2024 के लोकसभा चुनावों में अयोध्या (फैजाबाद) सीट से मिल्कीपुर के तत्कालीन विधायक अवधेश प्रसाद का नाम आगे बढ़ाते हुए अखिलेश यादव ने जो सियासी चाल चली थी उसने इतिहास रच दिया था. अब 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से काफी पहले समाजवादी पार्टी ने एक बार फिर वही दांव अयोध्या विधानसभा सीट पर चल दिया है.. अखिलेश यादव ने अयोध्या सीट से पूर्व मंत्री और तेजतर्रार ब्राह्मण नेता तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे के नाम का औपचारिक ऐलान कर दिया है.
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2012 में बीजेपी के दिग्गज नेता लल्लू सिंह को हराकर विधायक बने पवन पांडे पर सपा ने दोबारा भरोसा जताया है. सपा द्वारा उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद अब सबकी निगाहें सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर टिक गई हैं जहां मौजूदा विधायक वेद प्रकाश गुप्ता के अलावा पूर्व सांसद विनय कटियार, महापौर और कई दिग्गजों की लंबी कतार टिकट की रेस में खड़ी है.
अखिलेश यादव का 'अनाउंसमेंट स्टाइल'
अखिलेश यादव ने जिस तरह 2024 चुनाव के दौरान अवधेश प्रसाद के सांसद बनने की भविष्यवाणी मंच से की थी, कुछ उसी अंदाज में उन्होंने पवन पांडे को 'भावी विधायक' बताकर अयोध्या से प्रत्याशी बनाने का संकेत दे दिया है. पवन पांडे का सपा से रिश्ता बेहद पुराना और भावुक रहा है. बीजेपी से कई बार मिले ऑफर्स का जिक्र करते हुए पवन पांडे ने बताया 'भाजपा की तरफ से मुझे कई बार विधायक और मंत्री पद तक के ऑफर मिले. लेकिन मेरे पिताजी ने मुझे सख्त हिदायत दी थी कि जीवन में कभी भी नेताजी (मुलायम सिंह यादव) का साथ मत छोड़ना. जब मैं जेल से छूटकर आया था, तब नेताजी खुद मेरे घर आए थे और मेरी माताजी के हाथ का खाना खाकर कहा था कि एक दिन पवन बड़ा नेता बनेगा. आज मैं जो कुछ भी हूं, नेताजी और उनके परिवार के विश्वास की बदौलत हूं.'
बीजेपी में टिकट की रेस
सपा द्वारा चेहरा साफ कर दिए जाने के बाद बीजेपी खेमे में सरगर्मी और बढ़ गई है. अयोध्या सीट से वर्तमान में बीजेपी के वेद प्रकाश गुप्ता विधायक हैं. उम्र के इस पड़ाव पर होने के बावजूद उनकी दावेदारी मजबूत है. लेकिन स्थानीय समीकरणों के चलते भाजपा में आधा दर्जनों से ज्यादा दावेदार कतार में हैं.
विनय कटियार का दावा
राम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल विनय कटियार ने संकेत दिए हैं कि अयोध्या ही उनकी कर्मभूमि रही है और वे यहां से चुनाव लड़ने को तैयार हैं. पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, वर्तमान महापौर, अभिषेक मिश्रा, विकास सिंह, गिरीश त्रिपाठी और पूर्व सांसद लल्लू सिंह के बेटे का नाम भी दावेदारों की रेस में जोर-शोर से चल रहा है.
स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के लिए अयोध्या साख का सवाल है. पार्टी किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगाना चाहेगी जो राम मंदिर निर्माण के बाद बदले सियासी माहौल और सपा के हमलों का डटकर मुकाबला कर सके.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) और स्थानीय मुद्दे
जहां एक तरफ सपा ने प्रत्याशी तय कर दिया है और बीजेपी में मंथन जारी है. वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) की ओर से स्थानीय समाजसेवी सुरेश यादव की दावेदारी सामने आ रही है.
2027 का यह चुनाव केवल चेहरा बनाम चेहरा नहीं होगा बल्कि मुद्दों की भी जंग होगी. पवन पांडे और सपा लगातार राम मंदिर चढ़ावा चोरी, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और स्थानीय हनुमानगढ़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर बीजेपी सरकार को घेरते आ रहे हैं. वहीं भाजपा अपने विकास कार्यों, राम मंदिर निर्माण के ऐतिहासिक मील के पत्थर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव के दम पर फिर से किला फतह करने की रणनीति बना रही है. अब देखना यह दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी किसी वर्तमान विधायक पर दोबारा भरोसा जताती है या अयोध्या में किसी नए या भारी-भरकम चेहरे की 'पैराशूट लैंडिंग' कराकर नया जातिगत कॉम्बिनेशन साधती है.
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