओं, युवाओं की बेरोजगारी और बीएचयू (BHU) जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों की बदहाली का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता अब बदलाव चाहती है और 2027 के चुनाव में कांग्रेस मजबूती के साथ विकल्प बनकर उभरेगी.
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