यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में हम रोजाना उत्तर प्रदेश की राजनीति और राज्य से जुड़ी तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज की पहली बड़ी खबर बिहार के बांकीपुर उपचुनाव और उत्तर प्रदेश की राजनीति पर पड़ने वाले इसके असर से जुड़ी है जहां प्रशांत किशोर की किस्मत का दांव लगा है. दूसरी खबर में हम बात करेंगे समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव के आक्रामक तेवरों और उनके नए पॉलिटिकल प्रोजेक्ट की जिससे वह सीधे बीजेपी को घेर रही हैं. वहीं तीसरी खबर में जंतर-मंतर पर हुए हालिया विवाद और सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के बाद सरकार की रणनीति और संसद के भीतर छिड़ी रार पर विस्तृत चर्चा करेंगे.
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प्रशांत किशोर के दांव से कितना बदलेगा समीकरण?
देश में हो रहे उपचुनावों में सबसे ज्यादा चर्चा बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट की हो रही है. यह सीट बीजेपी नेता नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है. लेकिन असली मुकाबला जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) के चुनावी मैदान में उतरने से दिलचस्प हो गया है.
बीते 20 सालों में देश के कई बड़े चुनाव जिताने में अहम भूमिका निभाने वाले प्रशांत किशोर की पार्टी 'जन सुराज' का प्रदर्शन पिछले बिहार विधानसभा चुनाव में काफी निराशाजनक रहा था जहां उनकी पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था. ऐसे में बांकीपुर का यह उपचुनाव पीके के राजनीतिक भविष्य के लिए अग्निपरीक्षा माना जा रहा है.
यूपी पर क्या पड़ेगा असर?
अगर बांकीपुर में प्रशांत किशोर जीत दर्ज करते हैं तो 3 तारीख को आने वाले नतीजे उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनावों पर भी मनोवैज्ञानिक असर डालेंगे. जंतर-मंतर पर सीजेपी प्रोटेस्ट के बाद बने माहौल के बीच यदि बीजेपी को यहां हार मिलती है तो विपक्ष को यूपी में सरकार के खिलाफ माहौल बनाने का नया हथियार मिल जाएगा. वहीं अगर पीके चुनाव हारते हैं तो बीजेपी इसे भुनाएगी कि जनता सरकार के साथ है.
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी और प्रशांत किशोर के बीच किसी गठबंधन या चुनावी रणनीतिक सहयोग (आईपैक/IPAC) की संभावना लगभग खत्म हो चुकी है. सपा सूत्रों का मानना है कि केंद्रीय एजेंसियों के दबाव के कारण किसी भी बाहरी एजेंसी के साथ रणनीति साझा करना जोखिम भरा हो सकता है.
डिंपल यादव का फ्रंटफुट अवतार
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव इन दिनों संसद से लेकर सड़क तक बेहद आक्रामक और सक्रिय नजर आ रही हैं. सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट के समर्थन में सड़क पर उतरने से लेकर संसद में सरकार की नीतियों के खिलाफ बोलने तक, डिंपल यादव पार्टी का प्रमुख चेहरा बनकर उभरी हैं.
वंदे मातरम बिल और शिक्षा पर सरकार को घेरा
संसद भवन के बाहर मीडिया से बात करते हुए डिंपल यादव ने सरकार द्वारा लाए जा रहे वंदे मातरम बिल और पेपर लीक संशोधनों पर सीधा हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार के पास अब कोई ठोस काम नहीं बचा है और वह असली मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए बार-बार एक ही तरह के बिल ला रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने यूनिवर्सिटीज पर अपने लोगों को बिठाकर कब्जे करवाए हैं और वह शिक्षा व्यवस्था को बेहतर करने के बजाय केवल 'बांटो और राज करो' की राजनीति कर रही है.
अमित शाह पर साधा निशाना
प्रदर्शनकारी छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और कार्रवाई पर बोलते हुए डिंपल यादव ने सवाल उठाया कि गृह मंत्री अमित शाह इस मुद्दे पर संसद में आकर जवाब क्यों नहीं दे रहे हैं. उन्होंने कहा कि जो सरकार हर बात पर तुष्टिकरण और 'घुस के मारेंगे' के बयान देती है, वह आज छात्रों पर हुई कार्रवाई पर चुप्पी साधे हुए है.
सीजेपी (CJP) प्रोटेस्ट का असर और सपा की नई 'विमेन कार्ड' रणनीति
डिंपल यादव की इस नई मुखरता के पीछे समाजवादी पार्टी की एक सोची-समझी रणनीतिक योजना मानी जा रही है. भारतीय जनता पार्टी अक्सर समाजवादी पार्टी पर गुंडाराज और कानून-व्यवस्था के मुद्दे को लेकर हमलावर रहती है और महिला मतदाताओं को साधने की कोशिश करती है.
सपा अब बीजेपी के इस नैरेटिव को काटने के लिए डिंपल यादव को आगे कर रही है.
पार्टी यह संदेश देना चाहती है कि वह महिलाओं, बेटियों और छात्रों की शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर पूरी मजबूती से खड़ी है.
डिंपल यादव के फ्रंट पर आने से सपा अपने साथ महिला मतदाताओं की भागीदारी और उपस्थिति को बढ़ाना चाहती है.
आने वाले चुनावों में डिंपल यादव की यह सक्रियता सपा के लिए महिला वोट बैंक को जोड़ने में एक मास्टरस्ट्रोक साबित हो सकती है.
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