बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत, महिला पहलवानों के यौन शोषण मामले में कोर्ट ने किया बरी

सृष्टि ओझा

03 Aug 2026 (अपडेटेड: 03 Aug 2026, 11:17 AM)

दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है.

Brij Bhushan Sharan Singh

Brij Bhushan Sharan Singh (File Photo)

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Brij Bhushan Sharan Singh News: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने महिला पहलवानों के यौन शोषण से जुड़े मामले में पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने उन्हें सबूतों के अभाव में बरी कर दिया है. यह फैसला सोमवार को सुनाया गया. बृजभूषण सिंह इस मामले में 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर चल रहे थे. वहीं, अदालत ने 10 मई 2024 को दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर उनके खिलाफ आरोप तय किए थे, जिसके बाद मामले में ट्रायल शुरू हुआ था.

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20 जुलाई 2023 से जमानत पर थे बृजभूषण

महिला पहलवानों की ओर से लगाए गए यौन शोषण के आरोपों के बाद यह मामला लंबे समय तक चर्चा में रहा. दिल्ली पुलिस की चार्जशीट के आधार पर 10 मई 2024 को अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ आरोप तय किए थे. इसके बाद मामले की सुनवाई आगे बढ़ी. बृजभूषण सिंह 20 जुलाई 2023 से नियमित जमानत पर थे. अब राउज एवेन्यू कोर्ट के फैसले के बाद उन्हें इस मामले में राहत मिल गई है.

फैसले के बाद बृजभूषण सिंह ने क्या कहा?

अदालत के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा, 'मैंने पहले जो कहा था, वही अब सही साबित हुआ है.' उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर उनकी प्रतिक्रिया सामने आई है.

बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने क्या कहा?

बृजभूषण शरण सिंह के वकील ने कहा कि वे अदालत के विस्तृत आदेश का इंतजार कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही उनका पक्ष रहा है कि शिकायत और शिकायतकर्ताओं के बयानों में कई विसंगतियां और विरोधाभास थे. वकील के मुताबिक, अदालत का विस्तृत आदेश जल्द जारी किया जाएगा. इसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर विस्तार से टिप्पणी की जाएगी.

साढ़े तीन साल चली कानूनी लड़ाई

भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न मामले में करीब साढ़े तीन साल चली कानूनी प्रक्रिया के बाद 3 अगस्त 2026 को अदालत ने फैसला सुनाया. इस पूरे मामले की शुरुआत जनवरी 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर पहलवानों के प्रदर्शन से हुई थी. इसके बाद शिकायत, जांच, एफआईआर, चार्जशीट, आरोप तय होने और गवाहों की गवाही से लेकर अंतिम बहस तक मामला अदालत में चलता रहा.

जनवरी से अप्रैल 2023 तक ऐसे बढ़ा मामला

18 जनवरी 2023 को पहलवानों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू किया. 19 जनवरी को बबीता फोगाट ने प्रदर्शनकारी पहलवानों से मुलाकात की और सरकार से बातचीत कराने का भरोसा दिया. इसी दिन पहलवानों ने तत्कालीन खेल मंत्री अनुराग ठाकुर से भी मुलाकात की. 20 जनवरी को विनेश फोगाट ने भारतीय ओलंपिक संघ, प्रधानमंत्री कार्यालय, अनुराग ठाकुर और अमित शाह को ट्वीट कर शिकायत दर्ज कराई. 21 जनवरी को अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद पहलवानों ने अपना पहला धरना खत्म कर दिया. इसके बाद 23 जनवरी को खेल मंत्रालय ने शिकायतों की जांच के लिए ओवरसाइट कमेटी बनाई. अप्रैल 2023 में समिति ने अपनी रिपोर्ट भारतीय ओलंपिक संघ को सौंप दी. 21 अप्रैल को छह महिला पहलवानों ने कनॉट प्लेस थाने में शिकायत दी और 23 अप्रैल से जंतर-मंतर पर दोबारा धरना शुरू कर दिया.

एफआईआर से कोर्ट के फैसले तक क्या-क्या हुआ?

25 अप्रैल 2023 को पहलवान सुप्रीम कोर्ट पहुंचे. 28 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि एफआईआर दर्ज की जाएगी. इसके बाद छह महिला पहलवानों की शिकायत पर एफआईआर संख्या 78/2023 दर्ज हुई, जबकि एक नाबालिग पहलवान की शिकायत पर पॉक्सो एक्ट के तहत अलग एफआईआर संख्या 77/2023 दर्ज की गई. 4 मई को सुप्रीम कोर्ट ने एफआईआर दर्ज होने के बाद याचिका का निस्तारण कर दिया. 28 मई को नए संसद भवन की ओर मार्च के दौरान पहलवानों को हिरासत में लिया गया. 30 मई को पहलवान मेडल गंगा में प्रवाहित करने हरिद्वार पहुंचे. 3 जून को केंद्रीय गृह मंत्री से मुलाकात और 7 जून को अनुराग ठाकुर से बातचीत के बाद आंदोलन 15 जून तक स्थगित कर दिया गया.