UP News: दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर छात्रों का प्रदर्शन जारी है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने और दोषियों को जल्द सख्त सजा दिलाने का ऐलान किया था. अब प्रधानमंत्री के इस बयान पर लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य को सबसे ज्यादा नुकसान मौजूदा सरकार ने पहुंचाया है और छात्रों की मांगों को तुरंत पूरा किया जाना चाहिए.
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पीएम मोदी के बयान पर राहुल गांधी का जवाब
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा,
"आपने ही हमारे युवाओं के भविष्य को सबसे ज़्यादा नुकसान पहुंचाया है. आपने न सिर्फ हमारी education system पर पूरा कब्ज़ा होने और उसे बर्बाद होने दिया, उसे बढ़ावा भी दिया - और इसके ज़िम्मेदार हर व्यक्ति को संरक्षण दिया.
छात्रों की मांगें साफ हैं:
- धर्मेंद्र प्रधान को पद से हटाएं.
- छात्रों से माफ़ी मांगे.
- छात्रों के साथ हिंसा करने वालों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करें."
पीएम मोदी ने क्या कहा था?
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि देश के युवाओं का हित और उनका भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने घोषणा की कि पेपर लीक के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि दोषियों को जल्द और कठोर सजा मिल सके. प्रधानमंत्री ने कहा कि संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए जा चुके हैं. उन्होंने दोहराया कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा.
कब हुआ था NEET-UG 2026 का पहला पेपर?
NEET-UG 2026 की परीक्षा 3 मई 2026 को आयोजित हुई थी. परीक्षा के बाद प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप लगे. इसके बाद केंद्र सरकार की शिकायत पर 12 मई को CBI ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की. 15 मई को CBI ने कथित मास्टरमाइंड समेत कई आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी.
दोबारा कब हुई परीक्षा?
पेपर लीक विवाद के बाद NEET-UG 2026 की दोबारा परीक्षा कराई गई. इसके बाद भी विवाद और छात्रों का विरोध जारी रहा, जिसने आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर के आंदोलन का रूप ले लिया.
CJP के बैनर तले जारी है आंदोलन
NEET-UG 2026 पेपर लीक विवाद के बाद "कॉकरोच जनता पार्टी (CJP)" के बैनर तले छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. शुरुआत परीक्षा रद्द करने और निष्पक्ष जांच की मांग से हुई थी. इसके बाद जंतर-मंतर पर धरना शुरू हुआ. संगठन ने "संसद चलो" मार्च का भी आह्वान किया. इस दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें भी हुईं. आंदोलन के प्रमुख मुद्दों में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग शामिल है. हाल के दिनों में कई विपक्षी दलों के नेता भी जंतर-मंतर पहुंचकर छात्रों के समर्थन में खड़े हुए हैं. फिलहाल यह मामला गरमाया हुआ है. ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के इस आश्वासन से आंदलोनकरी संतुष्ट होंगे या नहीं ये देखना वक्त ही बताएगा.
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