कौन हैं तारिक मंसूर, जिन्हें भाजपा ने बनाया राष्ट्रीय उपाध्यक्ष? लिस्ट में यूपी से इकलौता मुस्लिम चेहरा

आयशा शेख़

• 04:10 PM • 17 Aug 2026

बीजेपी की नई राष्ट्रीय टीम में प्रो. तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है. 17 अगस्त 2026 को पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन ने नई टीम का ऐलान किया.

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BJP New Team: भारतीय जनता पार्टी ने सोमवार, 17 अगस्त 2026 को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान किया है. पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन की नई टीम में प्रोफेसर तारिक मंसूर को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. तारिक मंसूर का नाम इसलिए भी खास है क्योंकि वे लिस्ट में एक मुस्लिम चेहरा हैं.

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तारिक मंसूर लंबे समय तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) के कुलपति रहे हैं और फिलहाल उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य हैं. वे पेशे से सर्जन और शिक्षक रहे हैं और करीब चार दशक तक मेडिकल शिक्षा, शोध, इलाज और प्रशासन से जुड़े रहे. 

कौन हैं प्रोफेसर तारिक मंसूर?

प्रोफेसर तारिक मंसूर का जन्म 20 सितंबर 1956 को हुआ. उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के जेएन मेडिकल कॉलेज से MBBS और 1982 में MS (सर्जरी) की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने मेडिकल शिक्षा और सर्जरी के क्षेत्र में लंबा करियर बनाया.

वे AMU के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में सर्जरी विभाग के प्रोफेसर रहे. इसके अलावा उन्होंने जेएन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और जेएन मेडिकल कॉलेज अस्पताल के चीफ मेडिकल सुपरिंटेंडेंट की जिम्मेदारी भी संभाली. 

2017 में संभाली AMU के कुलपति की जिम्मेदारी

तारिक मंसूर ने 17 मई 2017 को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर का पद संभाला. वह करीब छह साल तक इस पद पर रहे और 2 अप्रैल 2023 को उनका कार्यकाल खत्म हुआ.

AMU के कुलपति से सीधे राजनीति में एंट्री

अप्रैल 2023 में तारिक मंसूर को उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य नामित किया गया. वे छह साल की अवधि के लिए MLC बने. इसके बाद जुलाई 2023 में भाजपा ने उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया था. अब 17 अगस्त 2026 को भाजपा की नई राष्ट्रीय टीम में भी उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी के संगठन में उनकी भूमिका बरकरार रखी गई है.

BJP के लिए क्यों अहम हैं तारिक मंसूर?

तारिक मंसूर को भाजपा के मुस्लिम समाज तक पहुंच बनाने वाले प्रमुख चेहरों में गिना जाता रहा है. 2023 में जब उन्हें राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया था, तब उनकी नियुक्ति को खास तौर पर पसमांदा (पिछड़ा हुआ) मुस्लिम समाज तक भाजपा की पहुंच मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा गया था.

मंसूर की पहचान सिर्फ एक राजनीतिक नेता की नहीं है. AMU के पूर्व कुलपति, वरिष्ठ सर्जन, शिक्षक और शिक्षाविद के तौर पर उनकी लंबी पृष्ठभूमि है. यही वजह है कि पार्टी के भीतर उनका प्रोफाइल बाकी नेताओं से कुछ अलग दिखाई देता है.

तारिक मंसूर को केंद्र सरकार से जुड़ी कई समितियों में भी जिम्मेदारी मिल चुकी है. वह मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रहे हैं और IIM लखनऊ के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स तथा मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन की गवर्निंग बॉडी से भी जुड़े रहे हैं. इसके अलावा उन्हें पद्म पुरस्कार समिति में भी नामित किया गया था.

पढ़ाई से राजनीति तक लंबा सफर

तारिक मंसूर ने AMU में शिक्षक, सर्जन, विभागाध्यक्ष, प्रिंसिपल और फिर कुलपति के तौर पर अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. इसके बाद उनका सफर उत्तर प्रदेश विधान परिषद और भाजपा के राष्ट्रीय संगठन तक पहुंचा. अब नितिन नबीन की नई टीम में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने से साफ है कि पार्टी के केंद्रीय संगठन में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है.

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