उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्माने लगा है. हमारे सहयोगी 'न्यूज तक' के विशेष कार्यक्रम में शामिल हुए राजनीतिक विश्लेषक और सोशल एक्टिविस्ट डॉ. लक्ष्मण यादव ने चुनाव नतीजों को लेकर एक बड़ी और चौंकाने वाली भविष्यवाणी की है. उन्होंने दावा किया कि अगर चुनाव में धांधली न हो तो आज के माहौल के हिसाब से इंडिया अलायंस 400 में से 240 से 280 के बीच सीटें जीत सकता है. लक्ष्मण ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि इस कुल आंकड़े में अकेले समाजवादी पार्टी 200 के ऊपर सीटें हासिल कर सकती है.
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डॉ. लक्ष्मण यादव के अनुसार, 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद उत्तर प्रदेश का राजनीतिक माहौल पूरी तरह बदल चुका है और 2027 का चुनाव केवल राज्य ही नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक ढांचे और भविष्य की राजनीति तय करेगा.
बीजेपी का ग्राफ नीचे लुढ़क रहा: लक्ष्मण यादव
लक्ष्मण यादव का मानना है कि बीजेपी के पास अभी भले ही भारी बढ़त हो, लेकिन अब उसका ग्राफ नीचे की ओर लुढ़क रहा है. 10 साल की एंटी-इन्कंबेंसी, रोजगार, खाद और नौकरियों में धांधली जैसे मुद्दों से जनता नाराज है. लक्ष्मण यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार काम पर चुनाव न लड़कर नफरत के एजेंडे और धर्म की पिच पर चुनाव लड़ने की कोशिश कर रही है.
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर क्या बोले लक्ष्मण यादव?
कांग्रेस नेता इमरान मसूद के इस बयान पर कि सपा को मिली 37 सीटें कांग्रेस के दलित वोट ट्रांसफर होने से आईं और गठबंधन में 200 सीटों की मांग की बात पर लक्ष्मण यादव ने कहा:
शीर्ष नेताओं का तालमेल: "गठबंधन को केवल अखिलेश यादव और राहुल गांधी के तालमेल के नजरिए से देखा जाना चाहिए, जो कि बेहद मजबूत और बेहतर है. सीटों का बंटवारा चुनाव आने पर बहुत आसानी से हो जाएगा."
सपा बड़ा भाई: "उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी ही गठबंधन में बड़ी भूमिका (बड़ा भाई) में है, जिसके वर्तमान में सवा सौ के करीब विधायक और 37 सांसद हैं. आंकड़ों की बाजीगरी पर जाने के बजाय यह देखना होगा कि कौन सा दल कितनी सीटें जीत सकता है."
पीडीए का नैरेटिव: "उत्तर प्रदेश में सपा का 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) एक समावेशी और मजबूत राजनीतिक नैरेटिव बन चुका है. अखिलेश यादव की रणनीति बहुत गहरी है और वे छोटे-छोटे स्तर पर अपना प्रचार करा रहे हैं."
मायावती और बीएसपी की अंदरूनी कलह पर राय
समर्थकों में भारी निराशा: "बीएसपी कभी एक मिशनरी और फाइटर पार्टी हुआ करती थी, जिसने दलितों को राजनीतिक रूप से सशक्त किया. लेकिन आज जिस तरह एक उभरते चेहरे (आकाश आनंद) का राजनीतिक करियर प्रभावित किया जा रहा है, उससे पार्टी के कोर समर्थक बेहद निराश हैं."
इंडिया गठबंधन की तरफ शिफ्ट होगा वोटर: "दलितों और शोषित वर्ग के खिलाफ बढ़ते अत्याचारों के बावजूद बीएसपी का ढुलमुल रवैया (अखिलेश यादव पर ज्यादा हमलावर होना) उसके वोटरों को नाराज कर रहा है."
सपा का वैचारिक बदलाव: "2024 के चुनाव में भी अनुसूचित जाति के बड़े हिस्से ने संविधान और अधिकारों की रक्षा के लिए इंडिया गठबंधन को वोट दिया था. अखिलेश यादव अब बाबा साहब भीमराव आंबेडकर के विचारों को पूरी तरह अपना चुके हैं (पार्टी दफ्तरों में आंबेडकर की फोटो, बाबा साहब वाहिनी का गठन आदि). 2027 में निराश बीएसपी वोटर का बड़ा हिस्सा इंडिया गठबंधन की तरफ शिफ्ट होगा."
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