उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) में बड़ा संगठनात्मक बदलाव हुआ है. मायावती ने एक बार फिर अपने भतीजे आकाश आनंद से राष्ट्रीय संयोजक की जिम्मेदारी वापस ले ली है. उन्होंने कहा है कि आकाश को पार्टी में काम करने की अनुमति रहेगी, लेकिन फिलहाल उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाएगी.
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मायावती के इस फैसले के बाद अब यूपी की राजनीति में एक और चर्चा शुरू हो गई है. कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद ने आकाश आनंद को अपनी पार्टी में आने का ऑफर दिया है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती के फैसले के बाद आकाश आनंद के लिए कोई नया राजनीतिक रास्ता खुल सकता है?
कौन हैं संजय निषाद और कौन-सी पार्टी चलाते हैं?
संजय निषाद उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं. वह निषाद पार्टी के संस्थापक भी हैं. निषाद पार्टी की स्थापना 2016 में हुई थी. संजय निषाद फिलहाल प्रदेश सरकार में मत्स्य विभाग के मंत्री हैं.
निषाद पार्टी उत्तर प्रदेश में भाजपा की सहयोगी है और एनडीए का हिस्सा है. ऐसे में संजय निषाद की ओर से आकाश आनंद को पार्टी में आने का ऑफर ऐसे समय आया है, जब मायावती ने आकाश को संगठन में बड़ी जिम्मेदारी देने से फिलहाल दूरी बना ली है.
‘आकाश आनंद आएं और बड़ी जिम्मेदारी लें’
संजय निषाद ने आज तक से बातचीत में आकाश आनंद को लेकर बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा, “हमको लगता है जिधर जवानी चलती है, उधर जमाना चलता है.” उन्होंने आकाश आनंद से सिर्फ पार्टी ज्वाइन करने की नहीं, बल्कि बड़ी जिम्मेदारी लेने की अपील की. संजय निषाद ने कहा कि आकाश आनंद आएं और बड़ी सोच के साथ पार्टी में जिम्मेदारी लें.
उन्होंने कहा कि उनके पास कांशीराम की प्रशिक्षित सेना है और हर जाति की सेना है. इसके जरिए युवाओं को जोड़ा जा सकता है. संजय निषाद ने कहा कि आकाश आनंद जितना बड़ा पद लेना चाहें, ले सकते हैं.
उन्होंने कहा कि राजनीति राजकुमार बनने का नहीं, बल्कि राजा बनने का नियम है. उनका कहना है कि आकाश आनंद जैसे युवा नेता अगर बड़ी जिम्मेदारी लेते हैं और लोगों को जोड़ने का काम करते हैं तो उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए.
मायावती ने आकाश आनंद को बड़ी जिम्मेदारी से रखा दूर
मायावती के मुताबिक, आकाश को अभी राजनीति में और अधिक परिपक्व होने की जरूरत है. मायावती ने इस फैसले के पीछे कांशीराम के सिद्धांतों का भी हवाला दिया. उन्होंने कहा कि कांशीराम ने अपने परिवार को पार्टी में काम करने की इजाजत दी थी, लेकिन चुनाव लड़ाने या संगठन में पद देने के खिलाफ थे. मायावती ने कहा कि वह भी इसी संकल्प पर चल रही हैं.
आकाश आनंद पर पहले भी हो चुके हैं बड़े फैसले
आकाश आनंद को लेकर मायावती पहले भी कई बड़े फैसले ले चुकी हैं. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान मायावती ने राजनीतिक अपरिपक्वता का हवाला देते हुए उन्हें नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटा दिया था.
चुनाव खत्म होने के करीब डेढ़ महीने बाद आकाश को दोबारा नेशनल कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी दी गई. इसके बाद मार्च 2025 में मायावती ने एक बार फिर उन्हें सभी पदों से हटा दिया और अगले ही दिन पार्टी से निष्कासित कर दिया.
हालांकि, आकाश के सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद अप्रैल 2025 में उनकी पार्टी में वापसी हुई. मई 2025 में उन्हें चीफ नेशनल कोऑर्डिनेटर जैसी बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी भी दी गई थी. अब 3 सितंबर को मायावती ने एक बार फिर आकाश आनंद को अपरिपक्व बताते हुए उनसे पद वापस ले लिया है.
अब आगे क्या करेंगे आकाश आनंद?
मायावती के ताजा फैसले के बाद आकाश आनंद की राजनीतिक भूमिका फिलहाल सीमित हो गई है. हालांकि, उन्हें पार्टी में काम करने की अनुमति दी गई है. दूसरी ओर, संजय निषाद का उन्हें अपनी पार्टी में आने का ऑफर यूपी की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है.
बसपा जहां बिना गठबंधन के चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं दूसरी तरफ आकाश आनंद को लेकर पार्टी ने भी सतर्क रुख अपना लिया है. अब देखने वाली बात होगी कि संजय निषाद के ऑफर पर आकाश आनंद की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और 2027 के चुनाव से पहले ये सियासी घटनाक्रम किस दिशा में जाता है.
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