लखनऊ में समाजवादी पार्टी के मंच पर एक 18 साल की लड़की ने अपनी आवाज से ऐसा समां बांधा कि वहां मौजूद लोग कुछ देर के लिए सियासी माहौल भूलकर लोकगीत सुनने लगे. लोकगीत गाने वालीं युवती का नाम प्रतीक्षा यादव और ये महोबा की रहने वाली हैं. प्रतीक्षा ने अखिलेश यादव के मंच पर आल्हा गायन और 'धरती पुत्र' मुलायम सिंह यादव से जुड़ी कविता सुनाई. उनकी प्रस्तुति के बाद अखिलेश यादव ने उनका मनोबल बढ़ाया और उन्हें दोबारा गाने के लिए भी कहा.
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प्रतीक्षा यादव के लिए यह सिर्फ किसी राजनीतिक मंच पर प्रस्तुति देने का मौका नहीं था. उनकी कहानी बुंदेलखंड की उस लोक परंपरा से जुड़ी है, जिसे वह और उनकी छोटी बहन दीक्षा यादव आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. दोनों बहनें बचपन से आल्हा गायन करती आ रही हैं और बुंदेलखंड के शौर्य, इतिहास और वीरता की गाथाओं को अपनी आवाज दे रही हैं.
महोबा के बगवाहा गांव से आती है आवाज
प्रतीक्षा यादव महोबा की रहने वाली हैं और उनका गांव बगवाहा है. उन्होंने बताया कि आल्हा गायन का उनका सफर काफी कठिन रहा है. उन्होंने पहले आल्हा गायन का अध्ययन किया और इसके बारे में जाना. इसके बाद मंच तक पहुंचने के लिए उन्होंने अपने पिता के साथ काफी मेहनत की.
प्रतीक्षा के मुताबिक, उन्हें आल्हा गायन की प्रेरणा अपने पिता से मिली. उनके पिता ने ही उन्हें यह गायन सिखाया और इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए मार्गदर्शन दिया.
उनकी छोटी बहन दीक्षा यादव भी उनके साथ रहती हैं. प्रतीक्षा ने बताया कि दीक्षा उनकी ताकत हैं और जब वह गायन करती हैं तो उनकी बहन भी साथ गाती हैं.
अखिलेश यादव के मंच पर क्या सुनाया?
लखनऊ में 30 तारीख को महाराजा खेत सिंह खंगार की पुण्यतिथि भी मनाई गई थी. प्रतीक्षा ने वहां महाराजा खेत सिंह खंगार का इतिहास सुनाया. इसके अलावा उन्होंने सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव से जुड़ी कविता भी सुनाई.
प्रतीक्षा ने बताया कि जब उन्होंने मुलायम सिंह यादव से जुड़ी कविता सुनाई तो अखिलेश यादव ने उनकी तारीफ की और तालियां बजाईं. उनके मुताबिक, जितनी बार उन्होंने गाया, उतनी बार अखिलेश यादव ने क्लैपिंग की.
प्रतीक्षा ने मुलायम सिंह यादव को लेकर जो कविता सुनाई, उसमें प्रजातंत्र की पुकार और एक बार फिर 'धरती पुत्र' मुलायम सिंह जैसे नेता के आने की बात कही गई थी.
प्रतीक्षा के मुताबिक, अखिलेश यादव को यह कविता काफी पसंद आई. उन्होंने उनका मनोबल बढ़ाया और उन्हें दोबारा गाने के लिए बुलाया. प्रतीक्षा ने बताया कि जब वह वहां से जाने लगीं तो उन्हें दोबारा बुलाकर कहा गया कि बिटिया को फिर से गाने दो. इसके बाद उन्होंने दोबारा नेता जी की कविता सुनाई.
पुरुष प्रधान माने जाने वाले आल्हा गायन में दो बहनें
प्रतीक्षा बताती हैं कि आल्हा गायन को अभी भी ज्यादातर पुरुषों और लड़कों से जोड़कर देखा जाता है. जब उन्होंने इस क्षेत्र में कदम रखा तो लोगों ने कहा कि लड़कियां आल्हा गायन नहीं करतीं.
प्रतीक्षा के मुताबिक, एक बार आल्हा सम्राट उनके घर आए थे. उन्होंने उनके पिता से कहा था कि अगर लड़की इतना अच्छा नृत्य कर सकती है तो एक दिन आल्हा गायन भी कर सकती है. इसके बाद उनके पिता ने दोनों बहनों को आल्हा गायन सिखाना शुरू किया.
प्रतीक्षा ने बताया कि शुरुआत में उन्हें भी लगता था कि आल्हा गायन सीखना बहुत मुश्किल है. लेकिन उन्होंने मेहनत की और पिता से इसे सीखा.
परिवार ने दिया पूरा साथ
प्रतीक्षा के मुताबिक, उनके परिवार ने शुरू से ही उनका साथ दिया. उनकी मां, पिता और बहन ने उनका मनोबल बढ़ाया. उन्होंने बताया कि चाहे धूप हो, गर्मी हो या बारिश, उनके पिता ने उनका साथ दिया.
प्रतीक्षा ने अपनी छोटी बहन दीक्षा को भी अपनी ताकत बताया. उनके मुताबिक, दीक्षा हमेशा उनके साथ रहती हैं और गायन में भी उनका साथ देती हैं.
आगे क्या करना चाहती हैं?
प्रतीक्षा अभी 18 साल की हैं. आने वाले समय में वह क्या करेंगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी वह आगे के बारे में ज्यादा नहीं बता सकतीं. उनका कहना है कि अगर लोगों का प्यार और आशीर्वाद मिलता रहा तो वह आगे कुछ करने की कोशिश करेंगी और विकास करना चाहती हैं.
अखिलेश यादव से मुलाकात को लेकर प्रतीक्षा ने कहा कि उनके लिए यह खुशी और उत्साह का मौका था, हालांकि उन्हें थोड़ी घबराहट भी हो रही थी. अखिलेश यादव के दोबारा गाने के लिए बुलाने और मनोबल बढ़ाने को वह अपने लिए खास अनुभव मानती हैं.
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