अहंकार सिर्फ पतन लाता है...अखिलेश के 'चवन्नी' वाले बयान पर जयंत चौधरी ने दे दिया तगड़ा जवाब

यूपी तक

22 Aug 2026 (अपडेटेड: 22 Aug 2026, 12:32 PM)

अखिलेश यादव के ‘चवन्नी’ बयान पर जयंत चौधरी के पलटवार से यूपी की सियासत गरमा गई है. सपा और आरएलडी की पुरानी दोस्ती अब जुबानी जंग में बदल गई है. पश्चिमी यूपी में जाट, मुस्लिम और यादव समीकरण चर्चा में हैं.

Akhilesh and Jayant

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक समय सहयोगी रहे समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय लोकदल (RLD) के प्रमुख जयंत चौधरी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है. अखिलेश यादव द्वारा हाल ही में दिए गए 'चवन्नी' वाले बयान के बाद दोनों नेताओं और उनके समर्थकों के बीच बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है जिसने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सियासी माहौल को गरमा दिया है.

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क्या था अखिलेश यादव का चवन्नी बयान?

लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में अखिलेश यादव ने गठबंधन के पुराने साथियों का जिक्र करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने सहयोगियों को पूरा सम्मान दिया. उन्होंने जयंत चौधरी का नाम लिए बिना कहा कि सपा ने जिन्हें 'चवन्नी से रुपया बना दिया', वे भी गठबंधन छोड़कर चले गए.अखिलेश के इस बयान को RLD नेतृत्व और उनके जाट वोट बैंक पर सीधे हमले के तौर पर देखा जाने लगा जिससे RLD समर्थकों में नाराजगी फैल गई.

'अहंकार सिर्फ पतन लाता है'

अखिलेश यादव की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए केंद्रीय मंत्री और RLD प्रमुख जयंत चौधरी ने इसे जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया. जयंत ने कहा कि 'अगर सियासत में कुछ सस्ते शब्द ही बोलने थे तो मेरा नाम लेकर बोल देते.उन्होंने कहा कि जाट समाज को निशाना बनाना और यह दावा करना कि उन्हें सब कुछ सपा ने सिखाया, एक प्रकार का राजनीतिक अहंकार है. जयंत ने जोर देकर कहा कि वे इस अहंकार को करीब से देख चुके हैं और ऐसा आचरण राजनीति में सिर्फ पतन की ओर ले जाता है.

गठबंधन से एनडीए तक का सफर और पश्चिमी यूपी के समीकरण

साल 2019 के उपचुनावों और 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में सपा और RLD ने मिलकर चुनाव लड़ा था. इस जाट-मुस्लिम-यादव गठबंधन ने पश्चिमी यूपी में कई सीटों पर सफलता हासिल की थी. हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले फरवरी 2024 में सीटों के बंटवारे पर असहमति के बाद RLD ने इंडिया (INDIA) गठबंधन का साथ छोड़ दिया और एनडीए (NDA) में शामिल हो गई. केंद्र सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह को 'भारत रत्न' देने के फैसले के बाद जयंत चौधरी ने एनडीए के साथ अपने नए सियासी सफर की शुरुआत की थी.

अब 'चवन्नी' बनाम 'रुपया' की यह बहस पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट, मुस्लिम और यादव मतदाताओं के बीच एक नया राजनीतिक ध्रुवीकरण पैदा कर सकती है.

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