प्रयागराज की हाई-प्रोफाइल करछना विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव को लेकर रणनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है. हाल ही में दिग्गज समाजवादी नेता रेवती रमण सिंह से सपा प्रमुख अखिलेश यादव और इसके बाद बीजेपी विधायक हर्ष वाजपेई की मुलाकातों के बाद इस सीट पर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कांग्रेस सांसद उज्जवल रमण सिंह के इलाहाबाद से चुने जाने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि रेवती रमण सिंह का यह पुराना गढ़ 2027 में किसके पाले में जाएगा और क्या परिवार से कोई नया चेहरा चुनावी मैदान में उतरेगा.
ADVERTISEMENT
करछना का सियासी इतिहास और रेवती रमण सिंह का दबदबा
करछना विधानसभा सीट को लंबे समय तक दिग्गज नेता रेवती रमण सिंह का अभेद्य किला माना जाता रहा है. इस क्षेत्र में भूमिहार समुदाय के साथ-साथ पारंपरिक सपा-कांग्रेस वोट बैंक पर उनका गहरा प्रभाव है.
7 बार विधायक: रेवती रमण सिंह इस सीट से लगभग 7 बार विधायक रह चुके हैं और उनके बेटे उज्जवल रमण सिंह भी यहां से विधायक और प्रदेश सरकार में मंत्री रह चुके हैं.
बदलता चुनावी मिजाज: 2012 में बसपा के दीपक पटेल ने यह सीट जीती थी. लेकिन 2017 में उज्जवल रमण सिंह ने फिर से इस पर सपा का परचम लहराया.
2022 का उलटफेर: 2022 के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी पीयूष रंजन निषाद ने जीत हासिल कर इस सीट पर कब्जा जमाया था.
2027 की दावेदारी
चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि रेवती रमण सिंह अब सक्रिय चुनाव लड़ने की स्थिति में नहीं हैं और उज्जवल रमण सिंह सांसद बन चुके हैं. ऐसे में 2027 के चुनाव के लिए इंडिया गठबंधन (सपा-कांग्रेस) के पास दो प्रमुख विकल्प देखे जा रहे हैं.
पारिवारिक दावेदारी: रेवती रमण सिंह के परिवार से 'उत्कर्ष' या फिर उज्जवल रमण सिंह की पत्नी के नाम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में जोरों पर है.
पीडीए (PDA) दांव: यदि परिवार से कोई चुनाव नहीं लड़ता है तो रेवती रमण सिंह की सहमति से अखिलेश यादव किसी पीडीए प्रत्याशी (जैसे अमर बहादुर यादव या नंदलाल सिंह पटेल) को भी मौका दे सकते हैं.
भाजपा का सिटिंग कार्ड बनाम बसपा की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी: वर्तमान विधायक पीयूष रंजन निषाद ने 2022 में जो समीकरण साधे थे उसके आधार पर वह एक बार फिर बीजेपी के मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं. हालांकि पार्टी के भीतर टिकट मांगने वालों की संख्या अच्छी-खासी है.
बहुजन समाज पार्टी: 2022 के चुनाव में तीसरे स्थान पर रहने वाली बसपा एक बार फिर ब्राह्मण दांव खेलने की तैयारी में है और भावेश शुक्ला जैसे प्रत्याशियों पर विचार कर सकती है.
ये भी पढ़ें: वाराणसी में उफान पर गंगा...मणिकर्णिका से लेकर नमो घाट तक सब डूबा, ऐसा है माहौल
ADVERTISEMENT











