यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की तीन प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक खबरों का विस्तार से विश्लेषण करता है. इस बुलेटिन में पहली बड़ी खबर पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के अचानक इस्तीफे और उनके कांग्रेस या सपा में शामिल होने की सियासी अटकलों पर केंद्रित है. दूसरी बड़ी खबर बीजेपी के वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बागी तेवरों से जुड़ी है, जिनके सोशल मीडिया पोस्ट्स से बीजेपी को झटका लगने और उनके सपा में जाने की चर्चाएं तेज हैं. वहीं तीसरी खबर उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सियासी लामबंदी और रणनीतियों पर आधारित है.
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1. IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा: सियासी गलियारों में हलचल, क्या थामेंगी कांग्रेस या सपा का दामन?
यूपी कैडर की 2013 बैच की तेज-तर्रार आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के नौकरी छोड़ने के फैसले ने प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में खलबली मचा दी है. संत कबीर नगर, मीरजापुर और देवरिया जैसे जिलों की डीएम रह चुकीं दिव्या मित्तल ने राजस्व विभाग में विशेष सचिव पद पर तैनाती के दौरान ही इस्तीफा सौंप दिया.
उनके इस्तीफे के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस पार्टी ने उनके समर्थन में बयान दिए हैं. मीरजापुर में कार्यकाल के दौरान सांसद अनुप्रिया पटेल के साथ उनके मतभेदों और विकास कार्यों के 'श्रेय' को लेकर हुई तकरार की चर्चाएं फिर से गर्म हैं. देवरिया में भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से उनके वैचारिक मतभेद रहे.
आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ीं दिव्या मित्तल हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं. चर्चा है कि वे पंजाब या उत्तर प्रदेश की राजनीति में कदम रख सकती हैं. मीरजापुर में उनकी मजबूत फैन फॉलोइंग देखने को मिली है. कांग्रेस द्वारा महिला नेताओं को दी जा रही तवज्जो के कारण अटकलें हैं कि वह कांग्रेस में जा सकती हैं. हालांकि उन्होंने अभी अपने भावी कदमों को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है.
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2. पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के बागी सुर: क्या बीजेपी को कहेंगे अलविदा?
भारतीय जनता पार्टी के लिए अवध और मध्य यूपी के इलाके से बड़ी चुनौती खड़ी होती दिख रही है. पासी समाज के बड़े दलित चेहरे और पूर्व केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर के सोशल मीडिया पोस्ट्स ने बीजेपी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. हाल ही में उनकी पत्नी और विधायक द्वारा मंदिर में पूजा से रोके जाने और छुआछूत के आरोपों के बाद अब कौशल किशोर ने सीधे अपनी ही पार्टी की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं.
कौशल किशोर ने हालिया ट्वीट में लिखा कि "गेंद जितनी ऊपर जानी थी चली गई, अब नीचे आ रही है और गिरने की स्पीड को कोई रोक नहीं सकता." वहीं दूसरे ट्वीट में उन्होंने कहा कि "जब कोई संगठन अपने वसूलों से भटक जाता है तो विचारधारा से जुड़े लोगों का विश्वास टूट जाता है." इन बयानों को बीजेपी के ढलान की ओर इशारा माना जा रहा है.
अगर कौशल किशोर बीजेपी का नाता तोड़कर अखिलेश यादव के साथ जाते हैं, तो यह बीजेपी के लिए अवध और लखनऊ ग्रामीण के पासी वोट बैंक में बहुत बड़ी सेंधमारी साबित हो सकती है. कौशल किशोर ने 13 सितंबर को अपने समर्थकों की एक अहम बैठक बुलाई है, जिसमें वह बीजेपी छोड़ने या नए राजनीतिक सफर की शुरुआत का औपचारिक ऐलान कर सकते हैं.
3. UP Politics 2027: दलित और पिछड़े समीकरणों पर अखिलेश यादव की नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से बिसात बिछनी शुरू हो गई है. समाजवादी पार्टी 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को और मजबूती देने के लिए बीजेपी के असंतुष्ट नेताओं और दलित चेहरों को अपने पाले में लाने की तैयारी में है.
अखिलेश यादव एक तरफ जहां प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर बीजेपी के कद्दावर दलित नेताओं के प्रति नरमी और समर्थन दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी के भीतर अंदरूनी कलह का फायदा उठाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं. कौशल किशोर जैसे बड़े दलित नेताओं के सपा के संपर्क में होने से बीजेपी को मध्य यूपी में दोहरा नुकसान झेलना पड़ सकता है. आगामी समय में इन सियासी उलटफेरों का असर प्रदेश के जातिगत और राजनीतिक समीकरणों पर पड़ना तय माना जा रहा है.
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