बृजभूषण के बरी होते ही दोनों बेटे का पहला रिएक्शन, करण भूषण और प्रतीक भूषण ने क्या कहा?

आयशा शेख़

• 04:54 PM • 03 Aug 2026

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भाजपा सांसद और पूर्व WFI अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह तथा विनोद तोमर को बरी कर दिया.

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दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट से महिला पहलवानों से जुड़े यौन उत्पीड़न मामले में पूर्व भाजपा सांसद और भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत मिली है. अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और पूर्व WFI सहायक सचिव विनोद तोमर को बरी कर दिया है.

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फैसले के कुछ ही देर बाद बृजभूषण शरण सिंह के दोनों बेटों करन भूषण सिंह और प्रतीक भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी. आखिर उन्होंने क्या लिखा और इसके बाद खुद बृजभूषण शरण सिंह ने क्या कहा? आइए जानते हैं...

पिता के बरी होने पर बेटे करन भूषण सिंह ने क्या लिखा?

बृजभूषण शरण सिंह के बेटे और सांसद करन भूषण सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा,

"साज़िश हुई नाकाम, सत्य की हुई जीत. पिताजी आदरणीय श्री बृजभूषण शरण सिंह जी बाइज्ज़त बरी हुए. सत्यमेव जयते!"

प्रतीक भूषण सिंह ने भी दी प्रतिक्रिया

बृजभूषण शरण सिंह के दूसरे बेटे प्रतीक भूषण सिंह ने भी X पर संक्षिप्त प्रतिक्रिया दी. परिवार के साथ खुशी की एक तस्वीर साझा की और उन्होंने लिखा,

सत्य की जीत हुई

बरी होने के बाद क्या बोले बृजभूषण शरण सिंह?

कोर्ट से बाहर आने के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अदालत ने उन्हें और विनोद तोमर को बाइज्जत बरी किया है. उन्होंने कहा कि जिस दिन से उन पर आरोप लगे थे, तभी से वह खुद को निर्दोष बताते रहे हैं. उन्होंने कहा, 

"मैं पहले दिन से कह रहा था कि अगर आरोप साबित हो जाएंगे तो मैं खुद ही फांसी पर लटक जाऊंगा. आज कोर्ट ने मुझे बाइज्जत बरी किया है. यह मेरे, मेरे समर्थकों और हमारे वकीलों के लिए खुशी की बात है."

'मेरे खिलाफ साजिश रची गई'

फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने दावा किया कि उनके खिलाफ सुनियोजित साजिश रची गई थी. उन्होंने कहा कि अगर उनके खिलाफ एक भी आरोप साबित हो जाता तो वह सजा भुगतने के लिए तैयार थे.

उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें शुरू से अपने ऊपर भरोसा था और अब अदालत के फैसले के बाद उनकी बात सही साबित हुई है. उनके मुताबिक इस पूरे मामले में कुछ पहलवानों के साथ कई राजनीतिक दल और नेता भी शामिल थे. उन्होंने कहा कि जो लोग उन्हें पहले दोषी मान रहे थे, उन्हें अब अपने रुख पर विचार करना चाहिए. बातचीत के अंत में उन्होंने कहा, "होइहि सोइ जो राम रचि राखा."