SP MLC Lal Bihari Yadav Statement: आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी की शिक्षक गोष्ठी के दौरान सपा एमएलसी लाल बिहारी यादव के एक बयान ने यूपी की सियासत में हलचल बढ़ा दी है. गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी के समर्थन में वोट मांगते हुए उन्होंने कार्यकर्ताओं से ऐसा उदाहरण दिया, जिस पर अब चर्चा तेज हो गई है. लाल बिहारी यादव ने कहा कि अखिलेश यादव जिसे भी प्रत्याशी बनाकर भेजें, पार्टी समर्थकों को उसी के पक्ष में मतदान करना चाहिए.
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अखिलेश जिसे भेजें, उसी को वोट देने की अपील
रविवार को आजमगढ़ के नेहरू हॉल में सपा की शिक्षक गोष्ठी आयोजित की गई थी. इसी कार्यक्रम में गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी के समर्थन में वोट की अपील करते हुए लाल बिहारी यादव ने कार्यकर्ताओं को पार्टी के फैसले के साथ खड़े रहने का संदेश दिया. उन्होंने कहा कि प्रत्याशी कोई भी हो, उसे पार्टी नेतृत्व ने चुना है तो कार्यकर्ताओं को उसके समर्थन में वोट करना चाहिए.
अपने संबोधन में लाल बिहारी यादव ने कहा, "अखिलेश यादव जिसे भी प्रत्याशी बनाकर भेजें, उसी को वोट देना है. चाहे वह कुत्ते के गले में घंटी बांधकर ही क्यों न भेजें." उन्होंने इस उदाहरण के जरिए यह बताने की कोशिश की कि पार्टी और संगठन का फैसला कार्यकर्ताओं के लिए सबसे ऊपर होना चाहिए. उनके बयान का वीडियो सामने आने के बाद यह टिप्पणी चर्चा में आ गई है.
पार्टी से बड़ा व्यक्ति या संगठन?
सपा एमएलसी के इस बयान में व्यक्ति की बजाय पार्टी और संगठन को प्राथमिकता देने की बात सामने आई. उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि नेतृत्व जिस प्रत्याशी को चुनाव मैदान में उतारे, उसके पक्ष में एकजुट होकर मतदान किया जाए. उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं.
सोशल मीडिया पर बयान को लेकर चर्चा
लाल बिहारी यादव की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसको लेकर प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. यूजर्स अपने-अपने तरीके से बयान पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं. कुछ लोग इसे पार्टी नेतृत्व के प्रति कार्यकर्ताओं की निष्ठा से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स ने इस तरह की भाषा पर सवाल उठाए हैं.
चुनावी माहौल में बयान ने बढ़ाई हलचल
गोरखपुर शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के चुनाव प्रचार के बीच सपा एमएलसी का यह बयान सामने आने से सियासी चर्चा और तेज हो गई है. आजमगढ़ की शिक्षक गोष्ठी में दिए गए इस बयान को लेकर अब राजनीतिक गलियारों में भी बहस शुरू हो गई है. आने वाले दिनों में विपक्षी दल इस टिप्पणी को मुद्दा बनाते हैं या नहीं, यह देखने वाली बात होगी.
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