ऊंचाहार में मनोज पांडेय के खिलाफ किसे टिकट देंगे अखिलेश यादव?

रजत सिंह

• 02:09 PM • 25 Aug 2026

रायबरेली की ऊंचाहार सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी घमासान तेज है. भाजपा में आए मंत्री मनोज पांडे के सामने सपा-कांग्रेस गठबंधन, जातीय समीकरण और मौर्य फैक्टर बड़ी चुनौती हैं. जानिए ऊंचाहार का पूरा राजनीतिक गणित और संभावित मुकाबला.

Akhilesh Yadav and Manoj Pandey

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समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव के कभी सबसे करीबी नेताओं में शुमार मनोज पांडे आज योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. 2024 के राज्यसभा चुनाव में पाला बदलकर बीजेपी का दामन थामने वाले मनोज पांडे के इस कदम ने रायबरेली की ऊंचाहार विधानसभा सीट का पूरा सियासी गणित उथल-पुथल कर दिया है. 2024 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी के खिलाफ भाजपा के पक्ष में प्रचार करने वाले मनोज पांडे के सामने अब 2027 का विधानसभा चुनाव सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाला है. तीन बार के विधायक मनोज पांडे का दावा है कि वे ऊंचाहार से ही चुनाव लड़ेंगे, लेकिन क्या नया जातीय समीकरण और सपा-कांग्रेस गठबंधन उनके विजय रथ को रोक पाएगा? आइए जानते हैं ऊंचाहार का पूरा जमीनी समीकरण और पत्रकारों की राय.

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मनोज पांडे का दावा और विकास बनाम जातीय समीकरण

ऊंचाहार सीट पर लगातार तीन बार से विधायक मनोज पांडे का एनडीए (बीजेपी) से टिकट लगभग तय माना जा रहा है.पिछली बार भाजपा से चुनाव लड़े अमरपाल मौर्य के राज्यसभा सदस्य और राष्ट्रीय कार्यकारिणी में चले जाने के बाद मनोज पांडे बीजेपी के सबसे मजबूत अकेले दावेदार हैं.

समर्थकों और स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि मनोज पांडे ने इलाके में काफी काम कराया है जिससे उनकी व्यक्तिगत साख मजबूत हुई है.

समीकरण की चुनौती

मनोज पांडे अब तक सपा के 'यादव + मुस्लिम' (MY) कोर वोट बैंक के सहारे जीतते आए थे. बीजेपी में आने के बाद यह वोट बैंक उनके पाले से खिसक सकता है जिससे मुकाबला काफी कड़ा होने के आसार हैं. हालांकि मनोज पांडे का कहना है कि ऊंचाहार में सपा की पहचान उन्हीं के दम पर बनी थी.

इंडिया गठबंधन (सपा-कांग्रेस) में दावेदारों की लंबी कतार

रायबरेली लोकसभा सीट से खुद राहुल गांधी सांसद हैं. इसलिए कांग्रेस ऊंचाहार सीट पर अपना मजबूत दावा ठोक रही है.वहीं अखिलेश यादव इसे व्यक्तिगत प्रतिष्ठा की लड़ाई मान रहे हैं.

कांग्रेस के दावेदार: पूर्व विधायक अजयपाल सिंह, पिछले चुनाव में लड़े अतुल सिंह और राकेश सिंह राणा टिकट की रेस में आगे चल रहे हैं.

सपा के संभावित चेहरे: समाजवादी पार्टी पूर्व प्रमुख बीएन मौर्य पर दांव लगा सकती है. इसके अलावा कानपुर में लोकप्रिय ओम प्रकाश मिश्र और यहां तक कि मनोज पांडे के भतीजे को भी मैदान में उतारने की चर्चाएं हैं. यह भी संभव है कि कांग्रेस का कोई मजबूत चेहरा सपा के 'साइकिल' सिंबल पर चुनाव लड़ जाए.

स्वामी प्रसाद मौर्य और उत्कर्ष मौर्य का फैक्टर

ऊंचाहार के सियासी समीकरण में स्वामी प्रसाद मौर्य का परिवार भी बड़ा किरदार निभा सकता है. स्वामी प्रसाद मौर्य के बेटे उत्कर्ष मौर्य इस सीट से दो बार चुनाव लड़ चुके हैं. 2017 में वे भाजपा के टिकट पर मनोज पांडे के खिलाफ लड़े थे और बेहद कम मार्जिन से हारे थे.

यदि सपा-कांग्रेस गठबंधन से उत्कर्ष मौर्य को मौका नहीं मिलता है तो स्वामी प्रसाद मौर्य अपनी नई पार्टी और छोटे दलों के गठबंधन के जरिए अपने बेटे को तीसरे कोण के रूप में मैदान में उतार सकते हैं. यह कदम मौर्य-कुशवाहा वोटों को बांटकर समीकरण बिगाड़ सकता है.

ऊंचाहार में इस बार लड़ाई सिर्फ दो दलों की नहीं बल्कि मनोज पांडे की साख और अखिलेश यादव के 'बदले के दांव' की है. एक तरफ जहां भाजपा के पास मनोज पांडे का कैडर और सरकारी मशीनरी का बल होगा. वहीं दूसरी तरफ सपा-कांग्रेस का संयुक्त गठबंधन और मौर्य वोटों की गोलबंदी इस मुकाबले को राज्य की सबसे दिलचस्प और हाई-प्रोफाइल सीटों में से एक बना रही है.

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