अखिलेश का PDA और कुर्मी दांव बिगाड़ेगा BJP का खेल? पीलीभीत शहर सीट पर कैसे वापसी करेगी सपा

रजत सिंह

• 01:59 PM • 30 Jul 2026

UP Kiska: यूपी की पीलीभीत शहर सीट पर 2027 चुनाव दिलचस्प होने के संकेत हैं. बीजेपी हैट्रिक की तैयारी में है, जबकि सपा पीडीए और कुर्मी कार्ड के सहारे वापसी की कोशिश कर रही है. जातीय समीकरण और मुस्लिम वोट निर्णायक रहेंगे.

Akhilesh Yadav

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Pilibhit Vidhan Sabha 2027: उत्तर प्रदेश की पीलीभीत शहर विधानसभा सीट राज्य की उन चुनिंदा सीटों में से एक है जहां का सियासी समीकरण हर चुनाव में बेहद दिलचस्प मोड़ लेता है. कभी लगातार तीन बार समाजवादी पार्टी (सपा) का गढ़ रही इस सीट पर पिछले दो चुनावों (2017 और 2022) से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है. योगी सरकार में गन्ना राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार यहां से विधायक हैं. 1.15 लाख से अधिक मुस्लिम मतदाताओं वाली इस सीट पर बीजेपी जहां अपनी हैट्रिक लगाने की तैयारी में है. वहीं सपा अपने 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले के तहत कुर्मी दांव खेलकर वापसी की फिराक में है.

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पीलीभीत सीट का जातीय गणित

पीलीभीत शहर विधानसभा क्षेत्र लोधी, कुर्मी और मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है. अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक.

मुस्लिम: 1,15,000 (सबसे निर्णायक)

कुर्मी: 68,000

लोध: 35,000

कुशवाहा व कश्यप: 18,000-18,000

सिख व जाटव: 12,000-12,000

अन्य (ब्राह्मण, कायस्थ, वैश्य, वाल्मीकि आदि): शेष आबादी

बीजेपी मंत्री का दावा

गन्ना राज्य मंत्री और स्थानीय बीजेपी विधायक संजय सिंह गंगवार का कहना है कि उन्होंने क्षेत्र में ऐतिहासिक काम किए हैं.

1.390 करोड़ रुपये की लागत से सरकारी मेडिकल कॉलेज का निर्माण.

2.इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का विकास, जिससे 3000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिला और पलायन रुका.

3.आसाम चौराहे पर ओवरब्रिज, 12 मंजिला पुलिस ट्रांजिट हॉस्टल और सड़कों का जाल.

4.2017 से पहले होने वाली छीनपैचिंग पर लगाम और महिलाओं को सुरक्षा की गारंटी.

सपा का पलटवार

सपा जिलाध्यक्ष का आरोप है कि 2022 में प्रशासन ने काउंटिंग रोककर बीजेपी प्रत्याशी को जिताया था. सपा का दावा है कि गन्ना किसानों का बकाया भुगतान न होने, अवैध कॉलोनियां काटने और कार्यकर्ताओं के उत्पीड़न से जनता में भारी आक्रोश है. 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद सपा का मानना है कि 2027 में जनता बीजेपी को बेदखल कर देगी.

टिकट बंटवारा और 'मुस्लिम बनाम हिंदू' ध्रुवीकरण का पेच

स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2022 के चुनाव में सपा ने जब कुर्मी बिरादरी के शैलेंद्र गंगवार को उतारा था तब मुकाबला बेहद कड़ा रहा था.

मुस्लिम प्रत्याशी पर खतरा: विश्लेषकों के अनुसार, अगर सपा किसी मुस्लिम प्रत्याशी को मैदान में उतारती है तो चुनाव 'हिंदू बनाम मुस्लिम' के पैटर्न पर सेट हो सकता है जिससे वोटों के ध्रुवीकरण का सीधा फायदा बीजेपी को मिलेगा.

पीडीए/कुर्मी कार्ड: अगर सपा समझदारी दिखाते हुए किसी कुर्मी या ओबीसी उम्मीदवार पर दांव लगाती है तो 2 बार के विधायक के खिलाफ एंटी-इनकंबेंसी का फायदा उठाकर मुकाबला बेहद दिलचस्प बना सकती है.

सपा में जहां पूर्व मंत्री हेमराज वर्मा, अनीस अहमद फूलबाबू, सुधीर तिवारी और रियाज अहमद के रिश्तेदार दावेदारी ठोक रहे हैं. वहीं बीजेपी से संजय सिंह गंगवार का टिकट लगभग तय माना जा रहा है. देखना होगा कि 2027 में पीलीभीत की जनता विकास पर मुहर लगाती है या सपा का पीडीए समीकरण बाजी मारता है.