भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अपनी नई टीम में उत्तर प्रदेश के दो मुस्लिम चेहरों को अहम जिम्मेदारी दी है. मेरठ के कुंवर बासित अली को भाजपा अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है, जबकि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के पूर्व कुलपति प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी बरकरार रखी गई है. दोनों नेता पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आते हैं.
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भाजपा की नई टीम में दोनों की मौजूदगी इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यूपी में 2027 का विधानसभा चुनाव सामने है. पश्चिमी यूपी में मुस्लिम आबादी का राजनीतिक महत्व काफी ज्यादा है. ऐसे में पार्टी का इन दोनों नेताओं पर भरोसा करना महज संगठन में नियुक्ति नहीं, बल्कि मुस्लिम समाज तक अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.
लेकिन सवाल है कि आखिर बासित अली और तारिक मंसूर ही क्यों? दोनों की अपनी अलग पहचान है और भाजपा के मुस्लिम आउटरीच में दोनों की भूमिका भी अलग-अलग नजर आती है.
कौन हैं बासित अली?
मेरठ के रहने वाले कुंवर बासित अली लंबे समय से भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे में सक्रिय हैं. उन्होंने 2011 में यूपी भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चा में मंडल अध्यक्ष के तौर पर काम शुरू किया था. इसके बाद वह जिला स्तर की कई जिम्मेदारियों में रहे और 2012 में मेरठ जिला अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष बने. बाद में उन्हें प्रदेश अल्पसंख्यक मोर्चा की कमान भी मिली.
अब उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाकर भाजपा ने उनकी जिम्मेदारी का दायरा यूपी से बढ़ाकर देशभर तक कर दिया है. भाजपा के अल्पसंख्यक मोर्चे का काम मुस्लिम और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने में अहम माना जाता है.
बासित अली पहले भी मुस्लिम समाज के बीच पार्टी का संदेश पहुंचाने वाले अभियानों में सक्रिय रहे हैं. 2025 में उन्होंने यूपी में अल्पसंख्यक मोर्चे के जरिए मुस्लिम समाज तक पहुंच बनाने के लिए कई कार्यक्रमों की बात कही थी.
कौन हैं तारिक मंसूर?
प्रो. तारिक मंसूर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति हैं. वह 2017 से 2023 तक AMU के कुलपति रहे. इसके बाद 2023 में उन्हें उत्तर प्रदेश से विधान परिषद सदस्य बनाया गया और उसी साल भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी थी. नई राष्ट्रीय टीम में भी वह राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बने हुए हैं.
तारिक मंसूर पेशे से डॉक्टर और सर्जरी के प्रोफेसर रहे हैं. वह AMU के जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल भी रह चुके हैं. उनकी पहचान सिर्फ राजनीतिक नेता की नहीं, बल्कि शिक्षा और चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े व्यक्ति की भी है.
उनका अलीगढ़ और पश्चिमी यूपी में खास प्रभाव माना जाता है. भाजपा के लिए उनकी सबसे बड़ी खासियत है कि वह मुस्लिम समाज के शिक्षित और पेशेवर वर्ग के बीच भी पार्टी का पक्ष रखने वाले चेहरे के तौर पर सामने आते हैं.
भाजपा के लिए दोनों को जिम्मेदारी देना इतना अहम क्यों?
भाजपा लंबे समय से पसमांदा मुस्लिम समाज तक पहुंच बनाने की कोशिश करती रही है. तारिक मंसूर और बासित अली दोनों को इसी आउटरीच से जोड़कर देखा जा रहा है.
भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में उत्तर प्रदेश से आठ नेताओं को अहम जिम्मेदारियां मिली हैं और इनमें दो मुस्लिम चेहरे शामिल हैं. नई राष्ट्रीय टीम में मुस्लिम प्रतिनिधित्व देने वाला यूपी अकेला राज्य है. इसका मतलब यह नहीं है कि भाजपा ने मुस्लिम वोट बैंक जीत लिया है.
मुस्लिम मतदाताओं का समर्थन चुनाव में किस पार्टी को कितना मिलेगा, यह अलग सवाल है, लेकिन संगठन में दो मुस्लिम नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख जिम्मेदारी देना जरूर दिखाता है कि भाजपा मुस्लिम समाज के एक हिस्से तक अपनी राजनीतिक पहुंच बढ़ाने की कोशिश को आगे ले जाना चाहती है.
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