Akhilesh Yadav Reservation Statement: दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ आरक्षण सुधार आंदोलन अब उत्तर प्रदेश की सियासत में भी बड़ा मुद्दा बनता दिखाई दे रहा है. 21 अगस्त को दिल्ली में बड़ी संख्या में छात्र और युवा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर जुटे थे. प्रदर्शनकारियों का कहना था कि सरकारी योजनाओं और आरक्षण का लाभ जरूरतमंद लोगों तक पहुंचे और इसके आधार में जाति के बजाय योग्यता या आर्थिक स्थिति को भी महत्व दिया जाए. प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई और कई लोगों को हिरासत में लिए जाने को लेकर भी विवाद हुआ. इसके बाद आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों ने लखनऊ पहुंचकर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की. इसी बीच अखिलेश यादव और चंद्रशेखर आजाद ने आरक्षण के मुद्दे पर बीजेपी पर तीखे हमले किए हैं.
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डिप्टी सीएम से मिले आंदोलनकारी
लखनऊ में आरक्षण सुधार आंदोलन के प्रतिनिधिमंडल ने हर्ष दुबे के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक से मुलाकात की और अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन सौंपा. इसके बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में पाठक ने आंदोलनकारियों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांगें केंद्र के नेतृत्व तक पहुंचाई जाएंगी. उन्होंने कहा 'जंतर-मंतर पर धरना दे रहे हमारे युवा साथियों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाएगा.' उन्होंने यह भी बताया कि प्रतिनिधिमंडल की दो दिन बाद एक केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक कराने की बात कही गई है.
अखिलेश यादव ने ‘आरक्षण सुधार’ को बताया साजिश
आंदोलन के लखनऊ पहुंचने और सरकार से बातचीत शुरू होने के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने बीजेपी पर सीधा हमला बोला. उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा 'आरक्षण सुधार के नाम पर ‘आरक्षण समाप्ति’ का षड्यंत्र पीडीए समाज के खिलाफ एक और गहरी साजिश है. आरक्षण पीडीए का अधिकार है, किसी की इच्छा का विषय नहीं.' अखिलेश ने आरोप लगाया कि बीजेपी और उसके सहयोगी कभी समीक्षा, कभी सुधार, कभी क्रीमी लेयर और कभी आरक्षण छोड़ने जैसे मुद्दे उठाकर आरक्षण के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश करते रहे हैं. उन्होंने कहा 'आरक्षण था, आरक्षण है, आरक्षण रहेगा.'
चंद्रशेखर आजाद भी हुए हमलावर
आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने भी आरक्षण सुधार आंदोलन को लेकर सरकार को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि संविधान से मिले प्रतिनिधित्व के अधिकार को कमजोर करने की कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी. चंद्रशेखर ने कहा 'आरक्षण कोई खैरात नहीं है. यह सदियों से सामाजिक भेदभाव और वंचना झेलते समाज को संविधान द्वारा दिया गया प्रतिनिधित्व का अधिकार है.' उन्होंने आगे कहा कि आरक्षण व्यवस्था में किसी भी तरह की छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सामाजिक न्याय से समझौते का विरोध किया जाएगा.
2027 चुनाव से पहले क्यों अहम हो गया आरक्षण?
आरक्षण का मुद्दा यूपी की राजनीति में पहले भी चुनावी असर दिखा चुका है. 2024 के लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों ने बीजेपी पर संविधान और आरक्षण को लेकर सवाल उठाते हुए बड़ा नैरेटिव बनाया था. विपक्ष की ओर से बीजेपी के ‘400 पार’ के नारे को संविधान में बदलाव और आरक्षण खत्म करने की आशंका से जोड़ा गया था. इसके बाद दलित, आदिवासी और पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई. उत्तर प्रदेश में 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई, जबकि समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर राज्य में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में प्रदर्शन किया. ऐसे में 2027 से पहले आरक्षण का मुद्दा दोबारा गरमाना सपा और अन्य विपक्षी दलों के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण हो सकता है.
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