Chandrashekhar Azad News: आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद ने अपनी हत्या की साजिश रचे जाने का बड़ा दावा किया है. पार्टी के आधिकारिक एक्स पेज से जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि उन्हें कुछ साथियों के जरिए जानकारी मिली है कि एक फार्महाउस में उनकी हत्या की योजना बनाई गई. चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि उनके पास इस संबंध में जो सूचनाएं और स्रोत हैं, वे गलत नहीं हैं. उन्होंने सरकार से पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है. यह बयान ऐसे समय आया है, जब गोंडा के कारोबारी विनोद साहनी हत्याकांड को लेकर गोंडा जाते समय बाराबंकी में उनके काफिले को पुलिस ने रोका था और बाद में काफिले पर पथराव के आरोप भी सामने आए.
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हत्या की साजिश रची गई पर क्या बोले?
चंद्रशेखर आजाद ने वीडियो में कहा, 'हालांकि मैं मानता हूं कि जब तक जीवन है, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा. मुझे कुछ साथियों द्वारा बताया गया कि एक फार्महाउस में मेरी हत्या करने की साजिश रची गई है.' उन्होंने दावा किया कि यह षड्यंत्र उन लोगों की ओर से रचा गया, जो आरक्षण खत्म करने के लिए आंदोलन चला रहे हैं. आजाद ने कहा कि UGC के मुद्दे से लेकर आरक्षण के विरोध में चल रहे आंदोलनों तक वह बिहार में आजाद समाज पार्टी की ओर से मुखर आवाज रहे हैं. उनके मुताबिक, राजनीतिक तौर पर उन्हें रोकने में कामयाबी नहीं मिलने के बाद उनकी हत्या की योजना बनाने की बात सामने आई है. हालांकि, इस हत्या की कथित साजिश के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है.
सरकार से जांच कराने की मांग की
चंद्रशेखर आजाद ने अपने दावे को लेकर सरकार से जांच कराने की मांग की. उन्होंने कहा, 'मैं चाहता हूं कि सरकार इसकी जांच कराए. ऐसा तो नहीं है कि मैं कहीं ऐसे ही झूठ बोल रहा हूं. सरकार जांच करा दे, दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा. मैं यह बात बहुत जिम्मेदारी से कह रहा हूं.' उन्होंने कहा कि उनके पास जो जानकारी आई है, उसके स्रोत को लेकर वह आश्वस्त हैं. आजाद ने यह भी कहा कि अगर सरकार जांच कराएगी तो सामने आ जाएगा कि फार्महाउस में उनकी हत्या की साजिश को लेकर मिली जानकारी सही थी या नहीं.
बिहार से यूपी तक इन मामलों का किया जिक्र
अपने बयान में चंद्रशेखर आजाद ने उन कई मामलों का भी जिक्र किया, जिनमें उन्होंने कमजोर और वंचित वर्गों की आवाज उठाने का दावा किया. उन्होंने कहा कि बिहार में रामलखन मौर्य, विनोद सहनी और रमेश कोरी के मामलों के अलावा पाल समाज की बेटी से जुड़े मामले में भी उन्होंने आवाज उठाई. उन्होंने ललिता और कपसाड़ की बेटी के मामलों का भी उल्लेख किया. आजाद के मुताबिक, जहां भी पिछड़े वर्ग के लोगों के साथ अत्याचार की जानकारी मिली, उन्होंने वहां जाकर उनकी बात रखने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि उनकी राजनीतिक सक्रियता के कारण उन्हें रोकने की कोशिश की जा रही है.
यूपी के इन मामलों का किया जिक्र
चंद्रशेखर आजाद ने अपने वीडियो में उत्तर प्रदेश के मामलों का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा, 'चाहे सहारनपुर की मस्जिद का मामला हो या बिजनौर का मामला, हर जगह जाकर हमने कमजोरों की आवाज उठाई है.' इसी क्रम में उन्होंने दावा किया कि जब राजनीतिक तौर पर उन्हें रोकना मुश्किल हुआ तो दो दिन पहले एक फार्महाउस में उनकी हत्या की योजना बनाई गई. आजाद ने कहा कि वह इस मामले में सरकार से जांच की अपेक्षा कर रहे हैं और जांच के जरिए पूरी सच्चाई सामने आनी चाहिए.
‘मौत से डरकर नहीं जिया जा सकता’
चंद्रशेखर आजाद ने अपने विरोधियों को संबोधित करते हुए कहा कि वह मौत से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा, 'अगर मेरी मौत आपके हाथ लिखी होगी तो हो जाएगी. लेकिन विश्वास कीजिए, अगर आप कामयाब नहीं हो पाए और मेरे लोगों ने मुझे ताकत दी, हिम्मत दी और आगे बढ़ा दिया, तो आप जैसे गुंडों को उत्तर प्रदेश से पलायन करना पड़ेगा.' इसके बाद उन्होंने फिर कहा कि मौत एक दिन सबको आनी है और मौत के डर से जीवन नहीं जिया जा सकता. उन्होंने अपने समर्थकों से भी डरने के बजाय संघर्ष जारी रखने की अपील की.
बाराबंकी की घटना का भी किया जिक्र
आजाद ने अपने बयान में बाराबंकी की उस घटना का भी जिक्र किया, जिसमें गोंडा जा रहे उनके काफिले को पुलिस ने रोका था और बाद में पथराव के आरोप लगे थे. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, वह गोंडा में मारे गए कारोबारी विनोद साहनी के परिवार से मिलने जा रहे थे. बाराबंकी में पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोका था, जिसके बाद पुलिस और उनके समर्थकों के बीच बहस और धक्का-मुक्की की स्थिति बनी. बाद की रिपोर्टों में उनके काफिले पर पत्थर और अन्य चीजें फेंके जाने तथा वाहनों को नुकसान पहुंचने के आरोप भी सामने आए.
‘गाड़ी में आग लगाने की कोशिश की गई’
चंद्रशेखर आजाद ने वीडियो में दावा किया कि उनके काफिले के साथ हुई घटना सामान्य विवाद नहीं थी. उन्होंने कहा, 'पेट्रोल या डीजल जैसा कुछ बोतलों में भरकर, उसमें बत्ती रखकर उस तरह की चीजें कर रहे हैं. गाड़ियों में आग लगाने का प्रयास कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें ढूंढ रहे थे और उनके हाथ में ज्वलनशील पदार्थ थे. आजाद ने दावा किया कि इस घटना को उनकी हत्या की साजिश से मिली जानकारी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. हालिया रिपोर्टों में भी बाराबंकी में उनके काफिले पर कथित पथराव और वाहनों के क्षतिग्रस्त होने की बात सामने आई है.
सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए
चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान के अंत में कानून-व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा, 'जब मैं सुरक्षा में हूं, तब अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे उस तरह की हिंसा का प्रयोग कर रहे हैं.' उन्होंने कहा कि जब दिन के उजाले में एक चुने हुए जनप्रतिनिधि और सांसद के साथ ऐसी घटना हो सकती है, तो दलितों, पिछड़ों और मुसलमानों की सुरक्षा और न्याय की स्थिति पर भी सवाल उठते हैं. आजाद ने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि घटनाओं और अपराधों में पीड़ितों को न्याय मिलने की स्थिति को लेकर वह संतुष्ट नहीं हैं. उन्होंने सरकार से फार्महाउस में कथित हत्या की साजिश और बाराबंकी की घटना में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कराने की मांग.
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