Mood Kya Hai Mau: पूर्वांचल की राजनीति में मऊ जिला हमेशा से अपने जातीय समीकरणों और कड़े सियासी मुकाबलों के लिए जाना जाता है. 2022 के विधानसभा चुनाव में जिले की 4 में से 3 सीटों पर समाजवादी पार्टी और उसके गठबंधन का कब्जा रहा था. जबकि भारतीय जनता पार्टी के खाते में महज 1 सीट (मधुबन) आई थी. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी घोसी सीट पर सपा-कांग्रेस गठबंधन का पलड़ा भारी रहा. 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर मऊ का मूड क्या है? क्या बीजेपी अपनी सीटों का दायरा बढ़ा पाएगी या सपा अपना किला बचाए रखेगी? UP Tak के विशेष कार्यक्रम 'मूड क्या है' में ग्राउंड जीरो पर तैनात जिले के दिग्गज पत्रकारों से बातचीत कर तैयार की गई चारों सीटों (मऊ सदर, घोसी, मधुबन और मोहम्मदाबाद गोहना) की यह एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.
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मऊ में सपा गठबंधन की मजबूत पकड़
मऊ जिले में कुल 4 विधानसभा सीटें हैं. 2022 के चुनाव में 3 सीटों (मऊ सदर, घोसी और मोहम्मदाबाद गोहना) पर सपा गठबंधन ने जीत दर्ज की थी. जबकि मधुबन सीट पर भाजपा विजयी रही थी. 2024 के घोसी लोकसभा चुनाव में भी सपा ने मऊ क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी चारों विधानसभाओं में अपनी बढ़त बनाए रखी.
मऊ सदर: सपा बनाम बसपा की सीधी टक्कर, डमी साबित होगी भाजपा?
वर्तमान स्थिति: मऊ सदर सीट से सुभासपा-सपा गठबंधन से जीते अब्बास अंसारी वर्तमान विधायक हैं. अंसारी परिवार (दिवंगत मुख्तार अंसारी) का इस सीट पर पिछले 30 वर्षों से राजनीतिक वर्चस्व रहा है. अब्बास अंसारी की मजबूरी इस बार सपा के सिंबल पर चुनाव लड़ना मानी जा रही है.
बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से मऊ नगर पालिका के वर्तमान चेयरमैन अरशद जमाल सबसे मजबूत दावेदार बनकर उभर रहे हैं. पत्रकारों का मानना है कि मुस्लिम और दलित मतों में सेंधमारी कर अरशद जमाल, अब्बास अंसारी को कड़ी टक्कर देंगे. यहां मुख्य मुकाबला सपा और बसपा के बीच होने के आसार हैं. जबकि भाजपा का प्रत्याशी मुकाबला त्रिकोणीय बनाने के संघर्ष में रहेगा.
घोसी विधानसभा: सहानुभूति कार्ड बनाम 'मंत्रीजी' का एंट्री फैक्टर
वर्तमान स्थिति: विधायक सुधाकर सिंह के असमय निधन के बाद यह सीट खाली हुई है.
2027 का गणित
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने दिवंगत विधायक सुधाकर सिंह के बेटे सुजीत सिंह (पूर्व ब्लॉक प्रमुख) को प्रत्याशी बनाने के संकेत दिए हैं जिससे सपा को सहानुभूति वोट मिलने की उम्मीद है. एनडीए गठबंधन (सुभासपा) के खाते में यदि सीट जाती है तो फागू सिंह का नाम चर्चा में है. भाजपा खेमे से कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा को घोसी सीट से लड़ाए जाने के कयास भी लगाए जा रहे हैं.
मधुबन विधानसभा: 'मत चूको चौहान' और बीजेपी का गढ़
वर्तमान स्थिति: जिले में भाजपा की एकमात्र जीत वाली सीट, जहां से रामविलास चौहान (पूर्व राज्यपाल फागू चौहान के पुत्र) विधायक हैं.
2027 का गणित
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में मधुबन दौरे के दौरान 'मत चूको चौहान' का नारा देकर रामविलास चौहान को मजबूत संकेत दिए हैं. दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री ए.के. शर्मा की सक्रियता के कारण उनके भी चुनाव लड़ने की अटकलें हैं. सपा की ओर से सगड़ी (आजमगढ़) के वर्तमान विधायक डॉ. एच.एन. सिंह पटेल दावेदारी ठोक सकते हैं. यदि भाजपा से टिकट में फेरबदल होता है, तो समीकरण दिलचस्प हो सकते हैं.
मोहम्मदाबाद गोहना (सुरक्षित): असंतोष बनाम महिला कार्ड
वर्तमान स्थिति: समाजवादी पार्टी के राजेंद्र कुमार यहां से विधायक हैं.
2027 का गणित
स्थानीय पत्रकारों के अनुसार वर्तमान सपा विधायक की निष्क्रियता से कार्यकर्ताओं में नाराजगी है जिससे उनका टिकट कटने की चर्चा है (सपा से बैजनाथ पासवान भी दावेदार हैं). भाजपा से पूर्व प्रत्याशी पूनम सरोज, उर्मिला पासी, विनय कुमार और पूर्व मंत्री श्रीराम सोनकर रेस में हैं. महिला आरक्षण और स्थानीय असंतोष को भुनाकर भाजपा इस सीट को सपा से छीनने की कोशिश करेगी.
स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों का निचोड़
मुद्दे और आक्रोश: पूर्वांचल में चुनाव मुख्य रूप से जातिगत गोलबंदी पर केंद्रित होता है. हालांकि, युवा वर्ग बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को लेकर सरकार से असहज है. लेकिन विपक्ष के पास भी कोई एकमुश्त आक्रामक एजेंडा फिलहाल नजर नहीं आ रहा.
प्रत्याशी की छवि निर्णायक: मऊ जिले में पार्टी से ज्यादा 'उम्मीदवार का चेहरा' वोट तय करता है.
सपा का पलड़ा भारी पर चुनौतियां बरकरार: पत्रकारों का मानना है कि यदि टिकट वितरण सही रहा तो सपा 3 सीटों पर अपनी बढ़त बरकरार रख सकती है. लेकिन भाजपा मधुबन के अलावा मोहम्मदाबाद गोहना व घोसी में अपनी मजबूत रणनीति से उलटफेर करने का माद्दा रखती है.
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