उत्तर प्रदेश की राजनीति में इन दिनों वृंदावन के चर्चित कथावाचक और आध्यात्मिक गुरु गोस्वामी पुंडरीक महाराज का नाम अचानक सुर्खियों में आ गया है. वजह है समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का हाल ही में मथुरा पहुंचकर उनसे मुलाकात करना और उनका आशीर्वाद लेना.यह मुलाकात इसलिए भी सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है क्योंकि कुछ समय पहले ही अखिलेश यादव ने पुलिस प्रशासन द्वारा पुंडरीक महाराज को दिए गए 'गार्ड ऑफ ऑनर' पर कड़े सवाल खड़े किए थे. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस आध्यात्मिक गुरु के कार्यक्रम को लेकर सपा प्रमुख हमलावर थे आखिरकार उनसे इस मुलाकात के क्या सियासी मायने हैं? आइए जानते हैं ऑक्सफोर्ड से पढ़ाई करने वाले 20 साल के उस नौजवान की कहानी जो आज देश-विदेश में लोकप्रिय आध्यात्मिक गुरु बन चुका है.
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मुलाकात और अखिलेश यादव का सॉफ्ट हिंदुत्व वाला अंदाज
हाल ही में मथुरा में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने गोस्वामी पुंडरीक महाराज से मुलाकात की और उनकी कथा में शामिल हुए. इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा 'मैं सबसे पहले तो स्वामी जी का आशीर्वाद लेकर आया हूं और कथा कराने वाले परिवार को शुभकामनाएं देता हूं. साधु-संतों से मिलने और उनके दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है. संत हमारी धार्मिक परंपराओं को आगे बढ़ाते हैं.' इसके साथ ही उन्होंने सत्ता पक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग जिम्मेदार पदों पर बैठे हैं वे भारतीय परंपराओं को नहीं मान रहे हैं.
पुरानी कड़वाहट और 'गार्ड ऑफ ऑनर' का विवाद
अखिलेश यादव का यह कदम उनके पुराने रुख के बिल्कुल विपरीत नजर आता है. मामला दिसंबर 2025 का है जब बस्ती की पुलिस लाइन में आयोजित एक कार्यक्रम में पुंडरीक महाराज को पुलिस द्वारा 'गार्ड ऑफ ऑनर' (सलामी) दिया गया था. तब अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा था कि 'जब पूरा पुलिस महकमा सलामी में व्यस्त रहेगा तो प्रदेश का अपराधी मस्त रहेगा. भाजपा राज में अपराध रोकने के बजाय सलाम-सलाम खेला जा रहा है.' उस समय पुलिस की ओर से सफाई आई थी कि मानसिक तनाव और डिप्रेशन से जूझ रहे पुलिसकर्मियों के मार्गदर्शन और अवसाद दूर करने के लिए पुंडरीक महाराज को आमंत्रित किया गया था.
कौन हैं गोस्वामी पुंडरीक महाराज?
गोस्वामी पुंडरीक महाराज वृंदावन के एक प्रतिष्ठित और आध्यात्मिक परिवार से आते हैं. वे अपने परिवार की आचार्य परंपरा के 38वें आचार्य हैं. उनके पिता श्रीभूति कृष्ण गोस्वामी और दादा श्री अतुल कृष्ण गोस्वामी अपने समय के विख्यात आध्यात्मिक वक्ता रहे हैं. कॉन्वेंट स्कूल में पढ़े पुंडरीक महाराज ने महज 7 साल की उम्र में अपना पहला सार्वजनिक धार्मिक भाषण दिया था.
दिल्ली यूनिवर्सिटी से ऑक्सफोर्ड और फिर अध्यात्म का मोड़
पुंडरीक महाराज ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र (Sociology) में उच्च शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए ब्रिटेन के प्रतिष्ठित ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी चले गए. लेकिन एक दुखद मोड़ ने उनकी जिंदगी की दिशा बदल दी.
जब वे महज 20 वर्ष के थे तब मात्र 38 वर्ष की आयु में उनके पिता का असमय निधन हो गया. पिता के अचानक चले जाने के बाद उन्हें इंग्लैंड छोड़कर भारत लौटना पड़ा.
एक 'टेड टॉक्स' (TEDx) के दौरान इस घटना को याद करते हुए उन्होंने बताया था 'मुंबई से दिल्ली की वह फ्लाइट सिर्फ एक यात्रा नहीं थी बल्कि वह मेरे लिए धर्म से अध्यात्म की ओर लौटने की फ्लाइट थी. लोग संशय में थे कि 20 साल का लड़का अपने पिता की आध्यात्मिक गद्दी संभाल पाएगा या नहीं.' लेकिन उन्होंने न सिर्फ गद्दी संभाली बल्कि अपनी विद्वत्ता और आधुनिक सोच से अध्यात्म को नई ऊंचाई दी.
सियासी गलियारों में चर्चा तेज
आज गोस्वामी पुंडरीक महाराज देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी कथा और आध्यात्मिक व्याख्यान के लिए जाने जाते हैं. पूर्व में जहां अखिलेश यादव के अलावा मायावती और चंद्रशेखर आजाद जैसे नेताओं ने भी बस्ती वाली घटना पर सवाल उठाए थे. वहीं अब अखिलेश यादव का खुद उनसे जाकर मिलना और आशीर्वाद लेना यूपी की राजनीति में 'सॉफ्ट हिंदुत्व' और नए समीकरणों की ओर इशारा कर रहा है.
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