यूपी की सियासत में 'दुश्मन का दुश्मन दोस्त' वाला फॉर्मूला तो आपने खूब सुना होगा, लेकिन जब घर के झगड़े और सियासी दुश्मनी एक ही पटरी पर आकर मिल जाएं, तो राजनीति का तापमान बढ़ना तय है. उत्तर प्रदेश के बाहुबली नेता और जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के प्रमुख रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' और सपा मुखिया अखिलेश यादव के बीच सियासी कड़वाहट किसी से छिपी नहीं है.
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अब इस सियासी अदावत में एक ऐसा नया मोड़ आ गया है जिसने लखनऊ से लेकर दिल्ली तक की सियासत में सनसनी फैला दी है. राजा भैया की पत्नी भानवी कुमारी सिंह, जिनसे उनका लंबे समय से तलाक का विवाद चल रहा है, अब खुलेआम अखिलेश यादव और सपा सांसद डिंपल यादव के समर्थन में उतर आई हैं.
भानवी का पोस्ट और डिंपल यादव की तारीफ
दरअस्ल, 20 जुलाई को दिल्ली में हुए छात्रों के विरोध प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव पहुंची थीं. इसी घटना का वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर शेयर करते हुए भानवी कुमारी सिंह भद्री ने सपा नेताओं की जमकर तारीफ की.
भानवी कुमारी सिंह ने लिखा,
"जब आवाज दबाने की कोशिश हो रही हो, तब उस आवाज़ के साथ खड़ा होना ही सबसे बड़ा साहस है. कल छात्रों के आंदोलन में डिंपल यादव जी की सक्रिय उपस्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का संदेश देती है. इतिहास उन नेताओं को याद रखता है जो कठिन समय में जनता का हाथ नहीं छोड़ते."
कौन हैं भानवी कुमारी सिंह?
भानवी कुमारी सिंह बस्ती राजघराने से ताल्लुक रखती हैं और कुंडा के बाहुबली विधायक राजा भैया की पत्नी हैं. दोनों का विवाह 1995 में हुआ था. पिछले कुछ समय से भानवी और राजा भैया के रिश्ते में भारी खटास आ चुकी है और दोनों का मामला कोर्ट में तलाक की प्रक्रिया तक पहुंच चुका है. भानवी अक्सर अपने बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर चर्चा में बनी रहती हैं.
क्यों खास है यह सियासी दांव?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राजा भैया का झुकाव अक्सर सत्ताधारी दल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तरफ देखने को मिलता है. विधानसभा में भी वे कई बार भाजपा के पक्ष में खड़े दिखे हैं. वहीं दूसरी तरफ, अखिलेश यादव और राजा भैया के बीच दूरियां काफी पुरानी और गहरी हैं.
ऐसे में राजा भैया की पत्नी का सीधे तौर पर अखिलेश यादव और डिंपल यादव के समर्थन में आना सिर्फ एक सोशल मीडिया पोस्ट भर नहीं है. इसे राजा भैया के सियासी विरोधियों को सीधा संदेश और यूपी की राजनीति में एक नए समीकरण के तौर पर देखा जा रहा है.
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