उत्तर प्रदेश की सियासत में आजमगढ़ की अतरौलिया विधानसभा सीट हमेशा से चर्चा में रही है. समाजवादी पार्टी का मजबूत गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर इस बार अपने बेटे को मैदान में उतारने का इरादा रख रहे हैं. लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सपा के तीन बार के हैट्रिक विधायक संग्राम यादव और उनके पिता बलराम यादव के दशकों पुराने 'लोकल कनेक्ट' को तोड़ा जा सकता है? यूपी Tak के खास शो 'यूपी किसका' में आज बात अतरौलिया के उस राजनीतिक और सामाजिक समीकरण की जिसने इस सीट को सपा के लिए अभेद्य किला बना दिया है.
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अतरौलिया में यादव परिवार का दबदबा
अतरौलिया सीट समाजवादी पार्टी के लिए बेहद मुफीद मानी जाती है. 2007 में बसपा के सुरेंद्र प्रसाद मिश्र की एक जीत को छोड़ दें तो यहां से बलराम यादव और उनके बेटे संग्राम यादव का दबदबा रहा है. 2002 में बलराम यादव यहां से विधायक चुने गए थे. इसके बाद 2012, 2017 और 2022 में उनके बेटे संग्राम यादव ने लगातार तीन बार जीत हासिल की.
विकास कार्ड पर संग्राम का दावा
विधायक संग्राम यादव का कहना है कि उनकी सरकार में अतरौलिया ब्लॉक मुख्यालय पर 100 बेड का संयुक्त जिला अस्पताल और 100 बेड का महिला विंग (कुल 200 बेड) एनएच पर बनवाया गया जहां रोजाना दो से ढाई हजार की ओपीडी होती है. इसी जनसेवा के दम पर जनता उनके साथ है.
निषाद पार्टी और ओपी राजभर की नजरें
पिछली बार एनडीए गठबंधन के तहत निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले प्रशांत सिंह 75,000 से अधिक वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे. प्रशांत सिंह का दावा है कि 'पिछली बार जो कमियां रह गईं, उन्हें सुधार लिया गया है. निषाद पार्टी को बीजेपी से भी ज्यादा वोट मिले थे. इस बार हम जितने वोट से हारे थे, उससे दोगुने वोटों के अंतर से चुनाव जीतेंगे.' वहीं अब इस सीट पर एनडीए के सहयोगी ओम प्रकाश राजभर अपने बेटे को लड़ाने की जुगत में हैं. हालांकि स्थानीय चर्चाएं यह भी हैं कि टिकट न मिलने की स्थिति में निषाद पार्टी का प्रत्याशी बसपा के सिंबल पर भी मैदान में उतर सकता है.
अतरौलिया का जातीय समीकरण
अतरौलिया में सपा के पक्ष में माहौल बनने की सबसे बड़ी वजह यहां की जनसांख्यिकी (Demographics) है जहां सपा का 'PDA' और बलराम यादव का व्यक्तिगत प्रभाव अन्य वर्गों को भी जोड़ता है.
यादव: 68,000
दलित: 53,000
ब्राह्मण: 48,000
क्षत्रिय (ठाकुर): 38,000
निषाद: 35,000
मुस्लिम: 32,000
वैश्य: 25,000
भूमिहार: 12,000
चौहान: 10,000
सोनकर / पासी / अन्य: 37,000
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार?
स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि अतरौलिया में जब तक बलराम यादव का प्रभाव है, तब तक संग्राम यादव को हराना किसी भी पार्टी के लिए बेहद मुश्किल चुनौती है. अगर एनडीए गठबंधन में ठाकुर वर्ग को टिकट नहीं मिलता है तो वहां का सवर्ण वोट भी बलराम यादव के साथ चला जाता है. यही वजह है कि विपक्षी दलों के दावों के बावजूद अतरौलिया में फिलहाल संग्राम यादव की पकड़ मजबूत नजर आ रही है.
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