जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन पर हुए लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई के विरोध में अब आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद संसद परिसर के भीतर ही अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए हैं. संसद परिसर में डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के ठीक नीचे चंद्रशेखर कल (20 जुलाई) रात 11 बजे से लगातार अकेले धरने पर डटे हुए हैं. पूरी रात हुई मूसलाधार बारिश के बावजूद त्रिपाल डालकर बैठे चंद्रशेखर ने साफ कर दिया है कि जब तक सरकार आंदोलित छात्रों से संवाद कर उनकी मांगें पूरी नहीं करती, उनका यह प्रदर्शन जारी रहेगा. उनके हाथ में एक तख्ती भी नजर आई जिस पर लिखा 'पेपर लीक सबसे बड़ा देशद्रोह, गद्दारों को उम्र कैद दो.'
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कुदरत इम्तिहान ले रही पर हौसला नहीं टूटेगा-चंद्रशेखर
संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा 'मैं कल रात 11 बजे से ही डॉ. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की मूर्ति के नीचे बैठा हूं. कुदरत मेरा इम्तिहान ले रही है. रातभर इतनी जोरदार बारिश हुई. लेकिन यह बारिश मेरा हौसला नहीं गिरा सकती. यह वही संविधान है जिसका आर्टिकल 330 मुझे इस सदन का सदस्य बनने का अधिकार देता है.'
चंद्रशेखर ने भावुक होते हुए कहा 'जब मैं कल रात अपने ऑफिस गया और वहां फोन पर विजुअल्स देखे कि किस तरह युवाओं पर अन्याय हुआ तो जो खाना खाकर आया था, वह भी नहीं पचा. मेरे जैसा आदमी जो अन्याय के खिलाफ लड़कर यहां तक आया है, वह चुपचाप चैन से कैसे बैठ सकता है?'
पुलिस और सादे कपड़ों में आए लोगों पर बड़े आरोप
जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ हुई झड़प और लाठीचार्ज पर चंद्रशेखर ने दिल्ली पुलिस और प्रशासन पर बेहद संगीन आरोप लगाए. उन्होंने कहा 'कल जंतर-मंतर पर देश के पढ़े-लिखे नौजवान, लड़के-लड़कियां उतरे थे. वे किसी पार्टी के कार्यकर्ता नहीं थे. लेकिन पुलिस ने जिस तरह लाठियां भांजी, वह खौफनाक था. पैरों में नहीं, सीधे सिर पर लाठियां मारी गईं.'
इस दौरान चंद्रशेखर ने दावा किया कि पुलिस के साथ-साथ कई ऐसे लोग भी थे जो बिना वर्दी के थे. उन्होंने छात्राओं को दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां मारीं जिसके कारण कई बच्चियों के कपड़े तक फट गए और उनके सिर फूट गए.
'मदर ऑफ डेमोक्रेसी में 30 दिन से भूख हड़ताल पर हैं बच्चे'
केंद्र सरकार के रवैये पर तीखा हमला बोलते हुए नगीना सांसद ने कहा 'देश के प्रधानमंत्री लाल किले से भारत को मदर ऑफ डेमोक्रेसी बताते हैं. जहां अंतिम व्यक्ति की बात सुनने का दावा किया जाता है. लेकिन जंतर-मंतर पर सोनम वांगचुक से लेकर कई बेटियां इतने दिनों से भूख हड़ताल पर बैठी हैं और सरकार उनसे सीधा संवाद तक नहीं कर रही.' उन्होंने कहा कि जो बातचीत सरकार ने कल रात या बाद में की, अगर वही बात चार दिन पहले हो जाती तो दिल्ली पर लाठीचार्ज का यह काला दाग नहीं लगता.
चंद्रशेखर की मुख्य मांगें
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और अपनी मांगों को लेकर चंद्रशेखर ने स्थिति साफ की मेरी मांगें वही हैं जो जंतर-मंतर पर बैठे देश के छात्रों की हैं. देश के इतिहास में पहली बार शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर इतना बड़ा आंदोलन हो रहा है. मेरी मुख्य मांग यह है कि देश की शिक्षा नीति और व्यवस्था में आमूलचूल बदलाव हो.
उन्होंने सवाल उठाया कि देश में 94,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हो चुके हैं. ऐसे में गरीब के बच्चे कहां जाएंगे? जब तक सरकार छात्रों की मांगें मानकर रास्ता नहीं निकालती, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा.
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