'मैं क्षमा मांगने के लिए तैयार हूं', हनुमानगढ़ी में नमाज विवाद पर बृज भूषण सिंह का यू-टर्न, CM योगी को लेकर कही ये बात

अंचल श्रीवास्तव

22 Jul 2026 (अपडेटेड: 22 Jul 2026, 09:46 AM)

उत्तर प्रदेश में हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर दिए गए बयान पर विवाद बढ़ने के बाद पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने सफाई दी है. उन्होंने कहा कि उनका मकसद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था. साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उनके बयान से किसी की भावना आहत हुई है तो वह माफी मांगने को तैयार हैं.

Brij Bhushan Sharan Singh

Brij Bhushan Sharan Singh (File Photo)

Google CTA

Brij Bhushan Sharan Singh Hanumangarhi Statement: उत्तर प्रदेश की राजनीति में हनुमानगढ़ी में नमाज को लेकर दिया गया बयान चर्चा का विषय बना हुआ है. इस विवाद के बीच पूर्व सांसद बृज भूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बयान का विरोध करना नहीं था. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि उनके बयान से किसी की भावना आहत हुई है तो उन्हें माफी मांगने में कोई संकोच नहीं है. उन्होंने माना कि उन्हें उसी समय अपने बयान का पूरा संदर्भ स्पष्ट कर देना चाहिए था, जिससे विवाद की स्थिति पैदा नहीं होती.

यह भी पढ़ें...

सीएम के बयान के बाद शुरू हुआ विवाद

पूरा मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान के बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया था कि सपा सरकार के दौरान अयोध्या स्थित हनुमानगढ़ी में नमाज पढ़वाई गई थी. इसके बाद 17 जुलाई को गोंडा में मीडिया से बातचीत के दौरान बृज भूषण शरण सिंह से इस विषय पर सवाल पूछा गया. जवाब में उन्होंने कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी. उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई और इसे मुख्यमंत्री के बयान से जोड़कर देखा जाने लगा.

बृज भूषण शरण सिंह ने क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि मीडिया ने उनसे सीधा सवाल किया था कि क्या हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़ी गई थी. उन्होंने उसी सवाल का जवाब देते हुए कहा था कि ऐसा नहीं हुआ था. उन्होंने कहा, 'मुझे उसी समय यह भी स्पष्ट कर देना चाहिए था कि सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी, लेकिन 52 बीघा परिसर के भीतर, किसी संत के स्थान पर या परिसर के अन्य हिस्से में नमाज पढ़े जाने की बात अलग है.' उनका कहना है कि यदि उन्होंने उस समय पूरा संदर्भ बता दिया होता तो शायद विवाद इतना नहीं बढ़ता.

हनुमानगढ़ी में नमाज पर क्या कहा?

पूर्व सांसद ने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने कहा, 'जब मुझसे सीढ़ियों पर नमाज पढ़ने का सवाल पूछा गया तो मुझे यह सुनकर ही झटका लगा. इसलिए मैंने तुरंत कहा कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी.' उन्होंने आगे कहा कि उनका मकसद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बात का विरोध करना नहीं था. उनके मुताबिक, 'अश्वत्थामा हतो नरो वा कुंजरो जैसी स्थिति बन गई है. एक तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान भी सही है, अयोध्या के संतों का बयान भी सही है और मेरा बयान भी सही है. मैंने सिर्फ इतना कहा था कि हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज नहीं पढ़ी गई थी.'

बृज भूषण शरण सिंह ने कहा कि उनके बयान को जिस तरह पेश किया गया, उससे गलत संदेश गया. उनका कहना है कि ऐसा दिखाया गया मानो वह मुख्यमंत्री के बयान का विरोध कर रहे हों, जबकि उनकी ऐसी कोई मंशा नहीं थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने केवल पूछे गए सवाल का जवाब दिया था और उसके बाद बयान को अलग संदर्भ में देखा जाने लगा. उन्होंने यह भी दोहराया कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं था.

माफी मांगने को तैयार

पूर्व सांसद ने कहा कि यदि उनके बयान से किसी व्यक्ति या किसी वर्ग की भावनाएं आहत हुई हैं तो वह इसके लिए माफी मांगने को तैयार हैं. उन्होंने कहा, 'अगर किसी को मेरे बयान से ठेस पहुंची है या मीडिया ने इसे इस तरह दिखाया कि मैं मुख्यमंत्री की बात काट रहा हूं, तो मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि ऐसी मेरी कोई भावना नहीं थी. मुख्यमंत्री की बात का विरोध करने का सवाल ही नहीं उठता. अगर किसी की भावना आहत हुई है तो मैं क्षमा मांगने के लिए तैयार हूं.' उनके इस स्पष्टीकरण के बाद अब यह देखना होगा कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है.