कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने ‘वंदे मातरम’ को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद के बीच अपनी स्थिति साफ की है. उन्होंने कहा कि वह अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं कर सकते और यह अधिकार उन्हें संविधान ने दिया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘वंदे मातरम’ का अपमान नहीं करेंगे और इसके सम्मान में खड़े होंगे, लेकिन इसे गाएंगे नहीं.
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‘मैं अल्लाह के अलावा किसी और की इबादत नहीं कर सकता’
इमरान मसूद ने कहा, “मेरा धर्म मुझे अपने धर्म के हिसाब से इबादत करने देगा ना, मैं किसी की वंदना, इबादत नहीं कर सकता अल्लाह के सिवा.” उन्होंने कहा कि यह उनका मूल अधिकार है और संविधान ने उन्हें यह अधिकार दिया है. उन्होंने आगे कहा कि वह ‘वंदे मातरम’ का किसी भी सूरत में अपमान नहीं करेंगे. उनके मुताबिक, वह इसे गाएंगे नहीं, लेकिन इसके सम्मान में खड़े जरूर होंगे.
‘वंदे मातरम का अपमान नहीं करूंगा’
इमरान मसूद ने कहा, “मैं इसका अपमान नहीं करूंगा. मैं इसे गाऊंगा नहीं, लेकिन इसके सम्मान में खड़ा जरूर होऊंगा.” उन्होंने ‘वंदे मातरम’ को लेकर सवाल उठाने वालों पर भी निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के अधिवेशनों में पहले भी ‘वंदे मातरम’ बोला जाता रहा है और उन्होंने अपने बयान में इसका हवाला दिया.
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अमित शाह के बयान पर भी साधा निशाना
इमरान मसूद ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें इस मुद्दे पर कांग्रेस को उपदेश नहीं देना चाहिए. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के लोग उस समय भी ‘वंदे मातरम’ बोल रहे थे, जब अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष चल रहा था. उन्होंने कहा कि “हमारे लोग तो वंदे मातरम तब भी बोल रहे थे कांग्रेस के अधिवेशन के अंदर जब आपको लाठी खाने से डर लगता था और आप अंग्रेजों की गुलामी कर रहे थे.”
‘सूरमा भोपाली’ कहकर साधा निशाना
इमरान मसूद ने अपने बयान में उन लोगों पर भी तंज कसा जो ‘वंदे मातरम’ को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो लोग इसको लेकर इतना प्रेम दिखा रहे हैं, उन्हें इसे गाकर दिखाना चाहिए. उन्होंने कहा, “वंदे मातरम इन्हें गवा के दिखाना ये भाग जाएंगे.” साथ ही उन्होंने कहा कि कई लोग राष्ट्रगान भी पूरा नहीं गा पाते.
क्या है ‘वंदे मातरम’ को लेकर मौजूदा विवाद?
15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम के दौरान ‘वंदे मातरम’ के गायन को लेकर विवाद शुरू हुआ. सामने आए वीडियो को लेकर बीजेपी ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की ओर से गीत के गायन में व्यवधान डालने की कोशिश की गई. बीजेपी ने इसे राष्ट्रीय गीत का अपमान बताते हुए कांग्रेस से माफी की मांग की.
वहीं, कांग्रेस की ओर से इस आरोप को खारिज किया गया और कहा गया कि सोनिया गांधी वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के लिए कुर्सी लाने की बात कर रही थीं. इस मुद्दे पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया है.
यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने पर केंद्र सरकार की ओर से देशभर में कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं. सरकार ने 2025-26 को ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ से जुड़े आयोजनों के लिए तय किया है.
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