जाट-ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर बीजेपी और रालौद की जोड़ी को कैसे रोकेगा विपक्ष?

रजत सिंह

• 05:15 PM • 26 Aug 2026

UP Kiska: बुलंदशहर की शिकारपुर सीट पर 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है. भाजपा-आरएलडी गठबंधन, जाट-ब्राह्मण वोट बैंक, अनिल शर्मा का रिपोर्ट कार्ड और सपा-कांग्रेस के बदलते समीकरण चुनावी नतीजों पर असर डाल सकते हैं.

Akhilesh, jayant and CM yogi

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Shikarpur Vidhan Sabha 2027: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक इतिहास और सियासी किस्सों की श्रृंखला में आज बात पश्चिमी यूपी की उस हॉट सीट की जहां जीत का रास्ता जातीय गणित और सटीक समीकरण साधने से होकर गुजरता है. हम बात कर रहे हैं बुलंदशहर की शिकारपुर विधानसभा सीट की. यह सीट जाट और ब्राह्मण बहुल मानी जाती है जहां पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) से भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अनिल शर्मा चुनाव जीतते आ रहे हैं. हालांकि इस सीट का इतिहास रहा है कि यहां जनता ने बसपा-सपा और बीजेपी सभी को मौका दिया है. लेकिन 2027 के चुनाव में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या आरएलडी (RLD) और बीजेपी (BJP) का गठबंधन बनने के बाद जाट और ब्राह्मण वोट बैंक एकजुट होकर बाजी एकतरफा कर देगा या फिर विपक्ष कोई नया समीकरण साधकर चौंकाएगा?

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सीट का हालिया इतिहास और मौजूदा विधायक का दावा

शिकारपुर विधानसभा पर 2002 में बीजेपी के मुंशी लाल गौतम, 2007 में बसपा के वासुदेव बाबा और 2012 में सपा के मुकेश शर्मा ने जीत दर्ज की थी. लेकिन 2017 और 2022 से यहां अनिल शर्मा का कब्जा है.

विधायक अनिल शर्मा का कहना है कि उनकी जीत की मुख्य वजह क्षेत्र का विकास और जनता से सीधा जुड़ाव है. उन्होंने दावा किया कि 2022 में वह ₹500 करोड़ से अधिक के विकास कार्य कराकर जनता के बीच गए थे और 2027 में लगभग ₹1000 करोड़ का रिपोर्ट कार्ड लेकर उतरेंगे.अनिल शर्मा के अनुसार, वह जनता की 300 से 400 समस्याओं को हर साल खुद बैठकर सुलझाते हैं.

समाजवादी पार्टी का पलटवार

सपा के बुलंदशहर जिलाध्यक्ष मतलूब अली ने 2022 की हार को जनता का फैसला बताते हुए कहा कि तब और अब की परिस्थितियों में बड़ा फर्क आ चुका है. 2022 में सपा और आरएलडी साथ थे और ज्यादातर सीटों पर दूसरे नंबर पर रहे थे. 2024 के लोकसभा चुनाव में आरएलडी के अलग होने के बावजूद कांग्रेस के साथ मिलकर सपा ने हार का अंतर काफी कम किया.

सपा जिलाध्यक्ष का दावा है कि 5 साल के जमीनी काम और नए गठबंधन समीकरणों के सहारे 2027 में बुलंदशहर की सातों की सातों विधानसभा सीटों पर विपक्ष परचम लहराएगा.

जातिगत आंकड़े

शिकारपुर सीट पर चुनाव पूरी तरह से जातीय गोलबंदी के इर्द-गिर्द घूमता है. एक अनुमान के मुताबिक यहां का मतदाता ढांचा कुछ इस प्रकार है.

ब्राह्मण: लगभग 58,000

जाट: लगभग 54,000

मुस्लिम: लगभग 52,000

जाटव (दलित): लगभग 44,000

क्षत्रिय: लगभग 30,000

पाल/बघेल: लगभग 22,000

लोध व वैश्य: 20,000-20,000 (प्रत्येक)

वाल्मीकि: लगभग 12,000

अन्य: लगभग 18,000

अगर बीजेपी और आरएलडी के साथ आने से 58 हजार ब्राह्मण और 54 हजार जाट मतदाता एकजुट होते हैं तो यह आंकड़ा 1.12 लाख के पार पहुंच जाता है जो किसी भी चुनाव का रुख मोड़ने के लिए काफी है.

2027 के बड़े सवाल और स्थानीय पत्रकारों का विश्लेषण

स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, 2027 का चुनाव मुख्य रूप से टिकट बंटवारे और प्रत्याशी के चेहरे पर निर्भर करेगा.

बीजेपी में विकल्प की चर्चा: वर्तमान विधायक अनिल शर्मा का स्वास्थ्य ठीक न रहने के कारण चर्चा है कि क्या बीजेपी उनके बेटे को मौका देगी या फिर किसी नए चेहरे पर दांव लगाएगी.

आरएलडी और कांग्रेस का दावा: यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या यह सीट एनडीए गठबंधन में आरएलडी के खाते में जा सकती है? वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन में क्या सपा इस ब्राह्मण बहुल सीट को कांग्रेस के लिए छोड़ेगी ताकि बीजेपी के कैडर वोट बैंक में सेंध लगाई जा सके?

कुल मिलाकर शिकारपुर का रण इस बार बेहद दिलचस्प होने वाला है जहां एक तरफ बीजेपी-आरएलडी का मजबूत वोट बैंक है तो दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस का बदलता समीकरण.