समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने बदायूं में एक बार फिर केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है. देश में छात्रों और युवाओं के हालिया आंदोलनों का जिक्र करते हुए उन्होंने साफ कहा कि जब देश की नई पीढ़ी सड़क पर उतरती है तो बड़ी से बड़ी सरकार को भी अपने कदम पीछे खींचने पड़ते हैं.
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अखिलेश यादव ने जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के प्रदर्शनों को याद करते हुए एक पुराना नारा भी दोहराया. वही नारा जो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद अभिजीत दीपके ने मंच से बोला था. "झुकती है सरकार, बस झुकाने वाला चाहिए." अखिलेश ने इन 7 शब्दों के नारे को दोहराते हुए दावा किया कि जो सरकार पहले किसी की बात सुनने को तैयार नहीं थी, उसे आखिरकार नौजवानों की ताकत के आगे झुकना ही पड़ा.
'प्रधानमंत्री की मन की बात तो सुन ली, लेकिन गृह मंत्री के मन में क्या था?'
अखिलेश यादव ने हालिया राजनीतिक हलचलों और इस्तीफों पर चुटकी लेते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'मन की बात' तो पूरा देश सुनता आया है, लेकिन पर्दे के पीछे जो चल रहा है, असली कहानी वहीं छुपी है.
उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जी की मन की बात तो हमने और आपने सबने सुनी, लेकिन गृह मंत्री जी की मन की बात कोई नहीं सुन पाया!”
भाजपा सांसदों के संकट और ‘इस्तीफे’ का पूरा गणित
अपने संबोधन में अखिलेश यादव ने दावा किया कि भाजपा के कई सांसद अंदर ही अंदर तनाव और संकट में थे. वे इस बात को लेकर परेशान थे कि जनता के बीच उपजे इस जनाक्रोश और मुसीबत से आखिर कैसे बचा जाए.
अखिलेश के मुताबिक, भाजपा सांसद समझ चुके थे कि युवाओं के गुस्से के आगे टिकना आसान नहीं है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बचाने के लिए मंत्री को हटना पड़ा. भाजपा सांसदों के मन की बात आखिरकार केंद्रीय मंत्री ने सुन ली और अपना इस्तीफा दे दिया.
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