Lalitpur Assembly Seat: बुंदेलखंड की राजनीति में ललितपुर की 'ललितपुर सदर' विधानसभा सीट बेहद अहम मानी जाती है. यह एक ऐसी सीट है जहां का सियासी गणित पूरी तरह से लोधी और कुशवाहा समीकरण के इर्द-गिर्द घूमता है. एक तरफ जहां समाजवादी पार्टी (सपा) दशकों से इस सीट पर अपनी पहली जीत के लिए तरस रही है. वहीं भारतीय जनता पार्टी लगातार दो चुनावों से अपना परचम लहरा रही है. 2022 और 2017 में बीजेपी के राम रतन कुशवाहा ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की जबकि उससे पहले यह सीट बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का मजबूत गढ़ रही है. सवाल यह है कि क्या 2027 में बीजेपी अपनी हैट्रिक बना पाएगी या बसपा-सपा बाजी पलटेंगी?
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ललितपुर सदर सीट का क्या है जातीय गणित?
ललितपुर सदर सीट पर जीत का रास्ता ओबीसी और दलित मतदाताओं के रुख से होकर तय होता है. अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक:
कुशवाहा: करीब 70,000
लोधी: करीब 55,000
यादव: करीब 47,000
अहिरवार (दलित): करीब 37,000
ब्राह्मण: करीब 26,000
क्षत्रिय: करीब 25,000
सहारिया (आदिवासी): करीब 25,000
मुस्लिम: करीब 13,000
जैन: करीब 10,000
दलित वोट बैंक पारंपरिक रूप से बसपा का मजबूत आधार रहा है. लेकिन जब बीजेपी कुशवाहा और लोधी समाज के साथ सवर्ण वोटों को एकजुट करने में सफल होती है, तो उसका पलड़ा भारी हो जाता है.
विधायक का दावा
वर्तमान बीजेपी विधायक राम रतन कुशवाहा 2027 की तैयारी और अपनी हैट्रिक को लेकर बेहद आश्वस्त हैं. अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा
"हमारी सबसे बड़ी पूंजी जनता है. हमने मेडिकल कॉलेज बनवाया, शहर की वो सड़कें बनवाईं जो कभी नहीं बनती थीं और ब्रिटिश काल के शहजाद नदी के पुल पर तेजी से काम चल रहा है. जखौरा में डिग्री कॉलेज और रोणा में 8 एकड़ में कंपोजिट विद्यालय बन रहा है. जनता में कहीं कोई नाराजगी नहीं है. इस बार हम सवा लाख से ज्यादा वोटों के अंतर से चुनाव जीतेंगे.'
"2027 में बहन जी की सरकार बनाएंगे"
2022 के चुनाव में रनर-अप रही बसपा का मानना है कि पिछली बार कुछ मामूली चूक हुई थी जिसे इस बार सुधारा जा रहा है. बसपा नेताओं का कहना है कि पार्टी ईमानदारी से बूथ स्तर पर काम कर रही है. मायावती के निर्देशों पर पूरे प्रदेश में पोलिंग बूथों के रिव्यू का काम चल रहा है और 2027 में कार्यकर्ताओं के दम पर बहन जी को पांचवीं बार मुख्यमंत्री बनाएंगे.
क्या कहते हैं स्थानीय पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक?
स्थानीय वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि फिलहाल ललितपुर सदर में बीजेपी काफी मजबूत स्थिति में है. क्योंकि विपक्ष (सपा-कांग्रेस या बसपा) के पास अब तक ऐसा कोई बड़ा या सर्वमान्य चेहरा नहीं है जो कुशवाहा-लोधी समीकरण को तोड़ सके.
हालांकि विश्लेषकों का यह भी कहना है कि 2027 का मुकाबला इतना आसान नहीं होगा. सपा और कांग्रेस (PDA गठबंधन) मिलकर चुनाव लड़ते हैं और स्थानीय मुद्दों पर एकजुट होकर आक्रामक रणनीति अपनाते हैं तो मुकाबला काफी नजदीकी हो सकता है. अंततः पूरा चुनाव इस बात पर निर्भर करेगा कि विपक्ष बीजेपी के सामने किसे उम्मीदवार बनाकर उतारता है.
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