यूपी Tak के खास शो 'आज का यूपी' में हम राज्य की दिनभर की तीन बड़ी और महत्वपूर्ण राजनीतिक खबरों का विस्तार से विश्लेषण करते हैं. हमारी पहली बड़ी खबर सहारनपुर की दिशा (DISHA) बैठक में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच हुई तीखी नोकझोंक और उस दौरान बगल में बैठीं सांसद इकरा हसन के अनसीन रिएक्शन से जुड़ी है. दूसरी बड़ी खबर में हम बात करेंगे बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नेशनल कोऑर्डिनेटर आकाश आनंद द्वारा अखिलेश यादव के चर्चित 'PDA' फॉर्मूले का निकाला गया एक नया और तीखा मतलब. वहीं तीसरी बड़ी खबर में जानेंगे कि 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मायावती ने अपने 'मिस्टर डिपेंडेबल' सतीश चंद्र मिश्रा को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपकर कैसे उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़ा 'ब्राह्मण कार्ड' खेल दिया है.
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सहारनपुर की बैठक में भिड़े इमरान मसूद और आशु मलिक, बगल में बैठी इकरा हसन का रिएक्शन हुआ वायरल
सहारनपुर में आयोजित जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की आधिकारिक बैठक के दौरान उस वक्त भारी हंगामा हो गया, जब कांग्रेस के कद्दावर सांसद इमरान मसूद और समाजवादी पार्टी के विधायक आशु मलिक आपस में भिड़ गए. दोनों ही नेता नियमों और जनता के मुद्दों की आड़ में एक-दूसरे पर तीखे राजनीतिक आरोप लगाते नज़र आए. दोनों के बीच ज़ुबानी जंग इस कदर बढ़ गई कि 'चाय-पकौड़े' से लेकर 'ज्ञान के भंडार' तक की बातें होने लगीं. हालांकि, इस पूरी लड़ाई के बीच सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त इमरान मसूद के ठीक बगल में बैठीं कैराना सांसद इकरा हसन की रही.
बैठक के दौरान जब दोनों नेता आपस में बहस कर रहे थे, तब इकरा हसन बेहद असहज नजर आईं. कैमरे में कैद हुए दृश्यों में साफ दिखा कि वे अपनी झेंप और मुस्कुराहट को छिपाने के लिए खुद को व्यस्त रखने की कोशिश कर रही थीं. कभी वे मुस्कुरातीं, तो कभी स्थिति से ध्यान भटकाने के लिए पीछे बैठे अपने पीए (PA) को बुलाकर कागज़ात थमाती दिखाई दीं.
गौरतलब है कि गठबंधन में होने के बावजूद सहारनपुर में इमरान मसूद और आशु मलिक की पुरानी सियासी अदावत किसी से छिपी नहीं है. हालांकि, बैठक का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दोनों ही नेताओं ने तुरंत डैमेज कंट्रोल करते हुए सफाई दी और इसे केवल जनता के मुद्दों पर हुई सामान्य बहस करार दिया. माना जा रहा है कि दोनों पार्टियों के शीर्ष नेतृत्व से मिले कड़े संदेश के बाद दोनों ने इस मामले पर नरमी दिखाई है.
बीएसपी नेता आकाश आनंद ने निकाला PDA का नया मतलब, अखिलेश यादव पर साधा निशाना
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव का 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूला इन दिनों विरोधियों के निशाने पर है. अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने हिसाब से इस शब्द की नई व्याख्या कर रहे हैं. इसी कड़ी में अब बहुजन समाज पार्टी (BSP) के नंबर दो नेता और मायावती के भतीजे आकाश आनंद भी कूद पड़े हैं.
आकाश आनंद ने अखिलेश यादव के PDA पर तंज कसते हुए इसका एक नया एब्रिविएशन (Full Form) दिया है. आकाश आनंद के मुताबिक, सपा के PDA का असली मतलब 'पब्लिक डराव अभियान' है. उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी इस नारे की आड़ में जनता को डराने का काम कर रही है. इससे पहले भी बीजेपी इसे 'परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी' और सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर इसे 'पीट देगा अहीर' कहकर अखिलेश यादव पर निशाना साधते रहे हैं. अब बीएसपी द्वारा PDA को नया नाम देकर जनता के बीच ले जाना यह दर्शाता है कि 2027 के चुनाव से पहले बीएसपी, सपा के कोर वोट बैंक में सेंध लगाने की पूरी कोशिश में जुट गई है.
2027 से पहले मायावती का बड़ा दांव, सतीश चंद्र मिश्रा को सौंपी पुरानी कमान; खेला 'ब्राह्मण कार्ड'
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती ने अपनी रणनीतिक बिसात बिछानी शुरू कर दी है. इसी क्रम में मायावती ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के ज़रिए यह जानकारी दी कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद सतीश चंद्र मिश्रा को एक बार फिर पार्टी के सभी विधिक मामले, निर्वाचन आयोग का काम और मीडिया प्रबंधन की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जा रही है.
हाल ही में पार्टी से पूर्व मंत्री अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा के निष्कासन के बाद विरोधियों द्वारा बीएसपी पर 'ब्राह्मण विरोधी' होने के आरोप लगाए जा रहे थे. मायावती ने अपने सबसे भरोसेमंद और 'मिस्टर डिपेंडेबल' माने जाने वाले सतीश चंद्र मिश्रा को फिर से फ्रंट पर लाकर इन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है.
अपनी पोस्ट में मायावती ने यह भी रेखांकित किया कि जब से बीएसपी ने आगामी चुनावों के लिए उम्मीदवारों के नामों का ऐलान शुरू किया है, उसमें सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व ब्राह्मण समाज को दिया गया है, जिससे दूसरी पार्टियों में खलबली मच गई है. माना जा रहा है कि 2007 के अपने सफल 'सोशल इंजीनियरिंग' (दलित-ब्राह्मण सोशल कॉम्बिनेशन) के फॉर्मूले को दोहराने के लिए मायावती ने एक बार फिर सतीश चंद्र मिश्रा पर बड़ा दांव खेला है.
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