300+ सीटों पर खुद लड़ सकती है BJP... जयंत, राजभर, निषाद और अनुप्रिया पटेल की पार्टी को कितनी सीटें?

आशीष श्रीवास्तव

03 Sep 2026 (अपडेटेड: 03 Sep 2026, 11:59 AM)

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बीजेपी ने एनडीए के साथ सीट शेयरिंग की तैयारी तेज कर दी है. RLD, सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल-एस को 70-80 सीटें मिलने की चर्चा से सियासी हलचल बढ़ गई है.

UP Assembly Election 2027

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उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है. लोकसभा चुनावों के मिले-जुले रुझानों और सूबे के बदलते सियासी मिजाज को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इस बार समय रहते ही अपने किलेबंदी का काम शुरू कर दिया है. 403 सीटों वाले इस विशाल राज्य में सत्ता की हैट्रिक लगाने के इरादे से मैदान में उतरने जा रही बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अपने कुनबे को एकजुट रखना और सहयोगियों के साथ एक व्यावहारिक ‘सीट-शेयरिंग फार्मूला’ तय करना है. 

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सत्ता की हैट्रिक साधने के लिए बीजेपी ने जो शुरुआती खाका खींचा है, वह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी इस बार कोई 'कैजुअल एप्रोच' अपनाने के मूड में नहीं है.  2022 के मुकाबले इस बार एनडीए का कुनबा बड़ा है और इस वजह से सीटों के बंटवारे का पेच भी उतना ही पेचीदा है. 

पश्चिम में जयंत चौधरी (RLD), पूर्वांचल में ओपी राजभर (सुभासपा) व डॉ. संजय निषाद (निषाद पार्टी) और काशी-मिर्जापुर बेल्ट में अनुप्रिया पटेल (अपना दल-एस) जैसे मजबूत क्षत्रपों को साधते हुए भाजपा 300+ सीटों पर खुद चुनाव लड़ने की रणनीति बना सकती है. ऐसी चर्चा है कि भाजपा सहयोगी दलों के पाले में 70 से 80 सीटें डाल की तैयारी में है.  मगर, विपक्षी सपा और कांग्रेस ने इसे एनडीए की अंदरूनी कलह और मजबूरी करार देकर हमला बोल दिया है. 

ये हो सकता है एनडीए सीट-शेयरिंग का संभावित खाका:

बीजेपी का प्लान: 300 से अधिक सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की रणनीति.

सहयोगियों की हिस्सेदारी: 70 से 80 सीटें छोटे दलों (RLD, अपना दल-एस, सुभासपा, निषाद पार्टी) के पाले में जाने की संभावना.

‘सिंबल एक्सपेरिमेंट’: 20 से 30 ऐसी सीटें जहां उम्मीदवार बीजेपी का हो सकता है लेकिन चुनाव चिह्न सहयोगी दल का (या इसके विपरीत).

डेडलाइन: नवंबर से दिसंबर 2026 के बीच कई दौर की वार्ताओं के बाद अंतिम फॉर्मूले पर मुहर.

2022 बनाम 2027: कितना बदला एनडीए का गणित?

2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने खुद 376 सीटों पर चुनाव लड़ा था और बाकी बची केवल 27 सीटें अपने तत्कालीन सहयोगियों (अपना दल-एस और निषाद पार्टी) को दी थीं. लेकिन 2027 का परिदृश्य अलग है. पश्चिम में जयंत चौधरी की राष्ट्रीय लोक दल (RLD) और पूर्वांचल में ओम प्रकाश राजभर की सुभासपा अब एनडीए के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं. यही वजह है कि इस बार सहयोगियों की उम्मीदें और दावे दोनों बड़े हैं. क्षेत्रीय छत्रप खास तौर पर उन सीटों को अपने पाले में चाहते हैं जहां बीजेपी ऐतिहासिक रूप से कमजोर रही है या कभी जीत नहीं सकी है. 

विपक्ष का कसा तंज

एनडीए के इस सीट फॉर्मूले की खबर बाहर आते ही मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने आक्रामक रुख अपना लिया है. सपा और कांग्रेस नेताओं का दावा है कि बीजेपी अपने क्षेत्रीय सहयोगियों को उनके जायज हक से बेदखल करने की साजिश रच रही है. विपक्ष का आरोप है कि एनडीए का यह गठबंधन वैचारिक नहीं बल्कि केवल सत्ता का सौदा है, जो सीट बंटवारे के वक्त अंतर्विरोधों के कारण बिखर जाएगा.

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