Mood Kya Hai Auraiya:बीजेपी के लिए अखिलेश यादव के इस गढ़ को जितना क्यों है मुश्किल?

सूर्या शर्मा

• 05:25 PM • 21 Aug 2026

औरैया में 2027 चुनाव को लेकर सियासी घमासान तेज है. सपा-भाजपा के बीच मुकाबले में विकास, सड़क-ड्रेनेज, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और जातीय समीकरण अहम मुद्दे बनेंगे. तीनों सीटों पर बदलते राजनीतिक समीकरण और स्थानीय नाराजगी चुनावी नतीजों पर असर डाल सकती है.

Mood Kya Hai Auraiya

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Mood Kya Hai Auraiya: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. औरैया जनपद में कुल तीन विधानसभा सीटें विधूना, दिव्यापुर और औरैया सदर आती हैं. वर्तमान में दो सीटें (विधूना और दिव्यापुर) समाजवादी पार्टी के पास हैं. जबकि औरैया सदर सीट पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है.वरिष्ठ पत्रकारों और स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार जिले में विकास कार्यों की धीमी रफ्तार, ड्रेनेज-सड़क की बदहाली, भ्रष्टाचार और जातीय ध्रुवीकरण ऐसे प्रमुख मुद्दे हैं जो 2027 के चुनावी नतीजों को तय करेंगे.

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औरैया का राजनीतिक इतिहास और वर्तमान स्थिति

औरैया जनपद हमेशा से राजनीतिक रूप से जागरूक रहा है. आजादी के बाद लंबे समय तक यहां कांग्रेस का वर्चस्व रहा. इसके बाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के शासनकाल में जब औरैया को नया जिला घोषित किया गया तो जिले की तीनों सीटों पर बसपा का कब्जा हो गया था.

2008 के परिसीमन में अजीतमल सीट समाप्त होकर औरैया में शामिल हो गई और दिव्यापुर नई विधानसभा बनी. इसके बाद यह क्षेत्र ज्यादातर समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता रहा है.

वर्तमान विधायक

विधूना: सपा विधायक

दिव्यापुर: प्रदीप यादव (सपा विधायक)

औरैया सदर: श्रीमती गुड़िया कटेरिया (भाजपा विधायक - उपचुनाव में जीत)

तीनों विधानसभाओं का चुनावी व जातीय समीकरण

1. विधूना विधानसभा (सपा का मजबूत गढ़)

समीकरण: विधूना में लोधी-राजपूत, यादव, वर्मा और अन्य पिछड़ी जातियों का बाहुल्य है.

स्थिति: जातीय आंकड़ों के लिहाज से यह सीट सपा के लिए काफी अनुकूल मानी जा रही है. बीजेपी के लिए यहां बढ़त बनाना चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है.

2. दिव्यापुर विधानसभा (कड़ा मुकाबला)

समीकरण: यहां यादव, राजपूत और अन्य पिछड़ी जातियों का प्रभाव है.

स्थिति: वर्तमान में सपा के प्रदीप यादव विधायक हैं.भाजपा की ओर से कई दावेदारों के बीच टिकट की होड़ के कारण आंतरिक भितरघात की आशंका जताई जा रही है.

3. औरैया सदर विधानसभा (भाजपा के सामने असंतोष की चुनौती)

समीकरण: यह सुरक्षित सीट दलित (हरिजन) और ब्राह्मण बहुल मानी जाती है.

स्थिति: फिलहाल यहां भाजपा की विधायक हैं. लेकिन स्थानीय विकास न होने और जनप्रतिनिधि के प्रति असंतोष के चलते भाजपा को इस बार यहां कड़े मुकाबले का सामना करना पड़ सकता है.

जनता के मुख्य मुद्दे: विकास बनाम लॉ एंड ऑर्डर

वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, जिले में कई स्थानीय समस्याएं हावी हैं.

सड़क और ड्रेनेज की बदहाली: औरैया-दिव्यापुर सड़क हो या पढ़ी जाने वाली सड़क, बारिश के दिनों में जलभराव की गंभीर समस्या रहती है. नगर में ड्रेनेज सिस्टम न होने से आम जनता त्रस्त है.

बेकार पड़ी योजनाएं और भ्रष्टाचार: दिव्यापुर और अजीतमल में बने नए बस स्टेशन शो-पीस बने हुए हैं जहां बसें नहीं रुकतीं. वहीं 'झिलमिल पार्क' जैसी परियोजनाओं को लेकर स्थानीय स्तर पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं. लोगों का मानना है कि यमुना शेरगढ़ घाट पर स्नान घाट जैसी बुनियादी सुविधाओं की ज्यादा जरूरत थी.

लॉ एंड ऑर्डर और योजनाएं (भाजपा का प्लस प्वाइंट): अपराध नियंत्रण, बेहतर कानून व्यवस्था, और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे पर सरकार को सराहा जा रहा है. इसके अलावा राशन वितरण और सीधे खाते में पैसा (DBT) भेजने की योजनाओं का लाभ देहाती क्षेत्रों में भाजपा के पक्ष में माहौल बना सकता है.

2027 के चुनाव में यदि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन होता है तो जातीय समीकरण सपा-कांग्रेस के पक्ष में झुक सकते हैं. वहीं भाजपा को अपनी सीट बचाने और खोई हुई सीटों को पाने के लिए जमीनी स्तर पर विकास कार्यों में तेजी लानी होगी और अपने कैडर को एकजुट रखना होगा.