सपा के बागी विधायक विनोद चतुर्वेदी 2027 के चुनाव में क्या करेंगे वापसी? समझिए कालपी सीट का समीकरण

रजत सिंह

25 Aug 2026 (अपडेटेड: 25 Aug 2026, 12:28 PM)

UP Kiska: कालपी विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव से पहले सियासी समीकरण बदल गए हैं. सपा से भाजपा खेमे में पहुंचे विधायक विनोद चतुर्वेदी के विकास दावों, पीडीए रणनीति, जातीय समीकरण और संभावित उम्मीदवारों के बीच मुकाबले पर स्थानीय पत्रकारों का विश्लेषण.

Vinod Chaturvedi

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Kalpi Assembly Election 2027: 2024 के राज्यसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश की राजनीति में आई बगावत की आंधी आपको याद ही होगी. समाजवादी पार्टी के जिन विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर हलचल मचाई थी उनमें से एक प्रमुख नाम है जालौन की कालपी विधानसभा सीट से विधायक विनोद चतुर्वेदी का. 2022 में सपा के टिकट पर साइकिल दौड़ाने वाले विनोद चतुर्वेदी अब भाजपा के पाले में खड़े नजर आ रहे हैं. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या 2027 के विधानसभा चुनाव में वह अपनी सीट बचा पाएंगे? क्या कालपी की जनता उनके '72 साल बनाम 2 साल' के विकास दावों पर मुहर लगाएगी या सपा का ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड बाजी मार ले जाएगा? आइए समझते हैं कालपी का पूरा सियासी समीकरण और पत्रकारों की राय.

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70-72 सालों में जितना काम नहीं हुआ उतना करा दिया

वर्तमान विधायक विनोद चतुर्वेदी अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त दिखते हैं. उनका कहना है कि उन्होंने जनता के बीच रहकर दिन-रात काम किया है. यमुना नदी की रिटेनिंग वॉल, बांके बिहारी मंदिर, गणेश मंदिर, व्यास मंदिर और सूर्य मंदिर का सौंदर्यीकरण.

कालपी के मुख्य बाजार की जिस सड़क का मुद्दा 2004 से अटका था उसे 2023 में 4 करोड़ 76 लाख रुपये की लागत से बनवाकर जनता को राहत दी. विधायक का दावा है कि विकास कार्यों के दम पर जनता 2027 में दोबारा उन्हें ही चुनेगी.

सपा का पलटवार

समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष का नजरिया एकदम अलग है. उनका मानना है कि विनोद चतुर्वेदी भले ही पाला बदल चुके हों लेकिन जिन मतदाताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें जिताया था वे आज भी अखिलेश यादव और सपा के साथ मजबूती से खड़े हैं. सपा का दावा है कि 2027 में उनकी जीत का अंतर 2022 से भी बड़ा होगा.

कालपी का जातिगत समीकरण

कालपी विधानसभा में हमेशा से जातीय समीकरणों का खेल हावी रहा है. यहां मुख्य मतदाता आंकड़े इस प्रकार हैं.

पाल/बघेल: 60,000 (सबसे निर्णायक)

क्षत्रिय: 55,000

दलित: 50,000

ब्राह्मण: 45,000

मुस्लिम: 35,000

यादव: 4,000

निषाद: 3,000

अन्य: 25,000

समीकरण का गणित: 2022 में विनोद चतुर्वेदी को यादव, मुस्लिम और ब्राह्मण वोटों के साथ-साथ कुछ पिछड़ी जातियों का समर्थन मिला जिससे उनकी राह आसान हो गई. वहीं क्षत्रिय मतदाता अक्सर ब्राह्मण उम्मीदवार से अलग राजनीतिक रुख अपनाते दिखे हैं.

2027 का दंगल: पत्रकारों का विश्लेषण और सम्भावित चेहरे

स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, 2027 में कालपी का मुकाबला त्रिकोणीय और बेहद कड़ा होने वाला है.

सपा का 'पीडीए' कार्ड: इलाके में अखिलेश यादव के पीडीए फॉर्मूले का असर काफी देखा जा रहा है. सपा से पूर्व मंत्री और कद्दावर नेता श्री रामपाल के चुनाव लड़ने की प्रबल संभावना जताई जा रही है जबकि युवा नेत्री रश्मि पाल भी दावेदारी ठोक रही हैं.

भाजपा की चुनौती: भाजपा खुद अपना प्रत्याशी उतारेगी या यह सीट सहयोगी निषाद पार्टी (संजय निषाद) को जाएगी, इस पर सस्पेंस बना हुआ है.

बसपा का दांव: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) भी इस सीट पर मजबूत स्थिति में रहती है. चर्चा है कि बीएसपी किसी पाल समाज के चेहरे पर दांव लगा सकती है.