उत्तर प्रदेश के 2022 विधानसभा चुनाव का वो नतीजा कोई नहीं भूल सकता जिसने पूरे सूबे की सियासत को चौंका दिया था. कौशांबी जिले की हाई-प्रोफाइल सिराथू सीट से अपना दल (कमेरावादी) की नेता पल्लवी पटेल ने समाजवादी पार्टी के साइकिल सिंबल पर चुनाव लड़कर सूबे के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को करीब 7,000 वोटों से शिकस्त दी थी.
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लेकिन 2022 की जीत का परचम लहराने वाली पल्लवी पटेल और सपा के रास्ते अब अलग हो चुके हैं. राज्यसभा चुनाव के दौरान बढ़ी तल्खियों के बाद गठबंधन टूट चुका है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या 2027 के चुनाव में पल्लवी पटेल फिर सिराथू से ताल ठोकेंगी या अपनी राह बदलेंगी? और क्या डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एक बार फिर अपनी गृह सीट पर पुरानी हार का हिसाब चुकता करने उतरेंगे?
पल्लवी पटेल का रुख: सिराथू या वाराणसी की 'रोहनिया' सीट?
वर्तमान विधायक पल्लवी पटेल के लिए सिराथू उनका ससुराल है और क्षेत्र के कुर्मी वोटबैंक पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है. हालांकि अखिलेश यादव से गठबंधन टूटने के बाद अब उनके पास दो रास्ते हैं.
अपनी पार्टी के सिंबल पर चुनाव: पल्लवी पटेल को अब सपा के सिंबल की जरूरत नहीं है, वे अपना दल (कमेरावादी) के चिन्ह पर भी सिराथू से मैदान में उतर सकती हैं.
रोहनिया (वाराणसी) का विकल्प: सूत्रों और सियासी गलियारों की मानें तो पल्लवी सिराथू की जगह पूर्वांचल की कुर्मी-बहुल रोहनिया सीट का रुख कर सकती हैं. यह वही सीट है जहां से उनकी बहन और केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल पहली बार विधायक बनी थीं. रोहनिया का जातीय समीकरण पल्लवी के लिए ज्यादा मुफीद माना जा रहा है.
समाजवादी पार्टी: सिराथू में दावेदारों की लंबी कतार
सपा के पास फिलहाल यह सीट है. लेकिन पल्लवी पटेल से दूरी बनने के बाद यहां पार्टी के स्थानीय नेताओं की दावेदारी बढ़ गई है.
प्रमुख दावेदार: सपा के जिलाध्यक्ष दयाशंकर यादव, पूर्व प्रत्याशी आनंद मोहन पटेल और पूर्व प्रत्याशी कैलाश चंद केसरवानी रेस में सबसे आगे हैं.
अन्य नाम: क्षेत्र में दस्यु सम्राट ददुआ के बेटे और परिवार के सदस्यों के नाम की भी चर्चाएं तेज हैं.
बीजेपी और केशव प्रसाद मौर्य: क्या मिलेगा हार का बदला लेने का मौका?
सिराथू केशव प्रसाद मौर्य का अपना गृह क्षेत्र है. 2022 में हार के बावजूद इस सीट पर बीजेपी का पूरा दारोमदार उनके इर्द-गिर्द ही घूमता है. स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिराथू से केशव प्रसाद मौर्य खुद चुनाव लड़ेंगे या नहीं यह फैसला वे स्वयं करेंगे. अगर वे चुनाव नहीं लड़ते हैं तो भी प्रत्याशी उनकी पसंद का ही होगा. पूर्व बीजेपी विधायक शीतला प्रसाद पटेल का नाम भी तेजी से चर्चा में है जिनका टिकट 2022 में काटकर केशव मौर्य को दिया गया था.
क्या है सिराथू का जातीय गणित?
सिराथू में जीत की चाबी मुख्य रूप से कुर्मी और मौर्य (कुशवाहा) मतदाताओं के हाथ में होती है.
निर्णायक वोटबैंक: क्षेत्र में दलित और मुस्लिम आबादी के बाद सबसे बड़ी संख्या मौर्य और कुर्मी वोटरों की है. इसके अलावा ब्राह्मण और यादव मतदाता भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
समीकरण का खेल: 2022 में मुस्लिम और यादव वोट के साथ कुर्मी मतदाता पल्लवी पटेल के पक्ष में गोलबंद हो गए थे. जबकि मौर्य वोट बैंक केशव मौर्य के साथ रहा. यदि इस बार कुर्मी वोट बंटता है, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा.
बसपा की भी नजर, मुकाबला होगा त्रिकोणीय
बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी सिराथू में मजबूत प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है. जिला पंचायत सदस्य सीमा देवी के पति अनिल अग्निहोत्री का नाम बसपा के संभावित दावेदारों में सबसे ऊपर चल रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या सिराथू में एक बार फिर पल्लवी पटेल बनाम केशव प्रसाद मौर्य का महामुकाबला देखने को मिलेगा या फिर दोनों पार्टियां नए चेहरों पर दांव लगाएंगी.
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