Mood Kya Hai Chandauli: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों का बिगुल बजने से पहले ही राजनीतिक जमीन गर्माने लगी है. पूर्वांचल का बेहद समृद्ध और वीआईपी जिला माना जाने वाला 'धान का कटोरा' चंदौली जो रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का गृह जनपद और पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्रनाथ पांडेय का कर्मक्षेत्र है. वहां की हवा अब किस ओर बह रही है? यूपी तक के खास शो में पत्रकार उदय गुप्ता ने चंदौली के स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों के साथ 2027 के चुनावी मूड पर विस्तृत चर्चा की. 2022 के चुनाव में जिले की 4 सीटों में से 3 (मुगलसराय, चकिया और सैयदराजा) पर भारतीय जनता पार्टी ने जीत हासिल की थी. जबकि केवल सकलडीहा सीट पर समाजवादी पार्टी का परचम लहराया था. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सपा के वीरेंद्र सिंह द्वारा भाजपा से चंदौली सीट छीनने के बाद अब 2027 की लड़ाई बेहद दिलचस्प और 50-50 की मानी जा रही है.
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17 और 22 की लहर टूटी
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, जो लहर 2017 और 2022 के चुनावों में भाजपा के पक्ष में दिखी थी, 2027 में वो लहर टूट चुकी है.
मुगलसराय विधानसभा: व्यापारी बाहुल्य इस सीट पर मौजूदा भाजपा विधायक रमेश जायसवाल के खिलाफ भाजपा के ही 10 से अधिक दावेदार लाइन में लगे हैं. सपा में भी प्रत्याशियों की लंबी कतार है.
स्थानीय विकास बनाम महंगाई: ओवरब्रिज निर्माण (जिससे 70 साल पुरानी जाम की समस्या हल हुई), एक्सप्रेसवे, सड़कों का संजाल, आवास और राशन जैसी योजनाएं भाजपा के लिए मजबूत विकास कार्ड हैं. लेकिन पेट्रोल-डीजल के दाम और बढ़ती महंगाई से जनता के बीच आक्रोश भी देखने को मिल रहा है.
सकलडीहा में भाजपा के लिए अभेद्य किला, तो चकिया में टिकट कटने की चर्चा
सकलडीहा विधानसभा: सपा के प्रभु नारायण यादव दो बार से यहां विधायक हैं. पत्रकारों का मानना है कि भाजपा का पारंपरिक कैडर या संगठन इस सीट को आसानी से नहीं भेद सकता. यहां से भाजपा को जीतने के लिए किसी बड़े बाहुबली या धनबली चेहरे की जरूरत होगी. यही वजह है कि कई भाजपा दावेदार सकलडीहा छोड़कर मुगलसराय की ओर रुख कर रहे हैं.
चकिया (सुरक्षित) सीट: वर्तमान भाजपा विधायक कैलाश आचार्य का टिकट दोबारा कटने के आसार नजर आ रहे हैं. वनवासियों की समस्याओं और डैमेज कंट्रोल की कमी से उपजी नाराजगी के बीच यहाँ सपा का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड और कांग्रेस की युवाओं को जोड़ने की मुहिम असर दिखा सकती है.
भाजपा में अंदरूनी कलह और ब्राह्मणों की नाराजगी
सैयदराजा विधानसभा: भाजपा के सुशील सिंह यहाँ से दो बार के विधायक हैं और हैट्रिक लगाने की होड़ में हैं. लेकिन सपा के प्रतिद्वंद्वी उम्मीदवार की 5 साल तक क्षेत्र में सक्रियता ने लड़ाई को कांटे का बना दिया है. हालांकि सपा में भी टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान जारी है.
जातिगत समीकरण और ब्राह्मण उपेक्षा: पत्रकारों का कहना है कि पंडित कमलापति त्रिपाठी के दौर से राजनीतिक मिसाल रहे चंदौली में इस समय ब्राह्मण वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है. संगठन और जनप्रतिनिधियों में एक ही वर्ग/जाति के प्रभुत्व और महेंद्रनाथ पांडेय की लोकसभा हार के बाद भाजपा के भीतर अंदरूनी कलह बढ़ी है. अखिलेश यादव की नजर इसी नाराज ब्राह्मण वोट बैंक को अपने पाले में लाने पर टिकी है.
Gen-Z, युवा और किसान बनेंगे गेम चेंजर
2027 के चुनाव में Gen-Z (युवाओं) और किसानों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है. जहां एक तरफ पीएम मोदी और सीएम योगी सोशल मीडियाके जरिए युवाओं तक पहुंच रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ राहुल गांधी की मुहिम और रोजगार के मुद्दे पर युवा नजर बनाए हुए हैं.
धान का कटोरा कहे जाने वाले चंदौली में किसान इस बार मोथा तूफान से फसल नुकसान और धान-गेहूं क्रय केंद्रों पर बिहार के धान की कथित बिक्री व खाद संकट को लेकर परेशान रहे हैं. अगर चुनाव से पहले इन मुद्दों का समाधान नहीं हुआ तो इसका सीधा असर नतीजों पर देखने को मिल सकता है.
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