उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक सरगर्मियां और दलबदल का दौर काफी तेज हो गया है. इसी कड़ी में देवीपाटन मंडल के बलरामपुर जिले से असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) को बड़ा झटका लगा है. AIMIM के फायरब्रांड और प्रमुख प्रदेश प्रवक्ताओं में से एक डॉ. अब्दुल मन्नान ने अपनी पुरानी पार्टी का साथ छोड़कर समाजवादी पार्टी (सपा) की सदस्यता ग्रहण कर ली है.
ADVERTISEMENT
सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की मौजूदगी में उनके साथ पीलीभीत से पूर्व विधायक हेमराज वर्मा और बबीना से पूर्व विधायक रतन लाल अहिरवार ने भी सपा का दामन थामा. इस दौरान अखिलेश यादव ने विरोधियों पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि दकियानूसी, सामंतवादी और वर्चस्ववादी सोच वाले लोग अब सपा की 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीति से पूरी तरह घबरा गए हैं.
पूर्वांचल और बलरामपुर में AIMIM के मुख्य चेहरे हैं अब्दुल मन्नान
डॉ. अब्दुल मन्नान उत्तर प्रदेश में AIMIM के सबसे प्रमुख और मुखर नेताओं में गिने जाते रहे हैं. बलरामपुर जिले की उतरौला विधानसभा सीट से उन्होंने AIMIM के टिकट पर चुनाव लड़ा था और क्षेत्र में पार्टी का एक बड़ा आधार तैयार किया था. AIMIM के प्रदेश प्रवक्ता के तौर पर वह टीवी डिबेट्स और सार्वजनिक मंचों पर स्थानीय व प्रदेश स्तरीय मुद्दों पर बेहद मुखर होकर असदुद्दीन ओवैसी का पक्ष रखते थे.
बलरामपुर और उतरौला क्षेत्र में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए उनका सपा में शामिल होना पूर्वांचल में मुस्लिम वोट बैंक के समीकरणों के लिहाज से AIMIM के लिए बड़ा झटका और सपा के लिए बड़ी बढ़त माना जा रहा है.
पीलीभीत और बबीना के पूर्व विधायकों ने भी ली सपा की सदस्यता
केवल बलरामपुर ही नहीं बल्कि रुहेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र से भी दो बड़े पूर्व विधायकों ने अखिलेश यादव के नेतृत्व पर भरोसा जताया है.
1.पीलीभीत से पूर्व विधायक हेमराज वर्मा ने सपा का रुख किया है जिससे पीलीभीत और आसपास के जिलों में सपा का कैडर मजबूत होगा.
2.झांसी की बबीना विधानसभा सीट से पूर्व विधायक रतन लाल अहिरवार ने भी सपा का दामन थामा है जो बुंदेलखंड में पार्टी के दलित जनाधार को मजबूती देंगे.
अखिलेश यादव का हमला
नेताओं को पार्टी में शामिल कराने के बाद सपा मुखिया अखिलेश यादव ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए विरोधियों पर जमकर निशाना साधा. अखिलेश यादव ने कहा 'जो लोग दकियानूसी हैं, सामंतवादी हैं, रूढ़िवादी हैं और जो वर्चस्ववादी सोच रखते हैं, वे सब अब PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के बढ़ते जनाधार से घबरा रहे हैं. PDA केवल एक नारा नहीं है. इसमें प्रोटेस्ट करने वाले लोग सड़कों पर प्रदर्शन (Demonstration) करने वाले युवा और एक्टिविस्ट (Activist) शामिल हैं. आगामी चुनावों को लेकर PDA के लोग जितना सीरियस हैं उतना कोई और नहीं है. यही वजह है कि विरोधियों के पेट में PDA से दर्द हो रहा है.' चुनावी माहौल के बीच AIMIM, बीजेपी और अन्य दलों से नेताओं के सपा में लगातार शामिल होने से उत्तर प्रदेश की सियासत में हलचल काफी बढ़ गई है.
ये भी पढ़ें: अयोध्या में सपा के पवन पांडे के खिलाफ किसे टिकट देगी बीजेपी? इन नामों की चर्चा
ADVERTISEMENT











