विनय शंकर तिवारी के इलाके में बसपा ने किसे दिया टिकट? ससुर के खिलाफ लड़ चुकी हैं चुनाव

रजत सिंह

• 10:01 AM • 28 Aug 2026

Chillupar Vidhan Sabha: चिल्लूपार विधानसभा सीट पर बीजेपी छोड़कर अस्मिता चंद ने बसपा का दामन थाम लिया है. बसपा ने उन्हें तुरंत प्रभारी बनाया. उनके मैदान में उतरने से बीजेपी, सपा और बसपा के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है और नए सियासी समीकरण बन रहे हैं.

Asmita Chand

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Chillupar Vidhan Sabha: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल की चर्चित चिल्लू पार विधानसभा सीट पर राजनीतिक सरगर्मी अचानक तेज हो गई है. लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय रहीं अस्मिता चंद ने पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर बहुजन समाज पार्टी का दामन थाम लिया है. बसपा ने भी बिना देर किए उन्हें चिल्लू पार सीट से अपना प्रभारी यानी प्रत्याशी घोषित कर दिया है. 'तिवारी के हाथे' के प्रभाव वाले इस इलाके में एक ऐसे राजनीतिक परिवार की बहू का मैदान में उतरना जिसने कभी अपने ही ससुर के खिलाफ चुनाव लड़ा था,पूर्वांचल की सियासत में नए समीकरण बना रहा है.

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बीजेपी से इस्तीफा और बसपा से मिला तुरंत टिकट

अस्मिता चंद और उनके परिवार की बीजेपी से नाराजगी की मुख्य वजह वहां मौका न मिलना बताई जा रही थी. तीन दिन पहले बीजेपी के राज्य उपाध्यक्ष पद से इस्तीफा देने के बाद परिवार सहित उन्होंने बसपा का रुख किया. बसपा में प्रभारी घोषित होने का मतलब प्रत्याशी तय होना माना जाता है. अस्मिता चंद के मैदान में आने से चिल्लूपार सीट पर लड़ाई अब और दिलचस्प हो गई है.

अस्मिता चंद का राजनीतिक बैकग्राउंड

अस्मिता चंद जिस परिवार से आती हैं उसकी पूर्वांचल की राजनीति में पीढ़ी-दर-पीढ़ी गहरी पैठ रही है.उनके पिता इंद्रप्रकाश नारायण दिग्विजयनाथ डिग्री कॉलेज में लेक्चरार हैं. ससुर राज नारायण चंद ने ब्लॉक प्रमुख के रूप में राजनीतिक सफर शुरू किया था. परिवार की इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के बावजूद अब चंद परिवार दो राजनीतिक धड़ों में बंटता दिख रहा है.एक हिस्सा बीजेपी के साथ है तो दूसरा हिस्सा अस्मिता चंद के साथ बसपा के पाले में खड़ा नजर आ रहा है.

चिल्लू पार का ऐतिहासिक समीकरण और मुकाबला

चिल्लू पार विधानसभा क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से हरिशंकर तिवारी और उनके परिवार का गढ़ माना जाता रहा है. बीजेपी के राजेश त्रिपाठी (उर्फ श्मशान बाबा) इस सीट से विधायक हैं जिन्होंने हरिशंकर तिवारी के परिवार (विनय शंकर तिवारी) के दबदबे को खत्म कर जीत दर्ज की थी. माना जा रहा है कि इस सीट पर समाजवादी पार्टी से एक बार फिर विनय शंकर तिवारी ही मैदान में होंगे.

बसपा का दांव

2022 के चुनाव में बसपा इस सीट पर तीसरे नंबर पर रही थी. पार्टी का मानना है कि क्षेत्र में मजबूत दलित वोट बैंक और अस्मिता चंद के पारिवारिक व ब्राह्मण वोटों के तालमेल से वे इस बार बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.

क्या रंग लाएगा बसपा का यह दांव?

स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि अस्मिता चंद के आने से बसपा कार्यकर्ताओं में उत्साह तो बढ़ा है. लेकिन तीसरे स्थान से पहले स्थान पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती होगी. मुकाबला मुख्य रूप से बीजेपी से ही होना है. उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण राजनीति का मुद्दा पहले से ही गरमाया हुआ है और अखिलेश यादव लगातार इस मुद्दे पर बीजेपी को घेरते रहे हैं.

ऐसे में बिना किसी गठबंधन के अकेले मैदान में उतर रही बसपा के लिए बीजेपी छोड़कर आईं अस्मिता चंद कितनी मददगार साबित होंगी और क्या वे बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगाकर सपा या बीजेपी का गणित बिगाड़ेंगी, यह आने वाला वक्त ही बताएगा.