बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भदोही जिले का नाम बदलकर दोबारा संत रविदास नगर करने के फैसले का स्वागत किया है. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के इस कदम की तारीफ करते हुए एक बड़ा राजनीतिक दांव भी खेल दिया है.
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मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक लंबी पोस्ट लिखकर सरकार से मांग की है कि बसपा शासनकाल में बनाए गए अन्य जिलों के पुराने नाम भी इसी तरह बहाल किए जाएं. इसके साथ ही मायावती ने सपा पर भी निशाना साधा.
कांशीराम नगर की रखी मांग
मायावती ने कहा कि उनकी सरकार ने दलित संत गुरु रविदास के सम्मान में भदोही का नाम संत रविदास नगर रखा था, लेकिन बाद में आई समाजवादी पार्टी की सरकार ने अपनी "जातिवादी और संकीर्ण मानसिकता" के चलते इसका नाम बदल दिया था.
उन्होंने याद दिलाया कि बसपा के चार कार्यकालों के दौरान बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था और जनकल्याण के लिए कई नए जिले, तहसीलें और पुलिस जोन बनाए गए थे, जिनके नाम दलित और पिछड़ा वर्ग के संतों व महापुरुषों के नाम पर रखे गए थे.
मायावती ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर छत्रपति शाहूजी महाराज नगर, भीम नगर और कांशीराम नगर (कासगंज क्षेत्र) जैसे जिलों के नाम बदल दिए थे, जिसे जनता कभी माफ नहीं करेगी.
बसपा प्रमुख ने योगी सरकार से आग्रह किया है कि 9 अक्टूबर (कांशीराम जी की पुण्यतिथि) से पहले कांशीराम नगर समेत अन्य सभी जिलों के पुराने नाम वापस बहाल किए जाएं. अगर सरकार ऐसा करती है तो बसपा इसकी आभारी रहेगी.
2027 चुनाव से पहले BJP का बड़ा दांव
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी में भाजपा के समरसता संकल्प अभियान के शुभारंभ के दौरान भदोही का नाम बदलकर संत रविदास नगर करने का ऐलान किया था. इसे 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा के एक बड़े दलित आउटरीच (दलित वर्ग को साधने की कोशिश) के रूप में देखा जा रहा है.
सीएम योगी ने 2014 में नाम बदलने वाली सपा सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था कि पिछली सरकारों ने देश के संतों और महापुरुषों को दरकिनार कर बाबर और औरंगजेब जैसी हस्तियों का महिमामंडन किया.
अखिलेश यादव का पलटवार
दूसरी ओर, इस पूरे विवाद पर पलटवार करने में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी देरी नहीं की. उन्होंने भाजपा सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि "नाम बदलना इस सरकार की आदत बन चुका है."
अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश की जनता ने अब किसी जिले का नहीं, बल्कि 2027 के चुनाव में खुद योगी आदित्यनाथ सरकार को ही बदलने का मन बना लिया है.
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