उत्तर प्रदेश की राजनीति में कौशांबी जिले की चायल विधानसभा सीट इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है. अतीक अहमद की पुलिस कस्टडी में हुई मौत के बाद विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'माफिया को मिट्टी में मिला देंगे' वाले बयान और उस पर सपा की तत्कालीन विधायक पूजा पाल द्वारा सीएम योगी की तारीफ करने से एक नई सियासी कहानी शुरू हुई थी.
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2023 के राज्यसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी से बगावत करने वाली पूजा पाल अब भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) में शामिल हो चुकी हैं और पार्टी ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की बड़ी जिम्मेदारी भी दी है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी पूजा पाल को चायल सीट से मैदान में उतारेगी या फिर प्रयागराज की किसी सीट से? वहीं दूसरी तरफ पूजा पाल के जाने से खाली हुए वैक्यूम को भरने के लिए समाजवादी पार्टी अखिलेश यादव के नेतृत्व में किसके नाम पर दांव लगाएगी? खास पेशकश 'दावेदार' में समझिए चायल सीट की पूरी इनसाइड स्टोरी.
अतीक के खिलाफ सिंबल और बीजेपी में पूजा पाल का दांव
चायल से विधायक रहीं पूजा पाल के पति (पूर्व विधायक राजू पाल) की हत्या अतीक अहमद के भाई ने की थी जिसमें बाद में सजा भी हुई. बीजेपी अतीक अहमद और माफिया राज के खिलाफ पूजा पाल को एक बड़े राजनीतिक सिंबल के तौर पर इस्तेमाल करती आई है.
2024 के लोकसभा चुनाव में सपा विधायक रहते हुए भी उन्होंने बीजेपी के लिए प्रचार किया था. हालांकि प्रयागराज और कौशांबी दोनों जगह बीजेपी चुनाव हार गई थी. लेकिन पूजा पाल का पाल वोट बैंक और महिला वोटरों पर अच्छा प्रभाव माना जाता है.
बीजेपी से दावेदारी
पूजा पाल चायल से टिकट की मजबूत दावेदार हैं. हालांकि चर्चा यह भी है कि वे प्रयागराज की किसी पारंपरिक सीट से भी चुनाव लड़ने की इच्छा रख सकती हैं जहां से वे पहले विधायक रह चुकी हैं.
बीजेपी के अन्य दावेदार: चायल से पूर्व भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता, संदीप मिश्रा (ब्राह्मण वर्ग) और हाल ही में सपा छोड़कर भाजपा में आए चंद्रबली पटेल (पटेल समाज) भी अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं.
अखिलेश यादव का 'इशारा' और सपा के दावेदार
पूजा पाल के बागी होने के बाद अखिलेश यादव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में संकेत दिया था कि सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल वहां डटकर काम करेंगे जहां पूजा पाल चुनाव लड़ेंगी. इससे एक चर्चा यह भी शुरू हुई कि क्या अखिलेश यादव सीधे श्यामलाल पाल को मैदान में उतारेंगे या किसी महिला प्रत्याशी को मौका देंगे.
अखिलेश यादव ने हाल ही में महिलाओं को अधिक टिकट देने की बात भी कही थी जिससे स्थानीय स्तर पर सपा के कई चेहरे रेस में आ गए हैं.
आस्था सिंह पटेल: महिला प्रत्याशी के तौर पर क्षेत्र में लगातार सक्रिय हैं और सुख-दुख में शामिल होकर मजबूत दावेदारी कर रही हैं.
मुस्लिम चेहरे: पूर्व विधायक आसिफ जाफरी के बेटे सालिम जाफरी और अनवार अहमद सपा के टिकट पर जनसंपर्क में जुटे हैं.
शिवपाल यादव गुट: शिवपाल यादव के करीबी माने जाने वाले बाला महाराज द्विवेदी (ब्राह्मण चेहरा) भी चायल से टिकट मांग रहे हैं.
कांग्रेस (INDIA गठबंधन) और अन्य समीकरण
अगर INDIA गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के पाले में जाती है या कांग्रेस के दावेदारों की बात करें, तो पूर्व प्रत्याशी तलत अजीम और जिलाध्यक्ष गौरव पांडे भी यहां से तैयारी कर रहे हैं. वहीं बहुजन समाज पार्टी (बसपा) जो कभी इस इलाके में काफी मजबूत हुआ करती थी. फिलहाल किसी बड़े दावेदार के बिना शांत नजर आ रही है.
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