Amanpur Election 2027: कासगंज जिले की अमांपुर विधानसभा सीट जिले की तीन विधानसभाओं में सबसे चर्चित और राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील मानी जाती है. 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी का लगातार वर्चस्व रहा है और उसने पिछले तीन चुनावों में जीत की हैट्रिक लगाई है. 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भाजपा अमांपुर में अपनी जीत का चौका लगा पाएगी? या फिर समाजवादी पार्टी पीडीए फॉर्मूले और नए जातीय गोलबंदी के दम पर भाजपा के इस विजय रथ को रोक पाएगी?
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तीन चुनाव और भाजपा की हैट्रिक
2012 में वजूद में आई अमांपुर सीट पर अब तक हुए तीनों चुनावों में कमल खिला है.
2012: परिसीमन के बाद हुए पहले चुनाव में भाजपा की ममतेश शाक्य ने जीत हासिल की थी.
2017: भाजपा के देवेंद्र प्रताप सिंह ने जीत दर्ज कर इस सीट पर पार्टी की पकड़ मजबूत की.
2022: देवेंद्र प्रताप सिंह के असमय निधन के बाद भाजपा ने हरि ओम वर्मा पर दांव खेला. हरि ओम वर्मा ने सपा के सत्यपाल सिंह शाक्य को करीब 43,000 से अधिक वोटों के बड़े अंतर से हराकर हैट्रिक पूरी की.
जातीय गणित: लोधी और शाक्य वोटर हैं 'किंगमेकर'
कृषि प्रधान अमांपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि और जातीय समीकरण सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं. यहां का अनुमानित जातीय ढांचा इस प्रकार है.
| जाति / वर्ग | अनुमानित हिस्सेदारी (%) |
|---|---|
| लोधी राजपूत | 20% (सबसे प्रभावशाली) |
| शाक्य | 14% (निर्णायक स्विंग वोटर) |
| मुस्लिम | 14% |
| ठाकुर | 10% |
| जाटव (दलित) | 10% |
| ब्राह्मण | 7% |
| यादव | 7% |
| अन्य पिछड़ी जातियाँ (धीमर, बघेल, तेली, प्रजापति आदि) | 18% |
भाजपा बनाम सपा: क्या हैं दोनों पार्टियों के दावे?
भाजपा का दावा: भाजपा नेताओं का कहना है कि क्षेत्र में केंद्र व राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं (किसान सम्मान निधि, पेंशन, सड़कें, केंद्रीय विद्यालय व स्टेडियम जैसी विकास परियोजनाएं) और वर्तमान विधायक हरि ओम वर्मा की लगातार जनसक्रियता के दम पर जनता फिर से उन पर भरोसा जताएगी. संगठन का बूथ मैनेजमेंट और मजबूत कैडर उनकी सबसे बड़ी ताकत है.
समाजवादी पार्टी का पलटवार: सपा नेताओं का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अमांपुर विधानसभा क्षेत्र के भीतर भाजपा और सपा के बीच वोटों का अंतर घटकर महज 5,000 के आसपास रह गया था. नवल किशोर शाक्य के सांसद बनने के बाद शाक्य समुदाय का सपा के प्रति झुकाव बढ़ा है. पार्टी अब मुस्लिम, यादव और शाक्य समीकरण के साथ-साथ अन्य अति-पिछड़ी जातियों को जोड़कर बूथ स्तर पर सघन काम कर रही है.
पत्रकारों की राय
कासगंज के स्थानीय पत्रकारों के अनुसार, अमांपुर में केवल पार्टी की लहर काम नहीं करती बल्कि उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि और जातिगत स्वीकार्यता अहम होती है.
लोधी वोटर भाजपा की रीढ़: लोधी समाज पारंपरिक रूप से भाजपा का सबसे मजबूत आधार माना जाता है.
शाक्य वोटरों का रुख: शाक्य वोटर इस सीट पर 'स्विंग वोटर' माने जाते हैं. यदि सपा किसी साफ-सुथरी छवि वाले मजबूत शाक्य चेहरे या लोधी प्रत्याशी पर दांव लगाती है और पीडीए को साधने में सफल रहती है तो 2027 में मुकाबला बेहद कड़ा हो सकता है.
बीएसपी का फैक्टर: बीएसपी का जाटव वोट बैंक भी यहां निर्णायक स्थिति में रहता है और वह किसी भी दल का खेल बनाने या बिगाड़ने का माद्दा रखता है.
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