नीट (NEET) परीक्षा में हुई धांधली और पेपर लीक मामले को लेकर देश भर के छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है. अब इस मुद्दे पर संसद से लेकर सड़कों तक सियासत पूरी तरह से गरमा चुकी है. संसद के मानसून सत्र में भी इस मुद्दे की गूंज साफ सुनाई दे रही है, जहां पूरा विपक्ष एक जुट होकर सरकार को घेरने में लगा है.
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इसी बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर हमला बोला. उन्होंने सरकार की चुप्पी और कार्रवाई न करने की नीति पर कई तीखे सवाल उठाए हैं. आखिर ऐसा क्या राज़ है जिसे छिपाने के लिए सरकार इतने बड़े विवाद के बाद भी अपने मंत्री का इस्तीफा नहीं ले रही?
'काले कपड़ों' में विपक्ष का हल्लाबोल
संसद के मानसून सत्र के दौरान विरोध और दुख जताने के लिए कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत तमाम विपक्षी सांसद काले कपड़े पहनकर पहुंचे. यह विरोध सिर्फ नीट पेपर लीक के खिलाफ नहीं था, बल्कि उन मासूम छात्रों पर हुए पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में भी था जो अपने हक के लिए सड़कों पर उतरे थे.
संसद के भीतर और बाहर जिस तरह का माहौल है, उससे साफ है कि विपक्ष इस बार छात्रों के भविष्य के खिलवाड़ पर लीपापोती के मूड में बिल्कुल नहीं है.
"कहीं मंत्री के पास कोई छिपा हुआ राज तो नहीं?"
दिल्ली में आयोजित एक बड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान अखिलेश यादव ने सीधे केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाए. उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को दोहराते हुए कहा कि पूरा देश, नौजवान और उनके परिवार इस वक्त सरकार के खिलाफ खड़े हैं, फिर भी सरकार डर के साए में काम कर रही है.
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
"देखिए जो छात्र युवाओं के साथ हुआ है और सरकार डर के व्यवहार कर रही है. ये अपने मंत्रियों को इसलिए नहीं हटा पा रही है या क्या वजह है, हमें और आपको सोचना चाहिए. पूरा देश, पूरे नौजवान और उनके परिवार के लोग सरकार के खिलाफ हैं कि मंत्री को हटाया जाए. लेकिन क्या दबाव है सरकार के ऊपर कि वो मंत्री को नहीं हटा पा रहे? कहीं ऐसा तो नहीं कि मंत्री के पास वो छुपे राज हों... कहीं ऐसा दबाव बने और अपनी जान बचाने के लिए कहीं वो राज न खुल जाएं? आखिर मंत्री को हटाने में क्या जाता है सरकार का?"
जब मीडिया ने उनसे काले कपड़ों के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा,
"काला रंग विरोध का प्रतीक है और यह दुख का भी रंग है." वे छात्रों के साथ हुए अन्याय का विरोध करने और उनके दुख में शरीक होने के लिए काले कपड़े पहनकर आए थे.
लाखों युवाओं के भविष्य पर लटका 'सवालिया निशान'
अखिलेश यादव का यह बयान सीधे तौर पर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग करता है. जब देश के लाखों युवा रातों की नींद खराब करके डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं और अचानक उन्हें पता चलता है कि पेपर पहले ही बिक चुका था तो उनका टूट जाना लाजिमी है.
ऊपर से जब वो अपने हक की आवाज उठाते हैं, तो उन पर लाठियां बरसाई जाती हैं. ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सरकार छात्रों के साथ खड़े होने के बजाय अपने मंत्रियों को बचाने में ज्यादा जोर क्यों लगा रही है?
संसद में जारी इस हंगामे और लगातार होते प्रदर्शनों से एक बात तो साफ है कि नीट धांधली का मुद्दा इतनी आसानी से ठंडा होने वाला नहीं है. छात्रों का गुस्सा और विपक्ष का आक्रामक रुख आने वाले दिनों में सरकार की मुश्किलें और बढ़ा सकता है.
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