UP News: यूपी Tak का खास शो 'आज का UP' प्रदेश से जुड़े उन मुद्दों का विश्लेषण करता है, जिनका असर उत्तर प्रदेश की राजनीति पर भी पड़ता है. इस अंक में तीन बड़े मुद्दों पर चर्चा की गई. पहला, छात्र आंदोलन के बीच संसद में अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच दिखे मतभेद. दूसरा, प्रधानमंत्री आवास के बाहर हुए धरने को लेकर विपक्ष के भीतर समन्वय पर उठे सवाल. तीसरा, छात्र आंदोलन का राजनीतिक श्रेय लेने की होड़ और उसमें समाजवादी पार्टी व कांग्रेस की अलग-अलग रणनीति.
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संसद में क्यों भड़के अखिलेश यादव? कांग्रेस पर ही उठा दिया सवाल
छात्र आंदोलन के मुद्दे पर सड़क पर साथ दिखाई देने वाले समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के बीच संसद में अलग तस्वीर देखने को मिली. सदन की कार्यवाही के दौरान अखिलेश यादव ने अध्यक्ष से सवाल किया कि उन्हें बोलने का मौका क्यों नहीं दिया गया और यह तक कह दिया कि क्या सरकार और कांग्रेस के बीच कोई समझौता हो गया है. उन्होंने कहा कि यह मुद्दा किसी दल का नहीं बल्कि छात्रों और युवाओं का है. उनका कहना था कि सदन में सबसे पहले छात्रों के साथ हुए व्यवहार पर चर्चा होनी चाहिए. इसी दौरान उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर भी अलग रुख दिखाया. अखिलेश यादव ने कहा कि इस्तीफा बाद में भी लिया जा सकता है, लेकिन फिलहाल छात्रों का मुद्दा उठाना ज्यादा जरूरी है.
PM आवास के बाहर धरने को लेकर क्या था विवाद?
प्रधानमंत्री आवास के बाहर कांग्रेस नेताओं के धरने को लेकर भी विपक्ष के भीतर समन्वय पर सवाल उठे. कांग्रेस ने अचानक प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया, जहां राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी समेत कई नेता पहुंचे. बाद में अखिलेश यादव भी वहां पहुंचे. इस कार्यक्रम को लेकर समाजवादी पार्टी को पहले से पूरी जानकारी नहीं थी. इसी वजह से दोनों दलों के बीच नाराजगी की चर्चा तेज हुई और अगले ही दिन संसद में उसका असर दिखाई दिया.
छात्र आंदोलन पर श्रेय की राजनीति भी बनी चर्चा का विषय
छात्र आंदोलन को लेकर विपक्षी दलों की रणनीति पर भी चर्चा हुई. आंदोलन के शुरुआती दौर में समाजवादी पार्टी के कई नेता लगातार प्रदर्शन में सक्रिय दिखाई दिए. डिंपल यादव समेत पार्टी के कई सांसद और नेता प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे. वहीं कांग्रेस के बड़े नेता शुरुआत में मंच से दूरी बनाए रहे. बाद में राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरने ने पूरे आंदोलन की राजनीतिक चर्चा का केंद्र बदल दिया. ऐसी चर्चा है कि इसी के बाद आंदोलन के राजनीतिक श्रेय को लेकर दोनों दलों के बीच प्रतिस्पर्धा की स्थिति भी देखने को मिली और संसद में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए.
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