Azamgarh Sadar Vidhan Sabha 2027: उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे गढ़ हैं जिन्हें भेदना विपक्षी दलों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होता है. ऐसा ही एक अजेय दुर्ग है आजमगढ़ सदर विधानसभा सीट. समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट से विपक्ष के कद्दावर नेता दुर्गा प्रसाद यादव लगातार 9 बार चुनाव जीत चुके हैं और अब 2027 के चुनाव में 10वीं जीत की दहलीज पर खड़े हैं. आखिर क्या वजह है कि सत्ता किसी भी पार्टी की रहे, जीत का सेहरा दुर्गा प्रसाद यादव के सिर ही बंधता है? क्या इस बार भारतीय जनता पार्टी उनके इस तिलिस्म को तोड़ पाएगी? आइए यूपी Tak के खास शो 'यूपी किसका' में जानते हैं आजमगढ़ सदर का पूरा सियासी और जातीय समीकरण.
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रात-दिन जनता के बीच रहता हूं-दुर्गा यादव
साल 2002 से लेकर 2022 तक के सभी विधानसभा चुनावों में आजमगढ़ सदर की जनता ने सिर्फ एक नाम पर मुहर लगाई है, दुर्गा प्रसाद यादव. अपनी लगातार जीत के राज पर बात करते हुए सपा विधायक दुर्गा प्रसाद यादव का कहना है कि 'मैं रात-दिन जनता के बीच रहने वाला आदमी हूं. दुख-सुख में हमेशा उनके साथ खड़ा रहता हूं. हम भले ही इस समय विपक्ष में हैं लेकिन विधायक निधि और शासन से जो मदद मिलती है उससे विकास काम कराते हैं. अखिलेश यादव सरकार के समय गंभीर बीमारियों के लिए मिलने वाले 25 लाख रुपये के बजट को मैं जरूरतमंदों के इलाज में खर्च करता हूं. जनता इसी काम और जुड़ाव का आशीर्वाद देती है.'
स्थानीय पत्रकारों और सियासी जानकारों के मुताबिक, दुर्गा यादव के आवास पर आज भी रोजाना सुबह जनता दरबार लगता है, जहां सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं. शादी-ब्याह से लेकर हर दुख-सुख में मौजूदगी ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है.
बीजेपी का पलटवार का दावा
दूसरी तरफ लगातार दो बार से रनर-अप रहे बीजेपी नेता अखिलेश मिश्रा 'गुड्डू' इस बार बड़े उलटफेर का दावा कर रहे हैं. उनका मानना है कि आजमगढ़ की जनता अब बदलाव के मूड में है.
अखिलेश मिश्रा का कहना है कि जब उन्होंने पहली बार चुनाव लड़ा था तो उन्हें 62,000 वोट मिले थे. 5 साल जनता के बीच रहने के बाद दूसरी बार उन्हें 85,000 वोट मिले. बीजेपी प्रत्याशी का दावा है कि उनका वोट शेयर लगातार बढ़ रहा है और इस बार आजमगढ़ सदर सीट पर निश्चित रूप से कमल खिलेगा.
आजमगढ़ सदर का जातीय समीकरण और MY फैक्टर की ताकत
आजमगढ़ की इस हॉट सीट पर हमेशा से 'मुस्लिम-यादव' (MY) समीकरण और अति-पिछड़े वर्ग की गोलबंदी का बोलबाला रहा है. अनुमानित आंकड़ों के अनुसार यहाँ का सामाजिक गणित कुछ इस प्रकार है.
यादव: लगभग 65,000
दलित: लगभग 55,000
क्षत्रिय: लगभग 35,000
ब्राह्मण: लगभग 25,000
मुस्लिम: लगभग 20,000
राजभर: लगभग 18,000
चौहान: लगभग 16,000
कुशवाहा: लगभग 12,000
निषाद: लगभग 10,000
वैश्य: लगभग 3,000
अन्य जातियां: लगभग 36,000
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?
वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि आजमगढ़ मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की राजनीतिक कर्मभूमि रही है. सपा के कैडर और मुलायम-अखिलेश के प्रभाव वाले इस इलाके में दुर्गा प्रसाद यादव की अपनी व्यक्तिगत पैठ भी बहुत गहरी है. पार्टी स्तर पर उन्हें 10वीं बार भी टिकट मिलना तय माना जा रहा है. बीजेपी जब तक उनके मुकाबले कोई बड़ा और सर्वमान्य स्थानीय चेहरा खड़ा नहीं करती, तब तक दुर्गा प्रसाद यादव के इस अजेय किले को ढहाना बेहद मुश्किल चुनौती बना रहेगा.
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