Mood Kya hai Prayagraj: प्रयागराज की 12 सीटों पर अखिलेश यादव का कौन सा दांव बदलेगा समीकरण?

पंकज श्रीवास्तव

• 12:36 PM • 19 Aug 2026

प्रयागराज में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदलते दिख रहे हैं. बीजेपी की गुटबाजी, एंटी-इनकंबेंसी और सपा की PDA रणनीति के बीच सपा 4 से बढ़कर 7 सीटें जीतने की उम्मीद कर रही है.

Akhilesh Yadav

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Mood Kya hai Prayagraj: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक बिसात बिछने लगी है. सूबे की सबसे ज्यादा विधानसभा सीटों वाले जिले प्रयागराज में इस बार कड़ा राजनीतिक मुकाबला देखने को मिल सकता है. कुल 12 विधानसभा और 2 संसदीय क्षेत्रों वाले इस जिले में जहां 2022 में बीजेपी और उसके सहयोगियों ने 8 सीटों पर कब्जा जमाया था. वहीं स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का आकलन है कि इस बार समाजवादी पार्टी (सपा) अपनी सीटों का दायरा 4 से बढ़ाकर 7 तक पहुंचा सकती है. बीजेपी के भीतर अंदरूनी गुटबाजी, एंटी-इनकंबेंसी और सपा की पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सोशल इंजीनियरिंग को इसके पीछे की मुख्य वजह माना जा रहा है.

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बीजेपी की गुटबाजी और शहर पश्चिमी सीट पर संकट

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, प्रयागराज में भारतीय जनता पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ रही है. संगठन के भीतर एक धड़ा उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के समर्थन में खड़ा दिख रहा है, तो दूसरा धड़ा सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ है. सिविल लाइंस क्षेत्र में लगे पोस्टरों से मुख्यमंत्री का चेहरा गायब होना और शीर्ष नेताओं के बीच खींचतान इस गुटबाजी को जगजाहिर कर रही है.

विश्लेषकों का मानना है कि शहर की तीनों सीटों (दक्षिणी, उत्तरी और पश्चिमी) में से शहर दक्षिणी सीट तो मजबूत स्थिति में है. लेकिन शहर पश्चिमी पर बीजेपी विधायक के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर (एंटी-इनकंबेंसी) देखने को मिल रही है. यदि बीजेपी ने यहां उम्मीदवार नहीं बदला तो यह सीट उसके हाथ से निकल सकती है.

सहयोगी दलों से असंतोष और बदलता समीकरण

प्रयागराज के राजनीतिक परिदृश्य में एनडीए (NDA) के सहयोगी दल भी एक बड़ी चुनौती बन सकते हैं. निषाद पार्टी, अपना दल (एस) और सुभासपा जैसी सहयोगी पार्टियों के नेताओं के बयान बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. बारा विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक का पूर्व के विवादित कनेक्शन और करछना में निषाद पार्टी व स्थानीय समीकरणों का टकराव बीजेपी को नुकसान पहुंचा सकता है.

इन सीटों पर सपा का दबदबा संभव

जानकारों के अनुसार सोरांव, प्रतापपुर, मेजा और हंडिया के साथ-साथ इस बार फाफामऊ, बारा और करछना सीट पर भी समाजवादी पार्टी बढ़त बना सकती है.

मुद्दे: कानून व्यवस्था बनाम सोशल इंजीनियरिंग

चुनाव में मुख्य मुद्दों को लेकर पत्रकारों की राय बंटी हुई है.

कानून व्यवस्था: बीजेपी का मुख्य दारोमदार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के 'जीरो टॉलरेंस' और सख्त कानून व्यवस्था के मुद्दे पर रहेगा. अवध और पूर्वांचल में हुए विकास कार्यों को भी बीजेपी अपनी उपलब्धि के रूप में पेश करेगी.

बेरोजगारी और पेपर लीक: युवाओं के बीच बेरोजगारी, हालिया पेपर लीक मामले और अभ्यर्थियों के आंदोलनों का असर चुनाव पर देखने को मिल सकता है.

मायावती और चंद्रशेखर का फैक्टर: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के वोट बैंक में इस बार सेंधमारी तय मानी जा रही है. दलित युवाओं का रुझान चंद्रशेखर आजाद (भीम आर्मी) की तरफ बढ़ने से बीएसपी का पारंपरिक वोट बैंक विभाजित हो रहा है जिसका सीधा फायदा या तो सपा को मिलेगा या बीजेपी को. कुल मिलाकर 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद प्रयागराज में सपा की रणनीति और बीजेपी की अंदरूनी गुटबाजी 2027 के विधानसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला बना रही है.