Husainganj Assembly Seat: साल 2008 के परिसीमन के बाद वजूद में आई फतेहपुर की हुसैनगंज विधानसभा सीट का मिजाज उत्तर प्रदेश की अन्य पारंपरिक सीटों से काफी अलग है. इस सीट का दिलचस्प इतिहास रहा है कि यहां की जनता हर चुनाव में नए चेहरे और अलग राजनीतिक दल पर भरोसा जताती है. 2012 में बहुजन समाज पार्टी, 2017 में भारतीय जनता पार्टी और 2022 में समाजवादी पार्टी ने यहां से जीत दर्ज की.वर्तमान में समाजवादी पार्टी की उषा मौर्या यहां से विधायक हैं. 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से ही पूर्व मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया और मौजूदा विधायक के बीच शह-मात का खेल शुरू हो चुका है.
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तीन चुनाव और तीन अलग-अलग विजेता
हुसैनगंज सीट पर अब तक हुए तीनों चुनावों में किसी भी पार्टी या विधायक का दबदबा दोबारा कायम नहीं हो सका है.
2012: मोहम्मद आसिफ (बसपा)
2017: रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया (बीजेपी)
2022: उषा मौर्या (सपा)
वर्तमान विधायक उषा मौर्या का दावा
सपा विधायक उषा मौर्या अपने काम के दम पर 2027 में फिर से जीत का दावा कर रही हैं. उनका कहना है कि उन्होंने हर गांव में सड़क, बिजली, पानी और लाइट का काम कराया है. इसके अलावा हथगाम में महिला अस्पताल का प्रस्ताव भिजवाने, महापुरुषों के स्वागत द्वार बनवाने और पेयजल सुविधाएं बढ़ाने जैसे प्रमुख विकास कार्य किए हैं. उषा मौर्या का दावा है कि 2027 चुनाव में बीजेपी 20% वोट पाने के लिए भी तरस जाएगी.
धुन्नी भैया का पलटवार
2022 में उपविजेता रहे बीजेपी के पूर्व मंत्री रणवेंद्र प्रताप सिंह उर्फ धुन्नी भैया का तर्क है कि पिछली बार मुस्लिम, यादव और कुशवाहा (मौर्या) वोट एकतरफा गोलबंद हो गए थे.बसपा का मुस्लिम वोट सपा में शिफ्ट हो गया और कुशवाहा समाज की सहानुभूति भी सपा प्रत्याशी को मिली. धुन्नी भैया का कहना है कि 67000 से अधिक वोट मिलने के बावजूद वह जातीय ध्रुवीकरण के कारण चुनाव हारे थे. हालांकि 2027 के चुनाव में जमीनी जुड़ाव और एंटी-इनकंबेंसी के चलते बीजेपी ऐतिहासिक वापसी करेगी.
हुसैनगंज का जातीय समीकरण
हुसैनगंज विधानसभा सीट मुख्य रूप से दलित और मुस्लिम बाहुल्य है. लेकिन चुनावी जीत में पिछड़ा (OBC) और सवर्ण वर्ग की भूमिका बेहद निर्णायक साबित होती है.
2027 की क्या बन रही है राजनीतिक तस्वीर?
स्थानीय विश्लेषकों के अनुसार, 2027 में हुसैनगंज का मुकाबला प्रत्याशी चयन पर निर्भर करेगा.
सपा का टिकट दांव: अगर समाजवादी पार्टी अपने प्रत्याशी का चेहरा बदलती है तो लड़ाई बेहद कड़ी होगी. मौजूदा विधायक को ही दोबारा मैदान में उतारने पर सत्ता विरोधी लहर का फायदा बीजेपी को मिल सकता है.
सीएम योगी का संदेश: हाल ही में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने फतेहपुर मंच से धुन्नी भैया का हाथ उठाकर समर्थन जताया था जिससे बीजेपी कार्यकर्ताओं में उत्साह है. वहीं दूसरी ओर विपक्षी खेमा इसे काउंटर करने के लिए फिर से पीडीए गोलबंदी की रणनीति पर काम कर रहा है.
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