Mood Kya Hai Amethi: अमेठी के सियासी समीकरण कर रहे हैं क्या इशारा, किसकी होगी जीत?

अभिषेक त्रिपाठी

• 07:12 PM • 22 Jul 2026

Mood Kya Hai Amethi: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अमेठी का सियासी समीकरण बदलता दिख रहा है. 2024 लोकसभा नतीजों, कांग्रेस-सपा गठबंधन, बीजेपी की रणनीति, टिकट की खींचतान, बेरोजगारी, पेपर लीक और स्थानीय मुद्दों पर क्या है जनता का मूड, जानिए इस खास रिपोर्ट में.

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Mood Kya Hai Amethi: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर सरगर्मी तेज हो गई है और देश की सबसे चर्चित राजनीतिक लड़ाइयों में शुमार अमेठी का सियासी समीकरण एक बार फिर केंद्र में है. यूपी Tak के विशेष चुनावी विश्लेषण 'मूड क्या है अमेठी में स्थानीय पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों ने अमेठी जिले की चारों विधानसभा सीटों (अमेठी, गौरीगंज, जगदीशपुर और तिलोई) के भविष्य और जनता के मूड पर खुलकर चर्चा की. जहां 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी और सपा ने दो-दो सीटें जीती थीं. वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-सपा गठबंधन और सांसद किशोरी लाल शर्मा की जीत ने पूरे समीकरण को पलट दिया है.

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2022 के नतीजे और 2024 का लोकसभा बदलाव

पिछला विधानसभा परिणाम: 2022 के विधानसभा चुनाव में अमेठी जिले की चार सीटों में से दो पर भारतीय जनता पार्टी और दो पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी.

लोकसभा चुनाव का असर: 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन के बाद पासा पूरी तरह पलट गया. चारों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस-सपा गठबंधन को बढ़त मिली और कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा यहां से सांसद चुने गए, जिससे कांग्रेस का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है.

टिकट की दौड़, दलबदल और भीतरघात का जोखिम

टिकट को लेकर उहापोह: पत्रकारों और विश्लेषकों का मानना है कि 2027 के चुनाव से पहले सभी दलों (BJP, SP, Congress) में टिकट चाहने वालों की लंबी फेहरिस्त है. हालांकि, मौजूदा विधायकों या दावेदारों से पार्टी संगठन पूरी तरह संतुष्ट नहीं नजर आ रहा.

आया राम-गया राम की संस्कृति: जानकारों के मुताबिक, नेताओं में दल बदलने का चलन आम हो गया है. आज जो नेता बीजेपी में है, वह कल सपा का चेहरा बन सकता है और इसके विपरीत भी स्थिति हो सकती है. चुनाव घोषणा के बाद बढ़ने वाले इस आपसी द्वंद और भीतरघात का फायदा किसी तीसरे दल को मिल सकता है.

प्रमुख सियासी समीकरण और दिग्गजों की सक्रियता

रियासत बनाम प्रजापति परिवार: अमेठी क्षेत्र में मुख्य मुकाबला रियासत और प्रजापति परिवार के इर्द-गिर्द घूमता दिखता है. गौरीगंज से लेकर तिलोई और जगदीशपुर तक मजबूत स्थानीय चेहरे और बागी तेवर चुनावी जंग को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं.

स्मृति ईरानी और कांग्रेस की सक्रियता: पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी लगातार अमेठी क्षेत्र में सक्रिय हैं और दौरे कर रही है जिससे बीजेपी यहां कमजोर नहीं आंकी जा रही है. वहीं सांसद किशोरी लाल शर्मा की सक्रियता और कांग्रेस का संगठन भी अमेठी पर अपनी पकड़ मजबूत करने में जुटा है.

सपा का आंतरिक संतुलन: जानकारों का यह भी मानना है कि समाजवादी पार्टी में यदि आंतरिक असंतोष या वर्ग विशेष की नाराजगी होती है तो राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रचार में आने से वह स्वतः समाप्त हो जाती है.

जनता के ज्वलंत मुद्दे: बेरोजगारी, पेपर लीक और अन्य विमर्श

चुनावी विश्लेषकों और पत्रकारों ने इस बात पर जोर दिया कि 2027 के परिणाम केवल चेहरों पर नहीं, बल्कि जमीन पर खड़े जनमुद्दों पर तय होंगे.

युवाओं में आक्रोश और बेरोजगारी: सरकारी नौकरियों में कमी, निजीकरण और आए दिन प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने से युवाओं में जबरदस्त नाराजगी है. प्रतिभा पीछे छूटने और भ्रष्टाचारियों के आगे आने का मुद्दा बड़ा बनता जा रहा है.

अन्य ज्वलंत मुद्दे: किसानों को समय पर यूरिया और डीएपी खाद न मिलने की समस्या, राम मंदिर चढ़ावा चोरी से जुड़े विवादित मामले और यूजीसी (UGC) एक्ट जैसे विषयों का असर भी आगामी चुनावों के रुख को तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.