धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे वाली शर्त सरकार ने मानी या नहीं? CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कर दिया क्लियर

आयशा शेख़

• 05:36 PM • 24 Jul 2026

नीट परीक्षा विवाद को लेकर CJP प्रतिनिधियों ने केंद्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात कर तीन प्रमुख मांगें रखीं. इनमें शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को 1 करोड़ रुपये मुआवजा और छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की मांग शामिल है.

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नीट परीक्षा को लेकर छिड़ा संग्राम अब दिल्ली के गलियारों से निकलकर सीधे सरकार की चौखट तक पहुंच चुका है. विरोध की गूंज इतनी तेज थी कि आखिरकार केंद्रीय मंत्रियों को प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों के साथ मेज पर बैठना पड़ा.

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कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह से मुलाकात की. इस बैठक में छात्र प्रतिनिधियों ने साफ कर दिया कि जब तक उनकी तीन मुख्य शर्तें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटने वाले.

बैठक की 3 'नॉन-नेगोशिएबल' मांगें

सौरव दास के मुताबिक, मंत्रियों के सामने लिखित और मौखिक रूप से 3 प्रमुख मांगें रखी गईं-

  1. धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: पहली और सबसे बड़ी शर्त यह है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान या तो तुरंत इस्तीफा दें या फिर सरकार उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त करे. इस मांग पर कोई समझौता नहीं होगा.
  2. 1 करोड़ का मुआवजा: नीट के कथित भ्रष्ट और टूटे हुए सिस्टम के कारण जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए.
  3. FIR की वापसी और गांरटी: शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर दर्ज सभी पुलिस FIR वापस ली जाएं. साथ ही सरकार लिखित रूप से  गारंटी दे कि भविष्य में किसी भी छात्र को टारगेट नहीं किया जाएगा.

किन मांगों पर बनी बात?

बैठक के बाद सौरव दास ने बताया कि सरकार का रुख कुछ मांगों पर सकारात्मक रहा है. सरकार ने कहा है कि वह सैद्धांतिक तौर पर मुआवजे और FIR वापस लेने की मांग को स्वीकार करती है. सरकार ने आश्वासन दिया है कि छात्रों को आगे निशाना नहीं बनाया जाएगा.

हमारे दूसरे और तीसरे पॉइंट पर सरकार ने पॉजिटिव साइन दिखाया है. उन्होंने इन दो मांगों को मान लिया है. इसी वजह से हमें कल फिर से बैठक के लिए बुलाया गया है.

 

- सौरव दास,  प्रवक्ता (कॉकरोच जनता पार्टी)

दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

बातचीत के दौरान दिल्ली पुलिस द्वारा छात्रों को डिटेन किए जाने का मुद्दा भी जोर-शोर से उठा. सौरव दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली में किसी भी युवा को देखकर पुलिस हिरासत में ले रही है.

उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि निजामुद्दीन के पास से खाना ला रहे तीन छोटे बच्चों को पुलिस ने उठा लिया और बाद में बात करने पर छोड़ा, लेकिन उनका खाना भी वापस नहीं दिया. हालांकि, मंत्रियों ने ऐसी घटनाओं से इनकार किया, लेकिन आश्वासन दिया कि आगे ऐसा नहीं होगा.

अब आगे क्या? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सस्पेंस!

2 मांगों पर सहमति बनना छात्रों के आंदोलन की बड़ी जीत मानी जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा पेच अभी भी फंसा हुआ है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा!

क्या सरकार अपने मंत्री का इस्तीफा स्वीकार करेगी? या फिर कल होने वाली अगली दौर की बैठक में कोई नया मोड़ आएगा? यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा.